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Thursday, 26 March, 2026
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने स्टांप भंडार का डिजिटलीकरण शुरू किया

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नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने अपने समृद्ध स्टांप भंडारण का डिजिटलीकरण शुरू कर दिया है, जिन्हें इसकी मैसूर स्थित पुरालेख (एपिग्राफी) शाखा में रखा गया है।

एएसआई के इस कदम से दुर्लभ सामग्रियों तक इतिहासकारों और शोधकर्ताओं की पहुंच बढ़ जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को मैसूर में पुरालेख विभाग कार्यालय में एएसआई महानिदेशक वी विद्यावती ने डिजिटलीकरण प्रक्रिया का औपचारिक उद्घाटन किया।

एएसआई ने एक बयान में कहा, ‘‘डिजिटल डेटा को ‘कॉम्पैक्ट माइक्रोफिल्म’ में भी परिवर्तित किया जाएगा और आर्कटिक वर्ल्ड आर्काइव (एडब्ल्यूए) में अनंत काल के लिए दुनिया की मानवता की स्मृति के रूप में रखा जाएगा।’’

इसमें कहा गया है कि एएसआई का एपिग्राफी विभाग वर्ष 1887 से भारत के सभी कोनों से जुटाए गए स्टांप (अभिलेखों की कागजी प्रतियां) का भंडार रहा है। अधिकारियों ने कहा कि इन अभिलेखों की व्याख्या प्रशिक्षित पुरालेखविदों द्वारा की जाती है और ग्रंथों के प्रतिलेख तैयार किए जाते हैं।

बयान में कहा गया है कि विभिन्न भारतीय भाषाओं, यथा- तमिल, संस्कृत, पाली, प्राकृत, तेलुगु, बंगाली, कन्नड़, अरबी, फारसी, आदि में लगभग एक लाख इस तरह के स्टांप और संबंधित सामग्री उपलब्ध हैं।

एएसआई ने कहा कि हालांकि इस तरह से कॉपी किए गए सभी अभिलेखों को उनकी खोज के वर्ष के आधार पर ‘एनुअल रिपोर्ट ऑन इंडियन एपिग्राफी’ (एआरआईई) में प्रकाशित किया गया है, लेकिन उनकी डिजिटल प्रतियां इतिहासकारों और शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध नहीं थीं।

आसान खोज क्षमता के लिए एआरआईई डाटा मेटा-डेटा के रूप में काम करेगा। व्यापक प्रसार के लिए डेटाबेस को सार्वजनिक वेबसाइट पर डाला जाएगा।

भाषा संतोष सुरेश

सुरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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