प्रयागराज (उप्र), 20 दिसंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश की राज्य विधिज्ञ परिषद (बार काउंसिल) ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय को सूचित किया है कि उसने सर्वसम्मति से उन अधिवक्ताओं के लाइसेंस को रद्द करने का निर्णय लिया है जिनके नाम पुलिस रिकॉर्ड में ‘हिस्ट्रीशीटर’ या ‘गैंगस्टर’ के तौर पर दर्ज हैं।
उच्च न्यायालय को यह भी बताया गया कि ‘हिस्ट्रीशीटर’ अधिवक्ताओं के संबंध में बार काउंसिल ने 98 अधिवक्ताओं का स्वतः संज्ञान लिया और अनुशासनात्मक समिति के समक्ष 23 अधिवक्ताओं के खिलाफ कार्यवाही लंबित है।
यह जानकारी अधिवक्ता मोहम्मद कफील की याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की पीठ को दी गई।
कफील पर गैंगस्टर कानून के तहत आरोप के साथ ही धोखाधड़ी, वसूली और आपराधिक षडयंत्र के भी आरोप हैं।
कफील ने इटावा के अपर सत्र न्यायाधीश के उस आदेश को अनुच्छेद 227 के तहत चुनौती दी है जिसके तहत एक पुलिस आरक्षी के खिलाफ उनकी शिकायत खारिज कर दी गई थी।
कफील ने 26 नवंबर, 2025 को रेलवे स्टेशन के पास आरक्षी पर मारपीट का आरोप लगाया । सरकारी वकील ने पीठ को अधिवक्ता के पिछले जीवन से अवगत कराया।
उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को अपने आदेश में बार काउंसिल में नामांकित अधिवक्ताओं के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों पर पूरे राज्य के आंकड़े मांगे।
उच्च न्यायालय ने बार काउंसिल को उन सभी अधिवक्ताओं के विवरण उपलब्ध कराने को कहा जिन्हें वकालत के प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं।
उच्च न्यायालय के एक पिछले आदेश पर बार काउंसिल ने बताया कि कार्यालय रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्तमान में कुल 5,14,439 अधिवक्ता बार काउंसिल में नामांकित हैं जिनमें से 2,49,809 अधिवक्ताओं को वकालत का प्रमाण पत्र (सीओपी) जारी किया गया है यानी ये वकालत करने और बार काउंसिल के आगामी चुनाव में मतदान करने के पात्र हैं।
भाषा सं राजेंद्र
राजकुमार
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