नई दिल्ली: बांग्लादेश के ढाका और अन्य हिस्सों में गुरुवार को हिंसा तब और भड़क गई, जब छात्र नेता और स्वतंत्र राजनेता शरिफ उस्मान हादी की मौत हो गई. एक हफ्ते पहले नकाबपोश हमलावरों ने उन पर गोली चलाई थी. बड़े मीडिया संस्थानों द डेली स्टार और प्रोथोम आलो के दफ्तरों में आग लगा दी गई. प्रदर्शनकारियों ने भारतीय राजनयिक मिशनों की ओर मार्च करने की कोशिश की और पहले सत्ता में रही पार्टी अवामी लीग से जुड़ी संपत्तियों पर भी हमला किया.
इसी बीच, बीबीसी बांग्ला की एक रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से कहा गया है कि गुरुवार रात मयमनसिंह के भालुका उपज़िला में ईशनिंदा के आरोपों पर हिंदू समुदाय के एक व्यक्ति को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला.
हादी ने गुरुवार को सिंगापुर के एक अस्पताल में दम तोड़ दिया. पिछले एक हफ्ते से यह हमला बांग्लादेश में एक बड़ा राजनीतिक और कूटनीतिक मुद्दा बना हुआ था. बिना किसी ठोस सबूत वाली रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि हमलावर भारत भाग गए हैं, जिसके बाद भारत-विरोधी बयानबाजी तेज़ हो गई.
राजशाही में प्रदर्शनकारियों ने एक भारतीय क्षेत्रीय राजनयिक के कार्यालय की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया. सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए, जिनमें भारतीय सहायक उच्चायोग के दफ्तर के पास पत्थरबाज़ी की घटनाएं दिखीं. उस दिन कार्यालय को अपना काम बंद करना पड़ा, साथ ही दो वीज़ा केंद्रों की सेवाएं भी रोक दी गईं.
शाहबाग में प्रदर्शनकारियों ने शाहबाग पुलिस स्टेशन के आसपास मार्च किया और नारे लगाए, जैसे “तुमी के, आमी के? हादी, हादी (तुम कौन हो? मैं कौन हूं? हादी, हादी),” “दिल्ली ना ढाका? ढाका, ढाका”, और “भारतीय दूतावास को घेरो”.
बुधवार को भी सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने ढाका में भारतीय राजनयिक परिसरों के बाहर जमा होने की कोशिश की थी, जिसमें भारत के उप उच्चायुक्त का निवास भी शामिल था. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा.
नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के सदस्य जो स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन (एसएडी) का एक बड़ा हिस्सा है और जिसने पिछले साल के आंदोलन का नेतृत्व किया था, भी प्रदर्शनों में शामिल हुए. उन्होंने भारत-विरोधी नारे लगाए और आरोप लगाया कि गोलीबारी के बाद हादी के हमलावर भारत भाग गए.
प्रदर्शनकारियों ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार से कहा कि जब तक संदिग्धों को वापस नहीं लाया जाता, तब तक भारतीय उच्चायोग को बंद कर दिया जाए. एनसीपी नेता सरजिस आलम के हवाले से कहा गया, “जब तक भारत हादी भाई के हत्यारों को सौंप नहीं देता, तब तक बांग्लादेश में भारतीय उच्चायोग बंद रहेगा. अब या कभी नहीं, हम जंग में हैं.”
धानमंडी-32 में शेख मुजीबुर रहमान बांग्लादेश के संस्थापक राष्ट्रपति और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के पिता के घर में तोड़फोड़ की गई और फिर से आग लगा दी गई. इस घर को पहले भी दो बार नष्ट किया जा चुका है. अवामी लीग के दफ्तर में भी आग लगा दी गई.
‘भारतीय प्रभुत्व के खिलाफ संघर्ष’
बांग्लादेश के अंतरिम नेता यूनुस ने हादी की मौत को “देश के लिए अपूरणीय क्षति” बताया और एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की. गुरुवार रात देश को संबोधित करते हुए यूनुस ने कहा कि सभी सरकारी, अर्ध-सरकारी और स्वायत्त संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी और निजी इमारतों के साथ-साथ विदेशों में बांग्लादेश के मिशनों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा. उन्होंने ढाका की मस्जिदों में विशेष दुआओं की भी घोषणा की.
हादी ‘इंकिलाब मंचो’ नाम के एक मंच के प्रवक्ता थे और जुलाई 2024 के प्रदर्शनों के पीछे प्रमुख सदस्यों में से एक थे. उन्हें 12 दिसंबर को गोली मारी गई थी, जो देश में चुनाव की तारीखों की घोषणा के एक दिन बाद हुआ था. उनके सिर में गोली फंसी हुई थी और हालत गंभीर थी, जिसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए सिंगापुर एयरलिफ्ट किया गया.
गुरुवार को बांग्ला में लिखी एक फेसबुक पोस्ट में इंकिलाब मंचो ने उनकी मौत की घोषणा की और इसे “भारतीय प्रभुत्व” के खिलाफ संघर्ष बताया. पोस्ट में लिखा था, “भारतीय प्रभुत्व के खिलाफ संघर्ष में अल्लाह ने महान क्रांतिकारी उस्मान हादी को शहीद के रूप में स्वीकार कर लिया है.”
इसके बाद, रात भर हिंसा जारी रहने के बाद, मंच के फेसबुक पेज पर सुबह करीब 4:30 बजे डाला गया एक और संदेश कहता है, “जिन लोगों ने उस्मान हादी को मारा, उन्हें देश सौंप मत दीजिए…तोड़फोड़ और आगजनी के ज़रिए वे असल में बांग्लादेश को एक बेकार, काम न करने वाला स्टेट बनाना चाहते हैं. वे इस देश की आज़ादी और संप्रभुता को खतरे में डालना चाहते हैं. आपको समझना होगा कि 32 और 36 एक ही चीज़ नहीं हैं.” यहां ‘32’ का मतलब धानमंडी-32, यानी मुजीबुर रहमान का निवास है, और ‘36’ का मतलब जुलाई विद्रोह (36 जुलाई) है.
हादी की मौत से पहले ही इस मंच ने शाहबाग में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन और धरने की धमकी दी थी. मंच ने कहा था कि अगर हादी “अपने सृष्टिकर्ता की पुकार का जवाब देते हैं और शहीदों की कतार में शामिल होते हैं”, तो “बांग्लादेश के पीड़ित और आज़ादी पसंद लोग” राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा के लिए शाहबाग में इकट्ठा हों. साथ ही यह भी जोड़ा था कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक देश को ठप कर दिया जाएगा.
मंच ने यह भी कहा था कि अगर हत्यारा भारत भाग जाता है, तो भारतीय सरकार से बातचीत करके किसी भी कीमत पर उसे गिरफ्तार कर वापस लाया जाना चाहिए.
एनसीपी के सदस्य नाहिद इस्लाम और हसनत अब्दुल्ला ने भी पिछले एक हफ्ते में इंकिलाब मंचो द्वारा आयोजित विरोध रैलियों में भारत के खिलाफ कई भड़काऊ बयान दिए. उन्होंने भारत की “सेवन सिस्टर्स” को “अलग-थलग करने” और पूर्वोत्तर से “चरमपंथियों” को पनाह देने की धमकी दी.
इस बीच, डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका की एक अदालत ने सिबियन डियू और संजय चिसिम को तीन-तीन दिन की रिमांड पर भेजने की मंजूरी दी है. आरोप है कि उन्होंने हादी पर हमले के मुख्य आरोपी फैसल करीम मसूद को भारत भागने में मदद की. दोनों को अदालत में पेश किए जाने के बाद, जांच अधिकारी फैसल अहमद ने सात दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन अदालत ने तीन दिन की ही मंजूरी दी.
रिमांड अर्जी में डिटेक्टिव ब्रांच के अधिकारी ने कहा कि गोपनीय सूत्रों से संकेत मिले हैं कि नामजद और अज्ञात आरोपी मयमनसिंह के हलुआघाट सीमा के रास्ते भारत भाग गया. उन्होंने यह भी बताया कि सिबियन डियू, अवामी लीग के पूर्व विधायक ज्वेल अरेंग के भतीजे हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, अब तक रैपिड एक्शन बटालियन, पुलिस और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश ने इस घटना से जुड़े 20 लोगों को हिरासत में लिया या गिरफ्तार किया है, जिनमें हमले और फरार होने में शामिल लोग भी शामिल हैं.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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