नई दिल्ली: जैसे-जैसे ईद नज़दीक आ रही है, उत्तम नगर की जेजे कॉलोनी में डर और चिंता का माहौल गहरा रहा है. धमकियां खुलकर दी जा रही हैं. हिंदुत्व संगठनों ने ईद के दिन “खून की होली” खेलने की बात कही है—यह 26 साल के तरुण कुमार बुतोलिया की हत्या का बदला बताकर कहा गया है.
4 मार्च को होली के दौरान इलाके में एक हिंदू और एक मुस्लिम परिवार के बीच विवाद बढ़ गया था. इसके बाद तरुण पर क्रिकेट बैट, लोहे की रॉड और पत्थरों से हमला किया गया.
दो हफ्ते बाद, जब हिंसा की धमकियां गलियों में घूम रही हैं, तब जेजे कॉलोनी असामान्य रूप से शांत है. यहां लोग बहुत धीमी आवाज़ में बात कर रहे हैं. कई निवासी एक-दूसरे के पास बैठकर सोशल मीडिया पर रील्स देख रहे हैं. आसपास खुली नालियों की बदबू है और मीट की दुकानें बंद हैं. तंग गलियां टूटी हुई हैं और ऊपर बिजली की तारें उलझी हुई लटक रही हैं.
जेजे कॉलोनी के कई मुस्लिम निवासी रमज़ान के बीच ही अपनी दुकानें और घर छोड़कर चले गए हैं. जो परिवार अभी भी रुके हुए हैं, वे उम्मीद कर रहे हैं कि ईद बंद दरवाजों के पीछे और दिल्ली पुलिस की निगरानी में मना पाएंगे. पश्चिमी दिल्ली की यह घनी आबादी वाली कॉलोनी अब किसी प्रतिबंधित इलाके जैसी दिख रही है. हर कोने पर बैरिकेड हैं, दंगा नियंत्रण वाहन तैयार खड़े हैं; यहां तक कि कैमरे ले जाने की भी अनुमति नहीं है. तय जगहों पर पांच से छह पुलिसकर्मी तैनात हैं.
शांति बनाए रखने के लिए जेजे कॉलोनी में 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं.

डीसीपी (द्वारका) कुशल पाल सिंह ने भरोसा दिलाया, “इलाके के सभी प्वाइंट पर पुलिस तैनात की गई है. किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी. ईद शांति से होगी.”
दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को पुलिस को जरूरी कदम उठाने का आदेश दिया, ताकि ईद के दौरान कोई भी अप्रिय घटना न हो.

इससे एक दिन पहले सिविल राइट्स एडवोकेसी ग्रुप एसोसिएशन ऑफ प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स ने दिल्ली पुलिस को एक जरूरी शिकायत दी थी और हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. इसमें ईद के दिन “तुरंत साम्प्रदायिक हिंसा” की आशंका जताई गई थी.
इसमें सोशल मीडिया की कई पोस्ट का ज़िक्र किया गया, जिनमें जेजे कॉलोनी में खुलकर “खून की होली” की बात कही गई थी. याचिका में एपीसीआर के राष्ट्रीय सचिव मोहम्मद वासिक नदीम खान ने कहा, “जेजे कॉलोनी की ईदगाह में हर साल आसपास के इलाकों से हज़ारों लोग ईद की नमाज पढ़ने आते हैं. अब स्थानीय लोग अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, खासकर इस बात को लेकर कि वे नमाज और त्योहार शांतिपूर्वक मना पाएंगे या नहीं.”

15 मार्च को हिंदुत्व संगठनों ने ‘सर्व हिंदू समाज’ के बैनर तले तरुण की हत्या की सीबीआई जांच की मांग को लेकर एक विरोध मार्च निकाला था. विरोध के वीडियो में कुछ लोग सीधे धमकी देते दिख रहे हैं—वे “बदला” और “खून की होली” की बात कर रहे हैं. उनकी भाषा बहुत कड़ी, अपमानजनक और खास तौर पर मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने वाली है.
हालांकि, बजरंग दल के दिल्ली राज्य समन्वयक जगजीत सिंह “गोल्डी” ने दिप्रिंट से कहा कि संगठन ने उत्तम नगर में “खून की होली” का कोई आह्वान नहीं किया है और उनका कहना है कि “ईद के दिन वहां कोई विरोध प्रदर्शन नहीं होगा.”
उन्होंने यह भी कहा, “हमारा काम तरुण को न्याय दिलाना है और हम यह लड़ाई कानूनी तरीके से लड़ेंगे, इलाके की शांति बिगाड़कर नहीं.”
लेकिन इन भरोसों और भारी पुलिस तैनाती के बावजूद, तनाव अब भी बना हुआ है.
होली की झड़प, ‘आक्रोश सभाएं’ और बुलडोजर कार्रवाई
पांच दशकों तक जेजे कॉलोनी के परिवार एक साथ रहे. इन घरों ने त्योहार साथ मनाए और यहां तक कि वैश्विक महामारी का दौर भी मिलकर झेला.
लेकिन इस होली जो हुआ, उसके लिए कोई तैयार नहीं था.
यहां वेल्डिंग की दुकान चलाने वाले गुलफाम सैफी ने कहा, “होली वाले दिन की घटना उत्तम नगर पर एक दाग थी, लेकिन इस मोहल्ले की जड़ें सोशल मीडिया पर वायरल हुई 30 सेकंड की क्लिप से कहीं पुरानी हैं.”
जैसा कि दिप्रिंट ने पहले रिपोर्ट की थी कि 4 मार्च को जेजे कॉलोनी में एक 11 साल की लड़की अपनी छत पर पानी के गुब्बारों से खेल रही थी, तभी गलती से उसका एक गुब्बारा नीचे खड़ी उसकी पड़ोसी, एक मुस्लिम महिला, पर गिर गया. इससे दोनों परिवारों के बीच बहस हुई और बात बढ़कर झड़प तक पहुंच गई, जिसमें दोनों तरफ चोटें आईं. मामला दर्ज किया गया और चार लोगों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन शाम तक हालात और बिगड़ गए, जब जेजे कॉलोनी के निवासी तरुण पर हमला हुआ. उनके चाचा टेक चंद ने दिप्रिंट से कहा, “तरुण अपने दोस्तों के साथ होली मनाने गया था. जब वह घर लौट रहा था, तब करीब आठ से दस लोगों ने उस पर क्रिकेट बैट, लोहे की रॉड और पत्थरों से हमला किया…”
टेक चंद ने कहा, “तरुण ने कुछ नहीं किया था…इन लड़कों को वह कभी पसंद नहीं था और इसी वजह से उन्होंने उसे मार डाला.”
पुलिस की ओर से दर्ज दो एफआईआर के संबंध में 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और दो नाबालिगों को पकड़ा गया है. पहली एफआईआर दोनों परिवारों के बीच हुई झड़प को लेकर थी और दूसरी तरुण पर हमले को लेकर.
तरुण की हत्या के बाद हालात तेज़ी से बिगड़े. पूरे मोहल्ले में झड़पें हुईं, हिंदुत्व संगठनों ने “आक्रोश सभाएं” आयोजित कीं और आरोपियों के घरों के कुछ हिस्सों को गिराने के लिए बुलडोजर भी पहुंचे.

जब दिप्रिंट वहां पहुंचा, तो इनमें से कई घर खाली और आंशिक रूप से टूटे हुए दिखे. लाइटें अब भी जल रही थीं, वाटर कूलर भरा हुआ था और बिस्तर पर कंबल भी वैसे ही पड़ा था, लेकिन अंदर कोई रहने वाला नहीं था.

सैफी के लिए, होली की झड़प एक “घरेलू झगड़ा” था, जो राजनीतिक मुद्दा बन गया. उन्होंने कहा, “बजरंग दल ने इस मामले को राजनीतिक बना दिया. हम सब यहां शांति से रहते आए हैं. यही हमारा घर है. हम ईद मनाएंगे. हम कहीं नहीं जाएंगे.”
आटा चक्की की दुकान चलाने वाले राजीव भी इससे सहमत हैं, “सोशल मीडिया ने इस मुद्दे को और बढ़ा दिया.”
अपने फोन की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “लड़ाई यहां बढ़ी. भाषण और वीडियो वायरल हो गए. विरोध यहां के लोगों ने शुरू नहीं किया, बाहर से लोग आए थे.”
‘हमारी ज़िंदगी जहन्नुम बन गई है’
तंग गलियों में और तरुण कुमार के घर के बाहर माहौल भारी है. अगरबत्ती की खुशबू और खाकी वर्दी की मौजूदगी साफ महसूस होती है. एक दर्जन से ज्यादा पुलिस अधिकारी परिवार के आसपास खड़े हैं, जबकि परिवार के लोग हाथ जोड़कर बैठे हैं और खाली निगाहों से सामने देख रहे हैं.
तरुण के पिता मेमराज जिनके सिर और बाएं हाथ पर पट्टियां बंधी हैं, ने कहा, “हमारी ज़िंदगी जहन्नुम बन गई है. हमारा बेटा चला गया और हमारी दुनिया खत्म हो गई.”

परिवार की एक ही मांग है: तरुण पर हमला करने वालों को “फांसी” या “एनकाउंटर” की सजा मिलनी चाहिए. मेमराज ने कहा, “अपराधियों में डर होना चाहिए.”
वह इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने से बचते हैं. “हमने कभी इस मुद्दे को हिंदू और मुस्लिम का मामला नहीं बनाया. अपराध को अपराध की तरह देखा जाना चाहिए.”
मेमराज ने साफ शब्दों में कहा, “हम सिर्फ न्याय चाहते थे. हम इसे हिंदू बनाम मुस्लिम की लड़ाई नहीं बना रहे. हम शांति चाहते हैं.”
जब वह मामले पर बात कर ही रहे होते हैं, तभी सोनीपत के एक समूह से जुड़े एक स्थानीय पुजारी, जो खुद को हिंदुओं के लिए लड़ने वाला बताते हैं, बीच में बोल पड़ते हैं. “मुसलमान हिंदुओं को मिटा रहे हैं. हमें अपने भाई तरुण के लिए न्याय की लड़ाई लड़नी होगी.” जैसे ही वह अपना वीडियो रिकॉर्ड करना शुरू करते हैं, पुलिस बीच में आ जाती है. एक अधिकारी पुजारी को चेतावनी देता है, “आप रिकॉर्डिंग नहीं कर सकते. नहीं तो हम आपको यहां से जाने के लिए कहेंगे.”
दिल्ली पुलिस का कहना है कि वह शांति बनाए रखने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों स्तर पर कदम उठा रही है. डीसीपी सिंह ने दिप्रिंट को बताया कि साइबर पुलिस स्टेशन ऑनलाइन फैल रहे कंटेंट पर नज़र रखे हुए है. उन्होंने कहा, “हमने एक्स और इंस्टाग्राम के कुछ अकाउंट्स की वॉच लिस्ट बनाई हुई है.” अब तक 37 अकाउंट्स के खिलाफ कंटेंट हटाने की मांग भेजी जा चुकी है. एआई से बने वीडियो भी हटाए गए हैं.

हालांकि, तरुण की हत्या के बाद उत्तम नगर में बहुत कम राजनीतिक नेता दिखाई दिए, लेकिन बीजेपी सांसद कमलजीत सहरावत घटना के कुछ दिन बाद परिवार को समर्थन देने वहां पहुंचीं. बाकी नेताओं ने सोशल मीडिया पर हालात को लेकर चिंता जताई.
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने X पर लिखा, “उत्तम नगर में @DelhiPolice की नाक के नीचे नफरत फैलाने वाला अभियान चल रहा है, फिर भी इसे रोकने के लिए कोई साफ कार्रवाई नजर नहीं आ रही.”
गुरुवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी इस मामले पर बात की. उन्होंने कहा, “उत्तम नगर के लोगों ने हिंसा की बहुत भारी कीमत चुकाई है—एक तरफ एक युवा, तरुण, ने अपनी जान गंवाई और दूसरी तरफ एक पूरा परिवार उत्पीड़न का सामना कर रहा है.”
उन्होंने दिल्ली के लोगों से अपील की कि वे किसी भी उकसावे में न आएं और यह भी कहा कि भारत की ताकत उसकी एकता में है.
‘उत्तम नगर मुश्किल से खबरों तक पहुंचा’
जेजे कॉलोनी के कई दूसरे हिस्सों से अलग, डॉ. मसूद रशीद का क्लिनिक हमेशा की तरह व्यस्त है. मरीज वेटिंग एरिया में बैठे अपने फोन चला रहे हैं.
डॉ. रशीद 1980 के दशक से यहां रह रहे हैं और काम कर रहे हैं. उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “मुझे याद है जब मैं सहारनपुर से यहां आया था. यह पूरा इलाका जंगल था, यहां सिर्फ एक सड़क थी, जिस पर दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की बसें चलती थीं.”

उन्होंने इस मोहल्ले को बढ़ते देखा है, एक कमरे के घरों से लेकर चार मंजिला इमारतों तक, और बाद में आई दिल्ली मेट्रो तक. इसके साथ नए निवासी और नए कारोबार भी आए. डॉ. रशीद ने कहा, “उत्तम नगर ने इस तरह की नफरत कभी नहीं देखी थी. उत्तम नगर तो मुश्किल से खबरों में आता था.” उन्होंने कहा कि होली के बाद मुस्लिम निवासियों को सलाह दी गई थी कि अंधेरा होने के बाद घर से बाहर न निकलें. “कई लोगों ने मेरे क्लिनिक आना भी बंद कर दिया, क्योंकि उन्हें डर था कि ‘कुछ’ हो सकता है.”
लेकिन जेजे कॉलोनी के A, B और C ब्लॉक अब धीरे-धीरे सामान्य हालत में लौट रहे हैं.

एक दशक से ज्यादा समय से यहां रह रहे गुलफाम सैफी ने कई दिन बंद रहने के बाद इस हफ्ते आखिरकार अपनी वर्कशॉप खोल दी. उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “सरकार ने हमें खोलने को कहा. हम मुस्लिम और हिंदू साथ रहेंगे.”
पास की एक राशन दुकान पर तनाव जैसे पीछे छूटता हुआ दिखता है, जहां हिंदू और मुस्लिम निवासी लाइन में खड़े अपने राशन का इंतज़ार कर रहे हैं. जैसा कि डॉ. रशीद ने कहा: “उत्तम नगर में ज़िंदगी चलती रहेगी. चाहे भारी पुलिस मौजूदगी में ही क्यों न हो.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: पश्चिम एशिया में गैस क्षेत्रों पर हमलों के बीच भारत ने कहा—LPG सप्लाई चिंता का विषय
