लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप Puch AI के साथ 25,000 करोड़ रुपये का MoU रद्द कर दिया है. यह स्टार्टअप पिछले साल ही शुरू हुआ था. सोशल मीडिया पर विरोध और विपक्ष के सवालों के बीच कंपनी की इतनी बड़ी डील संभालने की क्षमता पर सवाल उठे थे.
मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, योगी आदित्यनाथ ने Invest UP अधिकारियों को भविष्य में बड़े MoU करने से पहले स्टार्टअप की साख की सख्ती से जांच करने का निर्देश दिया है.
उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को सोशल मीडिया पर नज़र रखने के लिए भी कहा, ताकि ऐसे विवाद दोबारा न हों. सूत्रों ने कहा कि मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि अगर आगे “ऐसी गलती” हुई तो अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी.
राज्य के निवेश विभाग के अनुसार, 23 मार्च को साइन किए गए MoU की सामान्य सरकारी प्रक्रिया के अनुसार समीक्षा की गई. इस दौरान निवेशक से जरूरी जानकारी मांगी गई, लेकिन कंपनी तय समय में जानकारी नहीं दे सकी.
As per standard protocols laid by State Government, the MoU signed with Puch AI on 23 Mar 2026 was reviewed.
Necessary details as per SOP were sought from the investor, but they failed to provide them timely. Due diligence showed lack of net worth and credible financial…
— INVEST UP (@_InvestUP) March 26, 2026
अधिकारियों ने कहा कि जांच में पाया गया कि प्रस्तावित प्रोजेक्ट के हिसाब से कंपनी की नेट वर्थ और भरोसेमंद वित्तीय लिंक पर्याप्त नहीं थे.
UP Invest ने एक्स पर पोस्ट में कहा, “पारदर्शिता और शासन में उच्च स्तर की ईमानदारी के हित में MoU रद्द किया गया है, जो उत्तर प्रदेश सरकार के मूल सिद्धांतों में शामिल है.”
योगी का ट्वीट और विवाद
यह विवाद सोमवार को शुरू हुआ, जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर घोषणा की कि राज्य सरकार ने Puch AI के साथ 25,000 करोड़ रुपये का MoU साइन किया है.
अपने पोस्ट में उन्होंने उत्तर प्रदेश को एआई बेस्ड हब बनाने की योजना बताई, जिसमें एआई पार्क, बड़े डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर, नागरिकों के लिए “एआई कॉमन्स” प्लेटफॉर्म और एक समर्पित एआई यूनिवर्सिटी बनाने का प्रस्ताव शामिल था.
New Uttar Pradesh is embracing the power of Artificial Intelligence.
A ₹25,000 Crore MoU with Puch AI will bring AI Parks, large-scale data center infrastructure, AI Commons, and an AI University to the state.
This initiative will strengthen governance, drive innovation, and…
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) March 23, 2026
हालांकि, घोषणा के कुछ घंटों के भीतर पोस्ट पर एक कम्युनिटी नोट जोड़ दिया गया, जिसमें कहा गया कि स्टार्टअप एक साल से भी कम पुराना है और उसकी सालाना आय 50 लाख रुपये से कम है. इससे इतने बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने की उसकी क्षमता पर सवाल उठे.
यह मामला तेज़ी से चर्चा में आ गया और सोशल मीडिया यूजर्स व विपक्ष के नेताओं ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाए. यह भी सामने आया कि जून 2025 में शुरू हुई कंपनी का इस स्तर के प्रोजेक्ट को सपोर्ट करने वाला कोई सार्वजनिक वित्तीय रिकॉर्ड नहीं है.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेताओं ने भी इस पर सवाल उठाए.
MoU करने से पहले से AI से ही ‘पूछ’ के बारे में पूछ लिया होता।
अपने आस-पास के ऐसे ‘फ़ाइव परसेंटिया’ घूसखोर व ख़ुदगर्ज़ लोगों से बचना चाहिए जो आपकी अनभिज्ञता या अज्ञान का दुरुपयोग करते हैं। इससे आपकी AI (Artificial Image) मतलब ले-दे के बनाई गई ‘कृत्रिम छवि’ पर भी बहुत ख़राब…
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) March 25, 2026
24 घंटे के भीतर योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर साफ किया कि Puch AI के साथ MoU बाध्यकारी नहीं है और यह केवल शुरुआती व्यवस्था है. आगे की कोई भी प्रक्रिया, जैसे अनुमति या लाइसेंस, निवेशक के प्रस्ताव की पूरी जांच पर निर्भर करेगी.
दूसरी ओर, Puch AI के को-फाउंडर सिद्धार्थ भाटिया ने भी एक्स पर सफाई दी. उन्होंने कहा कि यूपी सरकार के साथ साइन किया गया MoU पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के रूप में बनाया गया है.
उन्होंने कहा कि इसमें उत्तर प्रदेश के टैक्स देने वालों पर कोई खर्च नहीं है. इसके उलट, इससे राज्य में निवेश आएगा.
भाटिया ने एक्स पोस्ट में कहा, “यह प्रोजेक्ट चरणों में पूरा किया जाएगा, जिसमें बाहरी निवेश पार्टनर का सहयोग होगा. हमने सरकार से कोई पैसा, कोई जीपीयू या किसी तरह का अन्य सहयोग नहीं लिया है. इस MoU का नागरिकों से जुड़ा हिस्सा सिर्फ इतना है कि उन्हें एआई कॉमन्स के जरिए अपनी भाषा में और आसान इंटरफेस के साथ मुफ्त एआई सुविधा मिलेगी.”
Clarifying a few things, starting with the MoU.
Are you taking taxpayer money?
No. The MoU signed with the UP Government is structured as a public-private partnership. It does not involve any cost to the taxpayers of Uttar Pradesh. On the contrary, it brings investment into the…— Siddharth Bhatia (@siddharthb_) March 24, 2026
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
