कोलकाता, सात फरवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना में एक विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) सुनवाई केंद्र पर शनिवार को इस आरोप को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया कि जीवित मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए उन्हें मृत दिखाने का प्रयास किया जा रहा है। यह जानकारी पुलिस ने दी।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में स्थित एक एसआईआर सुनवाई केंद्र पर तृणमूल कांग्रेस समर्थकों पर ‘‘उपद्रव’’ करने का आरोप लगाया।
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने बदुरिया ब्लॉक कार्यालय में तृणमूल कांग्रेस समर्थकों पर उपद्रव करने का आरोप लगाया, जबकि राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी ने इस आरोप का खंडन किया और दावा किया कि आम लोग इस प्रक्रिया से असंतुष्ट हैं।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि बेनाग्राम के चांदीपुर ग्राम पंचायत के बूथ नंबर 45 और अटघरा ग्राम पंचायत के बूथ नंबर 80 के 33 मतदाताओं को ‘फॉर्म 7’ भरने के लिए कहा गया था।
निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार, ‘फॉर्म 7’ का उपयोग या तो मृत मतदाताओं के नाम हटाने के लिए या किसी मतदाता का नाम एक से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में दर्ज होने पर डुप्लिकेट प्रविष्टियों को हटाने के लिए किया जाता है।
प्रभावित मतदाताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें मृत घोषित करके जानबूझकर उनके नाम हटाने की साजिश रची गई है।
अधिकारी ने बताया, ‘‘व्यथित मतदाताओं ने बदुरिया ब्लॉक कार्यालय में विरोध प्रदर्शन किया और आरोप लगाया कि जीवित मतदाताओं को मृत घोषित करने के पीछे भाजपा का हाथ है।’’
स्थानीय निवासियों ने निर्वाचन आयोग से ‘षड्यंत्र’ में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
बदुरिया के बीडीओ पार्थ हाजरा ने बताया कि कई मतदाताओं ने शिकायतें दर्ज कराई हैं और मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा, ‘मामले की जांच की जा रही है और शिकायतों की पुष्टि की जा रही है।’
अधिकारियों ने बताया कि राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी से भी रिपोर्ट मांगी है।
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता अधिकारी ने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान जानबूझकर कानून-व्यवस्था बिगड़ने देने का राज्य सरकार पर आरोप लगाया।
अधिकारी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के ‘तत्वों’ ने फरक्का और चाकुलिया में पिछली घटनाओं की तरह, बदुरिया खंड कार्यालय के अंदर हंगामा किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि उपद्रवियों ने एसआईआर सुनवाई के दौरान परिसर में तोड़फोड़ की और अधिकारियों को धमकाया।
शनिवार को सुनवाई का अंतिम दिन है, यदि इसे बढ़ाया ना गया तो।
अधिकारी ने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें कुछ गुस्साये लोग बीडीओ कार्यालय के कर्मचारियों के साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार करते दिख रहे हैं, जबकि अधिकारी उन्हें शांत करने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं।
‘पीटीआई-भाषा’ वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र तौर पर पुष्टि नहीं कर सका।
भाजपा नेता ने बांग्ला भाषा में लिखे अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि राज्य में कोई कानून-व्यवस्था नहीं है और राज्य सरकार ने पुलिसकर्मियों को सुनवाई केंद्र से ‘‘जानबूझकर हटा दिया है’’, ताकि तृणमूल कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की कथित अवैध गतिविधियां आसान हो सकें।
भाजपा नेता ने राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी पर आरोप लगाया कि वह मतदाता सूची में हेरफेर करने और “अवैध मतदाताओं” की बिना किसी प्रशासनिक बाधा के सुरक्षा करने की कोशिश कर रही है।
इस पर तृणमूल कांग्रेस प्रवक्ता देबांगशु भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की इस घटना में कोई संलिप्तता नहीं है और इसे “प्रताड़ना और वैध मतदाताओं को भाजपा द्वारा हटाए जाने के प्रयास” के प्रति जनता की निराशा के रूप में देखा जाना चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस के नेता महबूब आलम ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही भाजपा जीवित मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश रच रही है। हालांकि, उन्होंने इस प्रयास को नाकाम करने का दावा किया। उन्होंने कहा कि सुनवाई के बाद ये 33 मतदाता बदुरिया पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएंगे।
भाषा अमित संतोष
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