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Thursday, 3 April, 2025
होमदेशयशवंत वर्मा विवाद के बीच, सुप्रीम कोर्ट के जजों ने अपनी संपत्ति पब्लिक करने का फैसला किया

यशवंत वर्मा विवाद के बीच, सुप्रीम कोर्ट के जजों ने अपनी संपत्ति पब्लिक करने का फैसला किया

वर्तमान प्रथा से हटकर एक कदम उठाया जाएगा जिसके तहत न्यायाधीश भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष अपनी संपत्ति का खुलासा करते हैं तथा स्वेच्छा से उसे सार्वजनिक करने के लिए भी राजी हो सकते हैं.

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के जजों ने एक अहम कदम उठाते हुए अपनी संपत्ति का ब्यौरा सुप्रम कोर्ट के आधिकारिक पोर्टल पर सार्वजनिक करने का संकल्प लिया है, दिप्रिंट को यह जानकारी मिली है.

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के सूत्रों ने बताया कि अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक करने के संकल्प को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के सभी 33 जजों ने स्वीकार कर लिया. यह कदम मौजूदा प्रथा से अलग है जिसके तहत न्यायाधीश भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक करते हैं और जब तक कोई विशिष्ट न्यायाधीश स्वैच्छिक आधार पर ऐसा करने की इच्छा न जताए, तब तक उन्हें सार्वजनिक करना आवश्यक नहीं है.

नए संकल्प के लागू होने के साथ, संपत्ति की सार्वजनिक घोषणा अब विवेकाधीन अभ्यास नहीं रह जाएगी और यह भविष्य के न्यायाधीशों पर भी लागू होगी.

सूत्रों ने बताया कि जजों ने यह निर्णय तत्कालीन दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास पर नकदी की कथित खोज के बाद उठे विवाद के मद्देनजर लिया, जिन्हें बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया. जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भारत के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ प्रारंभिक जांच से संबंधित सभी दस्तावेज सार्वजनिक कर दिए थे.

इस घटना ने उच्च न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति प्रणाली पर बहस छेड़ दी है और न्यायपालिका के कामकाज की अस्पष्टता पर व्यापक चिंता जताई है.

सूत्रों ने कहा कि संपत्तियों को प्रकाशित करने के तौर-तरीके अभी तय नहीं किए गए हैं. इस प्रस्ताव से हाई कोर्ट्स को भी सुप्रीम कोर्ट के नक्शेकदम पर चलने के लिए प्रेरित किया जा सकता है.

जजों की संपत्ति की सार्वजनिक घोषणा पर पहली बार 1997 में भारत के तत्कालीन चीफ जस्टिस जे.एस. वर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में चर्चा हुई थी. तब सभी मौजूदा जजों द्वारा पारित प्रस्ताव में कहा गया था: “प्रत्येक न्यायाधीश को अपने नाम पर, अपने जीवनसाथी या उन पर निर्भर किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर अचल संपत्ति या निवेश के रूप में सभी संपत्तियों की घोषणा चीफ जस्टिस के समक्ष करनी चाहिए.”

इसमें सार्वजनिक प्रकटीकरण शामिल नहीं था. बाद में, 8 सितंबर 2009 को पूर्ण न्यायालय ने न्यायालय की वेबसाइट पर न्यायाधीशों की संपत्ति घोषित करने के लिए एक नया प्रस्ताव पारित किया. लेकिन इसमें एक चेतावनी भी जोड़ी गई, जो यह थी कि यह “पूरी तरह से स्वैच्छिक आधार पर” किया जाएगा.

वेबसाइट पर संपत्ति घोषित करने की प्रथा का पालन कुछ उच्च न्यायालयों ने भी किया. हालांकि, 2018 के बाद से संपत्ति की स्वैच्छिक घोषणा बंद हो गई. समय के साथ, पूर्व न्यायाधीशों द्वारा की गई घोषणाओं को भी वेबसाइट से हटा दिया गया। वर्तमान में, वेबसाइट पर न्यायाधीशों की संपत्ति से संबंधित अनुभाग में 28 न्यायाधीशों की सूची पोस्ट की गई है. इसमें कहा गया है कि इन जजों ने अपनी संपत्ति CJI को घोषित की है.

2019 में, सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया कि जजों की व्यक्तिगत संपत्ति और देनदारियां “व्यक्तिगत जानकारी” नहीं हैं. यह फैसला सूचना के अधिकार (RTI) कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल द्वारा दायर एक दशक पुराने मामले पर आया, जिसमें उन्होंने जानना चाहा था कि क्या SC के जजों ने 1997 के प्रस्ताव के अनुसार CJI को अपनी संपत्ति घोषित की है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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