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Saturday, 21 March, 2026
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मोदी सरकार के आठ वर्षों में संसदीय लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास हुआ: माकपा

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नयी दिल्ली, दो जून (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने नरेंद्र मोदी सरकार के आठ साल पूरा होने के अवसर पर बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि इन आठ वर्षों में संसदीय लोकतंत्र को कमजोर करने का ‘व्यवस्थागत प्रयास’ हुआ है।

वामपंथी पार्टी के मुखपत्र ‘पीपुल्स डेमोक्रेसी’ के ताजा संस्करण में एक संपादकीय में कहा गया है कि आठ वर्षों की उपलब्धियों में भाजपा सरकार एक भी ऐसा कदम नहीं बता सकती जो लोकतंत्र को मजबूत करने वाला हो।

संपादकीय में कहा गया है, ‘‘संसद के महत्व को कम करना और संसदीय प्रक्रियाओं को कमतर करना मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में अपने सबसे खराब रूप में पहुंच गया। संसद की बैठकें पूरे साल में 50 दिनों से कम हुईं।’’

माकपा ने यह आरोप भी लगाया कि विधेयकों पर न सिर्फ चर्चा कम हुई, बल्कि विधेयकों की शायद ही कोई छानबीन हुई।

उसका कहना है कि संप्रग सरकार के समय 60 से 70 प्रतिशत विधेयक लोकसभा द्वारा स्थायी समितियों के पास भेजे जाते थे और मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में यह 27 प्रतिशत हुआ और अब 13 प्रतिशत रह गया है।

भाषा हक हक पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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