नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने जगंलों को देश के सबसे अहम प्राकृतिक संसाधनों में से एक बताते हुए असम सरकार को गोलाघाट जिले के दोयांग आरक्षित वन क्षेत्र और उसके आसपास के गांवों में अतिक्रमणकारियों के बारे में फैसला लेने के लिए वन और राजस्व अधिकारियों की एक समिति गठित करने की मंगलवार को अनुमति दे दी।
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि समिति कथित अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी करेगी और उन्हें यह साबित करने के लिए सबूत पेश करने का मौका देगी कि उन्हें उस भूमि पर रहने का अधिकार है, जिस पर उन्होंने अतिक्रमण कर रखा है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि वन भूमि पर अतिक्रमण देश में पर्यावरण प्रशासन के सामने आने वाली सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक के रूप में उभरा है।
पीठ ने कहा, “अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तभी की जाएगी, जब आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध कब्जा पाया जाएगा।”
उसने कहा, “अगर नोटिस पाने वाला व्यक्ति अधिसूचित वन क्षेत्र के बाहर, राजस्व सीमा के भीतर पाया जाता है, तो उसका विवरण राजस्व विभाग को भेजा जाएगा। ऐसे मामलों में, राजस्व विभाग आगे की कार्रवाई तय करेगा।”
पीठ ने कहा कि अगर किसी आरक्षित वन क्षेत्र में अनाधिकृत कब्जा पाया जाता है, तो एक स्पष्ट आदेश पारित किया जाएगा और संबंधित व्यक्ति को 15 दिनों का नोटिस जारी कर अनाधिकृत कब्जा खाली करने के लिए कहा जाएगा।
उसने कहा कि नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद ही अतिक्रमण को हटाने के लिए कार्रवाई की जाएगी।
शीर्ष अदालत ने संबंधित पक्षों को निर्देश दिया कि जब तक कोई स्पष्ट आदेश पारित नहीं हो जाता और 15 दिनों की नोटिस अवधि समाप्त नहीं हो जाती, तब तक अतिक्रमण वाली भूमि के सिलसिले में यथास्थिति बनाए रखी जाए।
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