प्रयागराज, 27 नवंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 1971 के युद्ध में शहीद हुए सैनिक की विधवा की दुर्दशा पर गंभीर चिंता व्यक्त की है जिसने अदालत में याचिका दायर कर दावा किया कि वह पांच बीघा भूमि की हकदार है, जबकि उसे केवल ढाई बीघा जमीन ही आवंटित की गई और वह वर्ष 1974 से अपने हक के लिए संघर्ष कर रही है।
अदालत ने बृहस्पतिवार को पारित अपने आदेश में राज्य सरकार को निर्देश दिया कि विधवा महिला के दावे का शीघ्र निपटान सुनिश्चित करने के लिए आठ दिसंबर तक सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने कहा कि यदि याचिका में किए गए दावे सही हैं तो यह स्थिति समाज की व्यवस्था का एक “चौंकाने वाला प्रमाण” प्रस्तुत करती है।
अदालत ने कहा, “यह एक ऐसा मामला है जहां 1971 के युद्ध में शहीद हुए सैनिक की विधवा पत्नी 1974 से संघर्ष कर रही है जो पांच बीघा जमीन की पात्र है और उसे केवल ढाई बीघा जमीन दी गई है। यदि यह कथन सत्य है तो यह पूरे समाज की स्थिति का एक चौकाने वाला प्रमाण है।”
अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि विधवा महिला के दावे का निपटारा जल्द से जल्द किया जाए और अगली सुनवाई की तिथि आठ दिसंबर तक अनुपालन रिपोर्ट दायर की जाए।
भाषा सं राजेंद्र खारी
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