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Wednesday, 28 January, 2026
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कृत्रिम मेधा क्रांतिकारी तकनीक है, भारत को इसके लिए तैयार रहना होगा: प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार

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(सागर कुलकर्णी)

नयी दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा) भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने कहा कि कृत्रिम मेधा (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-एआई) एक क्रांतिकारी तकनीक है, जो दोहराव वाले (रिपिटेटिव) कामों की जगह लेगी लेकिन नए अवसर भी पैदा करेगी।

उन्होंने कहा कि भारत को इस बदलाव के लिए तैयार रहना होगा।

‘एआई इम्पैक्ट समिट’ से पहले सूद ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि सरकार उभरते प्रौद्योगिकी के इस क्षेत्र में युवाओं को प्रशिक्षित करने के प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि टियर-दो और टियर-तीन शहरों में अधिक एआई और ‘डेटा लैब’ स्थापित की जा रही हैं, ताकि युवाओं को ‘टूल्स’, ‘डेटा सेट’ और समस्या-समाधान के वातावरण का व्यावहारिक अनुभव मिल सके।

शीर्ष वैज्ञानिक ने 1990 के दशक में देश में कंप्यूटर की शुरुआत का उदाहरण देते हुए कहा, “यह एक नयी क्रांतिकारी तकनीक है। जब भी कोई नई तकनीक आती है, तो नौकरियों का समायोजन होता है, लेकिन साथ ही नए रोजगार के अवसर भी खुलते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे भविष्य उज्ज्वल दिख रहा है, लेकिन लोगों को इस बदलाव के लिए तैयार रहना होगा। 1990 के दशक में हमने कभी नहीं सोचा था कि बुकिंग जैसे काम कंप्यूटर के माध्यम से होंगे। हमें लगा कि रजिस्टर पर काम करने से जुड़ी सभी नौकरियां खत्म हो जाएंगी। लेकिन लोगों को तुरंत प्रशिक्षित किया गया, उन्हें नए कौशल सिखाए गए और यह काम बहुत अच्छे से हुआ। इसलिए यह उन्हीं खास पलों में से एक है।”

सूद ने कहा कि एआई से कृषि, वित्त और अन्य विविध क्षेत्रों में नए रोजगारों का सृजन होगा।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सरकार का ध्यान एआई तकनीकों के प्रभाव को देश के कोने-कोने तक फैलाने पर है।

सूद ने कहा, “एआई इम्पैक्ट समिट से भारत की प्राथमिक अपेक्षा यह है कि साझा प्राथमिकताओं और एक समान दृष्टिकोण के आधार पर एआई की भविष्य की दिशा पर वैश्विक सहमति बने। जैसा कि ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ नाम से स्पष्ट है हम यह देखना चाहते हैं कि एआई के प्रभाव को आम लोग, प्रमुख हितधारक और संगठन कैसे महसूस करते हैं।”

सूद ने यह भी कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि एआई के लाभ असमान रूप से केंद्रित न हों, बल्कि सभी लोगों को उपलब्ध हों।

उन्होंने कहा, “इसलिए सुरक्षित उपयोग और इससे जुड़े जोखिमों को ध्यान में रखते हुए, प्रभाव बढ़ाना इसका प्रमुख लक्ष्य है।”

सूद ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों द्वारा अपने उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एआई के उपयोग पर भी जोर दिया।

उन्होंने कहा, “यह वह क्षेत्र है जिसे हमें तेजी से बढ़ाना होगा। सच कहें तो, इसका व्यापक उपयोग होना चाहिए। अभी इसे पर्याप्त रूप से प्रसारित नहीं किया गया है।”

उन्होंने बताया कि भारत ने 2024 में अपना एआई मिशन शुरू किया, जिसमें सात प्रमुख स्तंभ हैं- कंप्यूटिंग सुविधाओं का विकास, एआई एप्लिकेशन का निर्माण, डेटासेट का निर्माण, आधारभूत मॉडल बनाना, स्टार्टअप को वित्तीय मदद देना, कौशल विकास के प्रयास और सुरक्षित एवं भरोसेमंद एआई के माध्यम से जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना।

सूद ने कहा कि भारत के एआई मिशन के कौशल विकास पहल का उद्देश्य 500 से अधिक पीएचडी छात्रों, 5,000 स्नातकोत्तर छात्रों और 8,000 स्नातक छात्रों को चरणबद्ध तरीके से सहायता प्रदान करना है।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा सरकार स्टार्टअप्स को इसमें शामिल होने और पेरिस स्थित सबसे बड़े स्टार्टअप कैंपस ‘स्टेशन एफ’ के साथ अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

भाषा खारी संतोष

संतोष

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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