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Thursday, 29 January, 2026
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हंगामे के बीच सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए इक्विटी नियमों पर लगाई रोक, 2012 के नियम रहेंगे लागू

दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस, लखनऊ विश्वविद्यालय सहित कई स्थानों पर छात्रों ने इन नियमों के खिलाफ प्रदर्शन किए. वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आश्वासन दिया कि कानून का दुरुपयोग नहीं होगा और इसके क्रियान्वयन में किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा.

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नई दिल्ली: देशभर में विरोध और छात्र आंदोलनों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता संवर्धन) नियम, 2026 पर रोक लगा दी. अदालत ने कहा कि फिलहाल वर्ष 2012 के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियम ही लागू रहेंगे.

23 जनवरी को अधिसूचित नए नियमों को कई याचिकाकर्ताओं ने मनमाना, बहिष्करणकारी, भेदभावपूर्ण और संविधान तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 के खिलाफ बताते हुए चुनौती दी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने नियम 3(सी), जिसमें जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा दी गई है, को “अस्पष्ट” बताया और कहा कि इसका दुरुपयोग हो सकता है.

अदालत के अनुसार, इसकी भाषा में पुनः संशोधन की आवश्यकता है.

नए नियमों का उद्देश्य कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव को रोकना था. इसके तहत विशेष समितियां, सहायता हेल्पलाइन और समता अवसर केंद्र बनाने का प्रावधान किया गया था, खासकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों की शिकायतों के लिए.

हालांकि, सामान्य वर्ग के छात्रों ने इन नियमों का विरोध करते हुए कहा कि इससे उनके साथ भेदभाव की आशंका पैदा होती है.

दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस, लखनऊ विश्वविद्यालय सहित कई स्थानों पर छात्रों ने इन नियमों के खिलाफ प्रदर्शन किए. वहीं, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आश्वासन दिया कि कानून का दुरुपयोग नहीं होगा और इसके क्रियान्वयन में किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा.

याचिकाकर्ताओं के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने नए नियमों को फिलहाल स्थगित रखा है और मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी. अधिवक्ता विनीत जिंदल ने कहा कि अदालत ने माना है कि नए नियमों में खामियां हैं और उन पर दोबारा विचार और समीक्षा की जरूरत है.

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