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Saturday, 10 January, 2026
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हांसी पहुंचे CJI सूर्यकांत, बचपन की साइकिल सवारी और पहली फिल्म की यादें की ताज़ा

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत पदोन्नति के बाद पहली बार हरियाणा के अपने गृह नगर हांसी पहुंचे.

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गुरुग्राम: हरियाणा के अपने गृह जिले हांसी की पहली यात्रा पर पहुंचे भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत अपने बचपन और किशोरावस्था की यादों में खो गए.

हांसी बार एसोसिएशन के सदस्यों को संबोधित करते हुए सीजेआई ने पुरानी यादों को ताज़ा किया और बताया कि उन्होंने अपनी पहली फिल्म हांसी में ही देखी थी, जहां उनके पिता उस समय एक स्कूल शिक्षक के रूप में कार्यरत थे.

उन्होंने कहा, “मैंने अपनी ज़िंदगी की पहली फिल्म हांसी में ही देखी थी. चोरी-छिपे नहीं, बल्कि मेरे पिता मुझे अपनी साइकिल पर वहां ले गए थे. जब भी मैं हांसी से गुज़रता हूं, मेरे बचपन की यादें ताज़ा हो जाती हैं. मैं यहां नियमित रूप से पढ़ाई नहीं कर सका, लेकिन कुछ महीनों तक मैंने यहीं स्कूल में पढ़ाई की.”

अपने करियर की शुरुआती दिनों की बातें साझा करते हुए उन्होंने कहा, “1984 में पढ़ाई पूरी करने के बाद, अगले ही दिन परिवार ने मुझसे प्रैक्टिस शुरू करने को कहा. मैंने 21 अप्रैल 1984 से कोर्ट जाना शुरू कर दिया था, हालांकि, मुझे वकालत का लाइसेंस 29 जुलाई को मिला. मैं इस पेशे में बिल्कुल नया था और सिर्फ दो जोड़ी कपड़ों के साथ हिसार से चंडीगढ़ चला गया. मुझे सीनियर वकीलों का आशीर्वाद मिला. एक वकील मुझे अपनी कार से चंडीगढ़ ले गया. हाई कोर्ट में मैं एक वकील का जूनियर बना.”

हांसी जिला बार एसोसिएशन ने CJI सूर्यकांत का सम्मान किया | फोटो: सुशील मानव/दिप्रिंट
हांसी जिला बार एसोसिएशन ने CJI सूर्यकांत का सम्मान किया | फोटो: सुशील मानव/दिप्रिंट

उन्होंने वहां मौजूद युवा वकीलों से जीवन की चुनौतियों को स्वीकार करने और संघर्ष करना सीखने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि जिस पेशे को उन्होंने चुना है, उसमें जगह बनाने के लिए उन्हें या तो विशेषज्ञ बनना होगा या फिर हर क्षेत्र की समझ रखने वाला ऑलराउंडर.

उन्होंने कहा, “मेरी सलाह है कि उप-मंडल और जिला स्तर पर काम करने वाले वकीलों को आज के समय की आधुनिक चुनौतियों को स्वीकार करना चाहिए. आपको अपने काम को आधुनिक प्रैक्टिस के अनुसार बदलना होगा. मैं चाहता हूं कि आप भी बड़े शहरों के वकीलों की तरह आधुनिक चुनौतियों को अपनाएं. तकनीक के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ना ज़रूरी है. इसके लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित करें. आपको ऐसे वकील बनना होगा जो दिल्ली, मुंबई या अन्य जगहों से आने वाले वकीलों के सामने मजबूती से खड़े रह सकें.”

सीजेआई कांत शुक्रवार को हांसी और हिसार के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे. यह नवंबर में देश के शीर्ष न्यायिक पद संभालने के बाद उनके गृह जिले की पहली यात्रा है.

दौरे के पहले दिन उन्होंने नरनौंद और बरवाला में उप-मंडलीय न्यायिक परिसरों की आधारशिला रखी.

शनिवार को वह अपने पैतृक गांव पेटवाड़ जाएंगे, जहां ग्रामीण पारंपरिक तरीके से उनका सम्मान करेंगे. पेटवाड़ पहले हिसार का हिस्सा था, लेकिन दिसंबर 2025 में जब हांसी को राज्य का 23वां जिला घोषित किया गया, तब यह हांसी का हिस्सा बन गया.

वे हिसार में बार एसोसिएशन के लिए वकीलों के नए चैंबर और बहु-स्तरीय पार्किंग सुविधा का उद्घाटन भी करेंगे. इसके बाद शाम को वह राज्य सरकार द्वारा आयोजित एक राजकीय रात्रिभोज में शामिल होंगे. इस रात्रिभोज में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू और अन्य न्यायाधीश शामिल होंगे.

हरियाणा से शीर्ष पद पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति

नवंबर में न्यायमूर्ति सूर्यकांत के भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश बनने पर हरियाणा में व्यापक उत्साह देखा गया, क्योंकि वह राज्य से इस पद पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति हैं.

उनका कानूनी करियर 1984 में हिसार जिला अदालत से शुरू हुआ. इसके बाद अगले वर्ष वह चंडीगढ़ स्थित पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट चले गए. उन्होंने संवैधानिक, सेवा और दीवानी मामलों में विशेषज्ञता हासिल की और विश्वविद्यालयों, बोर्डों, निगमों और बैंकों का प्रतिनिधित्व किया.

38 साल की उम्र में, 7 जुलाई 2000 को वह हरियाणा के सबसे युवा महाधिवक्ता बने. मार्च 2001 में उन्हें सीनियर एडवोकेट नामित किया गया और 9 जनवरी 2004 को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने तक उन्होंने महाधिवक्ता के रूप में सेवाएं दीं.

न्यायमूर्ति कांत ने अक्टूबर 2018 से मई 2019 तक हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य किया, इसके बाद 24 मई 2019 को उन्हें सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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