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Wednesday, 18 February, 2026
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बंगाल: एसआईआर में ‘अंतर-धार्मिक पिता-पुत्र’ से लेकर ‘पूर्व-पंजीकृत जन्मतिथि’ तक के मामले

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कोलकाता, 18 फरवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दस्तावेजीकरण के दौरान अंतरधार्मिक पिता-पुत्र संबंधों से लेकर पूर्व-पंजीकृत जन्मतिथि तक गंभीर अनियमितताएं आई हैं जिस पर निर्वाचन आयोग ने चिंता जताई है।

आयोग के मुताबिक खामियां सुनवाई और दस्तावेज अपलोड करने के चरण के पूरा होने के बाद ‘‘विशेष विश्लेषण’’ के दौरान सामने आई हैं।

अधिकारियों ने बताया कि मतदाताओं द्वारा दी गई असामान्य जानकारियों ने आयोग के शीर्ष अधिकारियों के बीच चिंता पैदा कर दी है। इन आंकड़ों को राज्य के मतदान अधिकारियों द्वारा उन मतदाताओं के सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान मंजूरी देकर अपलोड किया गया था जिन्हें तार्किक विसंगतियों के आधार पर या प्रपत्र चरण के दौरान स्थिति अस्पष्ट होने के कारण सुनवाई के लिए बुलाया गया था।

अधिकारियों ने बताया कि पूर्वी मेदिनीपुर जिले के पांस्कुरा पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में, एसआईआर के पर्यवेक्षकों ने कथित तौर पर शेख राजेश अली नामक एक मतदाता का प्रपत्र अपलोड किया है, जिसके पिता का नाम भुवन चंद्र बेरा के रूप में दर्ज है।

संबंधित मतदाता प्रपत्र (ईएफ) की जांच करने पर अधिकारियों ने पाया कि भुवन चंद्र बेरा को एक अन्य मतदाता, बिजय कृष्ण बेरा के पिता के रूप में दर्ज किया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि यह त्रुटि संबंधित मतदाता सूची अधिकारी की चूक थी और यदि गहन जांच के दौरान इसका पता न चलता तो अंतिम मतदाता सूची में भी यह त्रुटि ही रहती।

उन्होंने बताया कि दक्षिण 24 परगना जिले के मगराहट में, एक मतदाता ने राज्य स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत स्थानीय सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र द्वारा जारी अपना जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया, जो उनकी जन्म तिथि 30 अक्टूबर, 1990 प्रमाणित करता है।

चौंकाने वाली बात यह है कि मतदाता के जन्म पंजीकरण की तारीख 23 अगस्त, 1990 बताई गई है, जो प्रमाण पत्र में उल्लिखित वास्तविक जन्म तिथि से 68 दिन पहले की है।

निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने बताया, ‘‘हमारे लिए यह पता लगाना मुश्किल होगा कि प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारी की ओर से कोई लिपिकीय त्रुटि थी या मतदाता ने दुर्भावनापूर्ण इरादे से इसे दाखिल किया था। फिर भी, संबंधित मतदान अधिकारी को इस दस्तावेज़ को स्वीकार ही नहीं करना चाहिए था, अपलोड करना तो दूर की बात है।’’

निर्वाचन आयोग ने पिछले हफ्ते कोलकाता के दक्षिण-पश्चिमी बाहरी इलाके में स्थित मटियाबुर्ज क्षेत्र में एक मतदाता के आंकड़ों में भारी अनियमितताओं को उजागर किया, जहां मतदाताओं द्वारा प्रदान किए गए दस्तावेज के मुताबिक एक दंपति के तीसरे और चौथे बच्चे की उम्र का अंतर एक महीने से भी कम था।

इसी तरह एक ही परिवार के 10 सदस्यों द्वारा साझा किए गए दस्तावेजों में एसके अब्दुल हई (अलग-अलग रूपों में अब्दुल हई, अब्दुल हई शेख और अब्दुस हई के वैकल्पिक रूप में) को पिता और मनोवारा बीबी को 10 बच्चों की माता के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

इसके मुताबिक तीसरे बच्चे, शेख इरशाद की जन्मतिथि पांच दिसंबर, 1990 बताई गई है, जबकि चौथे बच्चे, शेख नौसेद की जन्मतिथि 1 जनवरी, 1991 बताई गई है।

अधिकारी ने अन्य विसंगति की ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए बताया कि उत्तर 24 परगना जिले के बारानगर क्षेत्र के एक मतदाता द्वारा सुनवाई के दौरान प्रस्तुत जन्म प्रमाणपत्र का मुद्दा उठाया गया जिसमें उनकी जन्म तिथि 6 मार्च, 1993 बताई गई थी, जबकि यह प्रमाण पत्र उससे दो दिन पहले, 4 मार्च, 1993 को जारी किया गया था।

पिछले साल दिसंबर में, आयोग ने शुरू में 2,200 से अधिक मतदान केंद्र क्षेत्रों को गहन जांच के दायरे में रखा था, क्योंकि इन बूथ से प्राप्त गणना प्रपत्रों में कोई मृत, दोहराव वाले या अज्ञात मतदाता नहीं पाए गए थे, जो एक सांख्यिकीय विसंगति थी।

भाषा धीरज वैभव

वैभव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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