सिलीगुड़ी, सात मार्च (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को बागडोगरा हवाई अड्डे के पास आयोजित आदिवासी समुदाय के कार्यक्रम में कम उपस्थिति पर असंतोष व्यक्त किया और कार्यक्रम स्थल को बिधाननगर से स्थानांतरित करने के निर्णय पर सवाल उठाया।
उन्होंने अपनी यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके मंत्रियों की अनुपस्थिति का भी जिक्र किया।
मुर्मू ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “आम तौर पर, जब राष्ट्रपति आती हैं तो मुख्यमंत्री को उनका स्वागत करना चाहिए और अन्य मंत्रियों को भी उपस्थित रहना चाहिए। लेकिन वह (ममता बनर्जी) नहीं आईं। राज्यपाल बदल गए हैं और इसलिए नहीं आ सके। लेकिन चूंकि तारीख तय थी, इसलिए मैं आई हूं। कोई बात नहीं। यहां आने के लिए आप सभी का धन्यवाद।”
मुर्मू ने कहा, “अगर कार्यक्रम बिधाननगर में आयोजित होता, तो बेहतर होता। वहां पर्याप्त जगह है और कई लोग शामिल हो सकते थे।”
उन्होंने कहा, “लेकिन मुझे नहीं पता कि राज्य प्रशासन ने वहां कार्यक्रम की अनुमति क्यों नहीं दी। आज का कार्यक्रम ऐसी जगह पर हो रहा है, जहां लोगों का आना मुश्किल है। शायद राज्य सरकार आदिवासियों का कल्याण नहीं चाहती और इसलिए उन्हें यहां आने से रोका गया।”
राष्ट्रपति ने कहा, “ममता बनर्जी मेरी ‘छोटी बहन’ जैसी हैं। मैं भी बंगाल की बेटी हूं। लेकिन मुझे नहीं पता कि मुझे वहां जाने की अनुमति क्यों नहीं दी गई। मुझे नहीं पता कि वह नाराज हैं या नहीं। खैर, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। आप सब ठीक रहें।”
मुर्मू ने ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन में आने वाली व्यापक चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा, “जब मैं इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए यहां आ रही थी, तो मुझे एहसास हुआ कि कोई इस आयोजन को होने देना नहीं चाहता। ऐसा लगता है कि कुछ लोग संथालों को प्रगति करते, सीखते और एकजुट होकर मजबूत होते देखना नहीं चाहते।”
मुर्मू को वार्षिक कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था, जो मूल रूप से सिलीगुड़ी के बिधाननगर में आयोजित होने वाला था।
हालांकि, अधिकारियों ने सुरक्षा और अन्य व्यवस्था संबंधी कारणों का हवाला देते हुए कार्यक्रम स्थल को बागडोगरा हवाई अड्डे के पास गोशाईपुर में स्थानांतरित कर दिया।
शनिवार दोपहर जब राष्ट्रपति कार्यक्रम स्थल पर पहुंची, तो वहां केवल कुछ ही लोग उपस्थित थे।
सिलीगुड़ी के महापौर गौतम देब ही एकमात्र प्रतिनिधि थे, जो हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए उपस्थित थे।
प्रोटोकॉल के अनुसार, राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए आमतौर पर मुख्यमंत्री या राज्य सरकार का कोई मंत्री उपस्थित होता है।
कोलकाता में ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से मनमाने ढंग से नाम हटाए जाने के विरोध में लगातार दूसरे दिन भी अपना धरना जारी रखा।
भाषा जितेंद्र माधव
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