नयी दिल्ली, 20 दिसंबर (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी की एक अदालत ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर कुछ महीने पहले एक सार्वजनिक कार्यक्रम में हुए हमले के दो आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास का आरोप तय करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एकता गौबा मान, एस. राजेशभाई खिमजीभाई और तहसीन रजा रफीउल्ला शेख के खिलाफ चल रहे मामले की सुनवाई कर रही थीं, जो इस मामले में आरोपी हैं।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर 20 अगस्त को सिविल लाइंस इलाके में स्थित उनके कैंप कार्यालय में ‘जन सुनवाई’ कार्यक्रम के दौरान हमला हुआ था। उनके कार्यालय ने इस हमले को ‘उनकी हत्या की सुनियोजित साजिश’ का हिस्सा बताया था।
गुजरात के राजकोट निवासी खिमजीभाई (41) को गिरफ्तार कर हत्या के प्रयास समेत अन्य आरोपों में मामला दर्ज किया गया है।
शेख पर खिमजीभाई के साथ मिलकर मुख्यमंत्री पर हमले की साजिश रचने का आरोप है।
अपने आदेश में न्यायाधीश ने कहा, ‘‘प्रथम दृष्टया दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश), 221 (लोक सेवक के सार्वजनिक कर्तव्य निर्वहन में बाधा डालना), 132 (लोक सेवक द्वारा कर्तव्य निभाने के दौरान आपराधिक बल का प्रयोग) और 109(1) (हत्या का प्रयास) के तहत दंडनीय अपराध के मामले बनते हैं।’’
अभियोजन के अनुसार, दोनों आरोपियों ने गुजरात के राजकोट में एक साजिश रची थी और तहसीन ने पूरे हमले की साजिश रचने के लिए खिमजीभाई के खाते में 2,000 रुपये अंतरित किये थे।
अदालत ने यह भी कहा कि हमले से पहले दोनों आरोपी फोन पर संपर्क में थे और खिमजीभाई जन सुनवाई के वीडियो क्लिप तहसीन को भेज रहा था।
अदालत ने कहा, ‘‘प्रथम दृष्टया यह दर्शाता है कि दोनों आरोपियों ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर जानलेवा हमला करने की आपराधिक साजिश रची थी।’’
अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए 26 दिसंबर की तारीख तय की। अदालत ने कहा कि इस मामले में पीड़ित मुख्यमंत्री हैं, फिर भी आरोपी सुरक्षा घेरा भेदने में कामयाब रहे।
अदालत ने कहा, ‘‘प्रथम दृष्टया यह दर्शाता है कि आरोपी ने पीड़ित को जान से मारने की मंशा से सुनियोजित साजिश के तहत हमला किया था और आरोपी के आचरण से यह तथ्य और भी पुष्ट होता है।’’
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मान ने यह भी कहा कि खिमजीभाई ने घटनास्थल पर मौजूद एक अन्य व्यक्ति को भी चोट पहुंचाई, जिसने मुख्यमंत्री गुप्ता को बचाने का प्रयास किया था।
अदालत ने कहा, ‘‘इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि आरोपी ने अभियोजन पक्ष के गवाह धीरेन्द्र, जो एक सार्वजनिक क्षेत्र में सक्रिय व्यक्ति हैं और जिन्होंने पीड़ित की रक्षा करने का प्रयास किया था, को भी घूंसा मारा और उन्हें मामूली चोट पहुंचाई, इसलिए प्रथम दृष्टया बीएनएस की धारा 115(2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) के तहत मामला बनता है।’’
दिल्ली पुलिस ने 18 अक्टूबर को दोनों आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास, लोक सेवक पर हमला करने और उसके कर्तव्य निर्वाह में बाधा डालने तथा आपराधिक साजिश सहित विभिन्न अपराधों के तहत 400 पृष्ठों का आरोपपत्र दाखिल किया था।
भाषा संतोष सुभाष
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