बेंगलुरु: 80 एकड़ से ज़्यादा “लंग स्पेस” यानी खुली हवा की जगह बनाना. सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कर्नाटक सरकार ने यही दलील दी है ताकि कैबिनेट के उस फैसले को सही ठहराया जा सके, जिसमें बेंगलुरु टर्फ क्लब (BTC) — एक प्रमुख घुड़दौड़ क्लब — को भारत की भीड़भाड़ वाली आईटी राजधानी से लगभग 70 किलोमीटर दूर कुणिगल शिफ्ट करने का फैसला लिया गया है.
दिप्रिंट से बात करने वाले कई क्लब सदस्यों ने सरकार के इस कदम और इसके पक्ष में दिए गए तर्कों पर सवाल उठाए.
“टर्फ क्लब की 60-70 एकड़ से ज़्यादा जमीन पहले से ही बिना किसी निर्माण के खुली जगह है,” क्लब के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर दिप्रिंट से कहा. “यह पहले से ही लंग स्पेस है.”
गुरुवार को कैबिनेट ने कुणिगल स्टड फार्म में लगभग 110 एकड़ जमीन 29 साल के लिए देने का फैसला किया, जिसे आगे बढ़ाने का विकल्प भी होगा. रेसिंग गतिविधि वहीं शिफ्ट की जाएगी. यह भी तय हुआ कि BTC जमीन की गाइडेंस वैल्यू का 2.5 प्रतिशत सालाना लीज़ राशि के रूप में देगा.
BTC बेंगलुरु के बिजनेस जिले के बीचोंबीच 83 एकड़ की कीमती जमीन पर स्थित है. इसे शिफ्ट करने के फैसले से यह डर पैदा हो गया है कि भविष्य में भारत की आईटी राजधानी को डी-कंजेस्ट करने के नाम पर इस विरासत स्थल के हिस्सों को सड़क चौड़ीकरण और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए तोड़ा जा सकता है.

“टर्फ क्लब की 60-70 एकड़ से ज़्यादा जमीन पहले से ही बिना किसी निर्माण के खुली जगह है. यह पहले से ही लंग स्पेस है,” एक क्लब सदस्य कहते हैं.
पहले बी.एस. येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने इसी जगह पर 100 मंजिला ऊंची इमारत बनाने का प्रस्ताव दिया था. लेकिन बाद में यह विचार छोड़ दिया गया.
अब सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने फैसला किया है कि BTC को अगले दो साल में शहर से बाहर कुणिगल स्टड फार्म शिफ्ट किया जाएगा — जो भारत के सबसे पुराने और प्रमुख घोड़ा-प्रजनन केंद्रों में से एक है.
क्लब सदस्यों का कहना है कि टर्फ क्लब की 60-70 एकड़ से ज़्यादा जमीन पहले से ही बिना किसी निर्माण के खुली जगह है.
लेकिन सदस्यों का दावा है कि इससे खेल, उससे जुड़ी सहायक अर्थव्यवस्था और कुणिगल के 200 साल पुराने विरासत घोड़ा-प्रजनन केंद्र को नुकसान होगा.
सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि कुणिगल की 420 एकड़ जमीन में से 110 एकड़ BTC को दी जाएंगी. यह जमीन अभी घोड़ों के पालन-पोषण और अन्य घुड़सवारी से जुड़ी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होती है, जिसमें देश के दूसरे शहरों को घोड़े सप्लाई करना भी शामिल है.
BTC अपने क्लब को चुने हुए सदस्यों और एक कमेटी के साथ चलाता है, जिसमें एक चेयरपर्सन, स्टीवर्ड और अन्य सदस्य होते हैं.
BTC को दो साल तक लगभग 4 एकड़ जमीन रखने की अनुमति दी जाएगी ताकि घुड़दौड़ जारी रह सके और विरासत संरचनाओं व क्लब हाउस को संरक्षित रखा जा सके.
“कुणिगल स्टड फार्म दुनिया का सबसे पुराना ऐसा संस्थान है. टीपू सुल्तान ने अपनी सेना के लिए घोड़े तैयार करने के लिए यह जगह स्थापित की थी. फिर यह परंपरा मैसूर के महाराजा और उसके बाद ब्रिटिशों ने जारी रखी. वहां किसी भी समय लगभग 600 घोड़े होते हैं, जिनमें 200 युवा घोड़े आते हैं और 100 सिस्टम से बाहर जाते हैं,” यूनाइटेड रेसिंग एंड ब्लडस्टॉक ब्रीडर्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर जैन मिर्ज़ा ने दिप्रिंट से कहा.
यूनाइटेड रेसिंग कुणिगल स्टड फार्म का आखिरी लीज़धारक था और अब भी यहीं से काम करता है.
स्टड फार्म में इंटीग्रेटेड टाउनशिप बनाने की पहले की योजना पर स्थानीय लोगों ने कड़ा विरोध किया था.
रेसकोर्स को कुणिगल जैसे ग्रामीण इलाके में शिफ्ट करने के कदम की तुलना बेंगलुरु से एक “बुराई” आयात करने से की जा रही है, क्योंकि इस खेल को अक्सर जुए के साथ जोड़ा जाता है.
आलोचकों का कहना है कि BTC और ऐसे क्लब बड़े शहरी इलाकों पर अभिजात वर्ग की निजी संपत्ति की तरह कब्जा करते हैं. मौजूदा स्थिति के समर्थकों का कहना है कि अगर जमीन सरकार को दे दी गई तो वहां और कंक्रीट संरचनाएं बन सकती हैं या अवैध कब्जे हो सकते हैं.
‘घोड़ों पर सट्टा’
कर्नाटक का यह कदम नया नहीं है. कई सरकारें पहले भी दशकों पहले खेलों को बढ़ावा देने के लिए दी गई खुली जगहों को अपने कब्जे में लेने की कोशिश करती रही हैं.
नए एयरपोर्ट रोड पर स्थित प्रतिष्ठित बेंगलुरु गोल्फ क्लब और पैलेस ग्राउंड्स के कुछ हिस्से को सड़क चौड़ीकरण के लिए लेने की कोशिशें जारी हैं.
उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी लगभग 6 एकड़ लालबाग — जो बची हुई कुछ खुली जगहों में से एक है — को 40,000 करोड़ रुपये की टनल रोड बनाने के लिए लेने का प्रस्ताव दिया था.
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) की एक स्टडी के अनुसार 1973 से 2014 के बीच पक्की सतहों (निर्माण, सड़क आदि) में लगभग 1000 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि वनस्पति में 78 प्रतिशत और जलाशयों में 79 प्रतिशत की कमी आई है.
दूसरे राज्यों की सरकारों ने भी इसी तरह के कदम उठाए हैं.

जुलाई 2024 में बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) और रॉयल वेस्टर्न इंडिया टर्फ क्लब के बीच एक समझौता हुआ, जिसके तहत प्रतिष्ठित महालक्ष्मी रेसकोर्स को नगर निगम को सौंपा जाएगा.
प्रस्ताव है कि इस जगह को न्यूयॉर्क के सेंट्रल पार्क की तर्ज पर विकसित किया जाए.
केरल में सरकार ने 25 एकड़ के त्रिवेंद्रम गोल्फ क्लब को अपने कब्जे में लेने की कोशिश की है. वहीं तमिलनाडु सरकार अन्ना सलाई के गोल्फ कोर्स को लेने की कोशिश कर रही है.
पहले बी.एस. येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने इसी जगह पर 100 मंजिला ऊंची इमारत बनाने का प्रस्ताव दिया था. लेकिन बाद में यह विचार छोड़ दिया गया.
सदस्यों का कहना है कि BTC ऐसी जगह है जो वैक्सीन और एंटी-वेनम सीरम बनाने में भी मदद करती है.
“यहां बहुत सारी गतिविधियां होती हैं, खाद सप्लाई करने वाले लोग होते हैं… रेसिंग से जुड़ी बहुत बड़ी सहायक इंडस्ट्री चलती है. लेकिन दुर्भाग्य से लोग इसे सिर्फ जुआ समझते हैं. जो अनुभवी पंटर होते हैं, वे उतने ही समझदार होते हैं जितने शेयर बाजार में निवेश करने वाले,” BTC के स्टीवर्ड अजीत सलधाना ने कहा.
तुमकुरु से कांग्रेस के पूर्व सांसद एस.पी. मुदहनुमेगौड़ा ने पहले केंद्र सरकार को लिखा था कि कुणिगल स्टड फार्म को अंतरराष्ट्रीय घोड़ा-प्रजनन केंद्र में बदला जाना चाहिए.
करीब एक दशक पहले BTC सालाना लगभग 2,000 करोड़ रुपये की आमदनी करता था. उस समय राज्य सरकार, जिसे रेसिंग लाइसेंस जारी करने का अधिकार था, 4 प्रतिशत टैक्स की हकदार थी. लेकिन गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) लागू होने के बाद आमदनी “बुरी तरह घट गई”, सदस्यों का कहना है, और यह घटकर करीब 500-600 करोड़ रुपये रह गई.
इस गिरावट ने BTC के प्रति सरकार के नजरिए को काफी बदल दिया है.
“पूरे दांव की रकम पर GST लगता है. लेकिन तकनीकी रूप से यह जीत की रकम पर लगना चाहिए. किसी भी सफल पंटर को आयकर देना पड़ता था. पहले वहां TDS भी था. यह सब ठीक और संतुलित था. यही दोहरी वसूली रेसिंग के खत्म होने की वजह बनी,” सलधाना कहते हैं.
‘घोड़े का श्राप’
कर्नाटक के मुख्यमंत्री अक्सर BTC को शिफ्ट करने के मामले में सावधानी बरतते रहे हैं.
एक धारणा है — जिसे अक्सर तथ्यों के हिसाब से बनाई गई थ्योरियों से हवा दी जाती है — कि जो मुख्यमंत्री BTC में दखल देते हैं, वे सत्ता खो देते हैं. इसे “घोड़े का श्राप” कहा जाता है. यह अंधविश्वास 1980 के शुरुआती दशक से जुड़ा है और इसे रामकृष्ण हेगड़े की सरकार के पतन और उनके बाद कई सरकारों के गिरने की वजह भी बताया जाता है.
यह भी कहा जाता है कि शुरुआत में BTC की जमीन पर ऊंची इमारत बनाने की योजना के बाद येदियुरप्पा ने रेसकोर्स के अंदर मंदिर में जाकर माफी मांगी थी.
सिद्धारमैया, जो अक्सर खुद को नास्तिक, अज्ञेयवादी और आस्तिक पहचान के बीच संतुलित करते रहते हैं, हालांकि इन अंधविश्वासों से प्रभावित नहीं दिखते.
सदस्यों का कहना है कि उन्होंने अपनी गतिविधियां चलाने के लिए वैकल्पिक जमीन मांगी थी, न कि सबसे पुराने बचे हुए स्टड फार्म में से एक को नष्ट होते देखने के लिए. उनका यह भी दावा है कि एक ‘गलती’ की वजह से सरकार को BTC पर नियंत्रण मिला.
“करीब 2010 में, उस समय की कमेटी ने उस जमीन के लिए लीज समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए, जो हमेशा के लिए दी गई थी, और इस तरह मूल अनुदान के अधिकार छोड़ दिए. यही गलती थी,” ऊपर बताए गए सदस्य ने कहा.
इससे सरकार को पहले दिए गए लीज वाली जमीन को नवीनीकृत करने और उसे अपना बताने का अधिकार मिल गया. “यह टाइटल केस अभी सुप्रीम कोर्ट में सुना जा रहा है, लेकिन सरकार पहले ही हमें बाहर करने का फैसला कर चुकी है,” उनमें से एक ने कहा.
1916 में मैसूर के महाराजा के साथ हुए समझौते के बाद रेस आयोजित करने के लिए यह जमीन स्टीवर्ड्स को दी गई थी.
उस समय भारत में तैनात ब्रिटिश अधिकारियों ने समझा कि देश में पाले गए घोड़े भारत में घुड़दौड़ के लिए उपयुक्त नहीं हैं. बेंगलुरु की सुखद जलवायु खास तौर पर फारस से लाए गए घोड़ों को पालने के लिए अनुकूल थी.
दिसंबर 1920 में चार स्टीवर्ड — मेजर आर.एच.ओ.डी. पैटरसन, सर लेस्ली मिलर, मेजर जे.एम. होम्स और सी.एन. सूर्यनारायण राव — हाई ग्राउंड्स में टर्फ क्लब की मौजूदा जगह पर ग्रैंडस्टैंड में मिले.
“उक्त जमीन रेस क्लब कमेटी के एकमात्र कब्जे में रहेगी, जब तक कि उसका उपयोग रेसकोर्स के रूप में किया जाता रहेगा,” उस समय हुए समझौते में लिखा गया था.
उनकी बैठक का अंत बेंगलुरु में एक रेस क्लब बनाने के फैसले के साथ हुआ. जल्द ही नियम बनाए गए. क्लब के 30 सदस्य थे, और स्टीवर्ड्स को स्टैंड सदस्यों को चुनने का अधिकार था.
दोनों प्रकार की सदस्यता के लिए प्रवेश शुल्क 20 रुपये था. बैंगलोर रेस क्लब के नियम बनाए गए, पढ़े गए और 13 मार्च 1921 को यूनाइटेड सर्विसेज क्लब में हुई स्टीवर्ड्स की बैठक में पारित किए गए. 20 मई 1921 को एक सामान्य बैठक में BTC का उद्घाटन हुआ. 9 सितंबर 1923 को महाराजा की सरकार ने जमीन बैंगलोर टर्फ क्लब को दे दी.
हालांकि BTC को शिफ्ट करने की पहली कोशिश 1968 में बी.डी. जट्टी सरकार ने की थी, लेकिन महाराजा के साथ पहले हुए समझौते की वजह से क्लब सुरक्षित रहा.
कुणिगल का इतिहास
कुणिगल स्टड फार्म का इतिहास भी कुछ अलग नहीं है.
इस स्टड फार्म की शुरुआत करीब 1780 के आसपास मानी जाती है, जब टीपू सुल्तान ने ब्रिटिशों से लड़ने के लिए अपनी घुड़सवार सेना के लिए घोड़े तैयार करने हेतु इसे स्थापित किया था.
आजादी के बाद भी यह फार्म घोड़ों के प्रजनन केंद्र के रूप में जारी रहा. पहले यह पूर्व मैसूर राज्य के अधीन था और बाद में कर्नाटक सरकार के अधीन, जहां घुड़सवार सेना और माउंटेड पुलिस के लिए घोड़े तैयार किए जाते थे.
1968 में इस स्टड फार्म को रेसिंग के लिए घोड़ों के प्रजनन को बढ़ावा देने के लिए बैंगलोर टर्फ क्लब को लीज पर दिया गया. 1992 में कर्नाटक सरकार ने इसे विजय माल्या के स्वामित्व वाली यूनाइटेड रेसिंग एंड ब्लडस्टॉक ब्रीडर्स लिमिटेड को लीज पर दिया. 2022 में यूनाइटेड रेसिंग की 30 साल की लीज समाप्त हो गई और जनवरी 2023 में अनुबंध नवीनीकरण के लिए टेंडर जारी किए गए.
अगले महीने, विल्लो पूनावाला ग्रीनफील्ड फार्म्स ने 1.16 करोड़ रुपये के रिजर्व प्राइस के मुकाबले 1.40 करोड़ रुपये सालाना की सबसे ऊंची बोली लगाई. बोली को मंजूरी मिल गई थी और अंतिम स्वीकृति का इंतजार था. इससे पहले कि इसे मंजूरी मिलती, मार्च में राज्य में विधानसभा चुनाव घोषित हो गए और नई कांग्रेस सरकार ने पशुपालन विभाग द्वारा पहले जारी किया गया टेंडर वापस ले लिया.
पहले इंटीग्रेटेड टाउनशिप के प्रस्ताव और अब पूरे रेसकोर्स को शिफ्ट करने की योजना के कारण स्टड फार्म पर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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