(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) बीटिंग रिट्रीट समारोह बृहस्पतिवार को सैन्य वीरता, ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और ‘वंदे मातरम’ की शाश्वत भावना का जश्न संगीत के माध्यम से व्यक्त करने के साथ संपन्न हुआ। इसी के साथ इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह का औपचारिक पटाक्षेप हो गया।
विजय चौक पर आयोजित समारोह का मुख्य विषय ‘वंदे मातरम’ की 150 वर्षगांठ थी। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने की, जो बिगुल की ध्वनि के साथ एक पारंपरिक बग्गी में कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं।
भारतीय वायु सेना, नौसेना, सेना और अर्धसैनिक बलों के बैंड ने राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में ‘कदम कदम बढ़ाए जा’, ‘विजय भारत’, ‘बहादुर योद्धा’, ‘झेलम’, ‘जय हो’, ‘वीर सिपाही’ और ‘वंदे मातरम’ सहित कई मनमोहक धुनें बजाईं।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस)जनरल अनिल चौहान और तीनों सेनाओं के प्रमुखों सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
कार्यक्रम स्थल पर बड़ी स्क्रीन लगाई गई थी, जिन पर समारोह की वास्तविक समय में तस्वीरें प्रसारित की जा रही थीं। इन स्क्रीन पर ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष, गगनयान मिशन और ‘अमर जवान ज्योति’ के प्रतीकात्मक चित्र भी प्रदर्शित किए जा रहे थे।
कई बैंड के सदस्य मधुर धुनें बजाते हुए विभिन्न संरचनाओं में खड़े थे, जो देश की प्रमुख घटनाओं और उपलब्धियों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे, जैसे कि ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष, प्रतिष्ठित सैन्य स्थल, देश के सदा सतर्क सैनिक और पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत द्वारा इस्तेमाल किए गए कुछ शक्तिशाली हथियार।
इन आकृतियों में गगनयान (अंतरिक्ष उड़ान मिशन), ऑपरेशन सिंदूर, तीनों सेनाओं का लोगो और नवगठित भैरव बटालियन का प्रतीक चिह्न शामिल थे। भैरव बटालियन ने इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार भाग लिया।
इस दौरान पिछले साल आईसीसी वनडे विश्व कप में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की जीत का प्रतीकात्मक रूप से अभिनंदन भी किया गया।
भारत ने अपनी प्राचीन सैन्य नैतिकता को भी प्रमुखता से दर्शाया, जिसमें ‘अर्धचंद्र व्यूह’ (प्राचीन काल में प्रयुक्त अर्धचंद्राकार युद्ध संरचना) और ‘गरुड़ व्यूह’ (महाभारत में वर्णित एक संरचना) जैसी संरचनाओं में तालमेल बिठाते हुए टुकड़ियां शामिल थीं।
परंपरा से इतर इस साल विजय चौक पर बैठने के लिए तैयार दर्शक दीर्घाओं के नाम भारतीय संगीत वाद्ययंत्रों जैसे ‘बांसुरी’, ‘डमरू’, ‘एकतारा’, ‘एसराज’,‘मृदंगम’, ‘नगाड़ा’, ‘पखावज’, ‘संतूर’, ‘सारंगी’, ‘सरिंदा’, ‘सरोद’,‘शहनाई’, ‘सितार’, ‘सुरबहार’, ‘तबला’ और ‘वीणा’ के नाम पर रखा गया।
भाषा धीरज पवनेश
पवनेश
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