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Wednesday, 1 April, 2026
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न्याय व्यवस्था में बार व पीठ को अलग नहीं किया जा सकता: प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत

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तिरुपति, एक मार्च (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने रविवार को कहा कि बार न्याय व्यवस्था का अभिन्न अंग है और इसे अलग नहीं किया जा सकता हालांकि लोग सोचते हैं कि न्याय देना केवल न्यायालयों की जिम्मेदारी है, जो एक मिथक है।

सीजेआई सूर्यकांत ने यहां जिला न्यायालय परिसर की आधारशिला रखने के बाद कहा कि बार और पीठ एक-दूसरे के विरोधी नहीं बल्कि एक ही संस्था के दो पहलू हैं।

एक मजबूत बार सशक्त वकालत का आधार है। सशक्त वकालत न्यायाधीशों को अधिक गहन चिंतन, अधिक सावधानीपूर्वक दलील देने और अधिक स्पष्ट फैसले लेखन के लिए प्रेरित करती है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, “बार के मेरे प्रिय सदस्यों, आप न्यायिक व न्याय व्यवस्था का अभिन्न अंग हैं। आपको अलग नहीं किया जा सकता, जैसा कि कभी-कभी लोग सोचते हैं कि न्याय देना केवल न्यायाधीशों की जिम्मेदारी है। यह एक भ्रम है, यह सत्य नहीं हो सकता।”

उन्होंने कहा कि बार द्वारा दी जाने वाली सहायता की गुणवत्ता न्यायाधीश के समग्र कार्य में परिलक्षित होती है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि बार के सदस्य जितनी बेहतर दलीलें पेश करते हैं, फैसले की गुणवत्ता उतनी ही बेहतर होती है और जब फैसला तर्कसंगत होता है, तो कानून के शासन में जनता का विश्वास बढ़ता है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि वह इस बात के प्रबल समर्थक हैं कि न्यायालय परिसरों को अस्पतालों की तरह व्यवहार और कार्य करना चाहिए।

उन्होंने कहा, “जब ​​कोई मरीज आता है, तो सबसे पहले उसे प्राथमिक चिकित्सा सहायता प्रदान की जाती है ताकि उसे यह महसूस हो कि वह सुरक्षित हाथों में है, उसका जीवन खतरे में नहीं है।”

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “न्याय के लिए आने वाले व्यक्ति के साथ भी ऐसा ही होना चाहिए।

न्यायमूर्ति ने कहा कि एक बार जब न्याय की उम्मीद में व्यक्ति इस परिसर में प्रवेश करता है, तो उसे यह महसूस होना चाहिए कि वह न्याय प्राप्त करने के बाद ही इस परिसर से बाहर जाएगा।

उन्होंने कहा,“बार के मेरे प्रिय मित्रों, यह बार और न्यायपालिका दोनों की समान जिम्मेदारी है।”

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यह भी कहा कि वह देश के जिस भी हिस्से का दौरा करेंगे, सभी राज्य सरकारों से अपील करेंगे कि अगले 50 या 100 वर्षों के लिए उपयुक्त न्यायिक ढांचा उपलब्ध कराएं।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि हो सकता है कुछ समय बाद न्यायिक ढांचे के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध न हों क्योंकि भूमि कम होती जा रही है, देश विकास कर रहा है, जनसंख्या बढ़ रही है, औद्योगीकरण का विकास हो रहा है और शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है।

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश पी.एस. नरसिम्हा, न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा, न्यायाधीश एस.वी.एन. भट्टी और न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची तथा आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति धीरज सिंह ठाकुर भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।

भाषा जितेंद्र प्रशांत

प्रशांत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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