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आलोक वर्मा की फाइल फोटो | पीटीआई
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नई दिल्ली: आलोक वर्मा को सीबीआई के निदेशक के पद से हटा दिया गया है. पीएम आवास पर हुई चयन समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया है. अभी दो दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने आलोक वर्मा को बहाल किया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली चयन समिति में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और जस्टिस एके सीकरी भी थे. आलोक वर्मा पर 2-1 से फैसला हुआ. मल्लिकार्जुन खड़के ने आलोक वर्मा को हटाने का विरोध किया. यह फैसला पीएम की अध्यक्षता में लिया गया है.

सीबीआई निदेशक की नियुक्ति/तबादले मामले की चयन समिति में भारत के प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश या मुख्य न्यायाधीश द्वारा नामित सुप्रीम कोर्ट जज और लोकसभा में विपक्ष के नेता होते हैं.

वर्मा ने किए और सीबीआई अधिकारियों के तबादले

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) निदेशक के रूप में बहाल होते ही आलोक वर्मा ने गुरुवार को पांच और अधिकारियों को तबादला कर अधिकारियों को स्थानांतरित करने का सिलसिला जारी रखा. तबादला किए गए अधिकारियों में दो संयुक्त निदेशक, एक सहायक निदेशक और दो उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) शामिल हैं. तबादला होने वाले अधिकारियों में संयुक्त निदेशक अजय भटनागर और वी. मुरुगेसन, डीआईजी एमके सिन्हा व तरुण गौबा और सहायक निदेशक एके शर्मा हैं.

भटनागर को एमडीएमए और एनई विभागों की उनकी वर्तमान जिम्मेदारी के अलावा प्रशिक्षण का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, जबकि एसी 2 का प्रभार संभाल रहे मुरुगेसन एसी 3 का भी निरीक्षण करेंगे. अतिरिक्त निदेशक शर्मा एसी 1 डिवीजन का निरीक्षण करेंगे. सिन्हा को बीएस व एफसी की जिम्मेदारियों के साथ एसी 1 डिवीजन का प्रभार दिया गया है, जबकि चंडीगढ़ भ्रष्टाचार रोधी शाखा (एसीबी) में कार्यरत गौबा को एसी 3 का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है.

एजेंसी के सूत्रों ने कहा, ‘मुरुगेसन और गौबा, एके शर्मा व एमके सिन्हा के बजाए विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ जांच की निगरानी करेंगे. सीबीआई ने भ्रष्टाचार में कथित संलिप्तता के लिए अस्थाना के खिलाफ मामला दर्ज किया था.

शीर्ष अदालत द्वारा वर्मा को सीबीआई प्रमुख के रूप में सीमित शक्तियों के साथ पदभार संभालने की मंजूरी दिए जाने के बाद यह तबादले हुए हैं. फिर से पदभार संभालने के घंटों बाद उन्होंने एजेंसी के अंतरिम प्रमुख एम. नागेश्वर राव द्वारा जारी अधिकतर तबादला आदेशों को निरस्त कर दिया.

सुब्रमण्यम स्वामी ने खुलकर किया था आलोक वर्मा का बचाव

इससे पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने गुरुवार को कहा कि सरकार सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को सुने बगैर केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) की रिपोर्ट के आधार पर उन्हें हटा नहीं सकती. सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि अगर सरकार आलोक वर्मा को हटाती है तो समस्या सुलझने के बजाय और बदतर हो जाएगी.

स्वामी ने आलोक वर्मा से मुलाकात के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के मुख्यालय के बाहर संवाददाताओं से कहा, ‘वे आलोक वर्मा को सुने बिना सीवीसी की रिपोर्ट के आधार पर उन्हें नहीं हटा सकते.’

राहुल गांधी ने सीबीआई प्रमुख को हटाने की जल्दबाजी पर उठाया था सवाल

वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी गुरुवार को कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राफेल लड़ाकू विमान सौदे की जांच के डर से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) प्रमुख आलोक वर्मा की बर्खास्तगी की जल्दीबाजी में हैं।

राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘प्रधानमंत्री सीबीआई प्रमुख को बर्खास्त करने की इतनी जल्दबाजी में क्यों हैं. वह सीबीआई प्रमुख को अपना मामला चयन समिति के समक्ष पेश करने की इजाजत क्यों नहीं देते. उत्तर : राफेल.’


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