Thursday, 20 January, 2022
होमदेशशराबखोरी या प्रताड़ना? यूपी में पुलिस पूछताछ के कुछ घंटे बाद ही दम तोड़ देने वाले व्यक्ति के मामले में क्या सामने आया

शराबखोरी या प्रताड़ना? यूपी में पुलिस पूछताछ के कुछ घंटे बाद ही दम तोड़ देने वाले व्यक्ति के मामले में क्या सामने आया

मौत के बाद जितेंद्र उर्फ कल्लू की पीठ पर दिखे नीले निशानों के कारण पुलिस पर बर्बरता के आरोप लगे हैं. परिवार का कहना है कि वह काफी डरा हुआ था लेकिन उसने पिटाई के बात से इनकार किया था. परिजन चाहते हैं कि उसकी मौत के जिम्मेदार लोगों को सजा मिले.

Text Size:

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के कानपुर में रहने वाले जितेंद्र श्रीवास्तव उर्फ कल्लू को उसके पड़ोसी वाई.एस. दीक्षित द्वारा 20 लाख रुपये की चोरी का आरोप लगाने के बाद 12 नवंबर को पूछताछ के लिए कल्याणपुर पुलिस स्टेशन लाया गया था. स्टेशन आने के कुछ देर बाद ही कल्लू ने पेट में दर्द की शिकायत की और 15 नवंबर की शाम को अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई.

इसके तुरंत बाद, विभिन्न न्यूज रिपोर्टों में कल्लू के परिवार के सदस्यों के हवाले से आरोप लगाया गया कि उसकी मौत पुलिस बर्बरता के कारण हुई है. उसके शव की तस्वीरें, जिसमें पीठ पर नीले पड़ चुके निशान साफ दिखाई दे रहे थे, सोशल मीडिया पर भी लगातार शेयर की जाने लगीं.

इस बीच, कल्लू की मौत को लेकर दीक्षित के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 (हत्या) और 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई.

हालांकि, पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने कहा कि कल्लू की मृत्यु ‘प्राकृतिक’ कारणों से हुई, जो कि संभवतः उसकी कथित शराबखोरी से जुड़ी थी. पुलिस ने दीक्षित को भी रिहा कर दिया, जिसे एफआईआर दर्ज होने के बाद पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था.

कल्लू की बहन पूनम ने दिप्रिंट से बातचीत में बताया कि उसने पुलिस की तरफ से किसी बर्बरता की बात से इनकार किया था. लेकिन साथ ही जोड़ा कि उसकी हालत पुलिस स्टेशन पर ही बिगड़ी थी. परिवार का कहना है कि 16 सितंबर को उसका शव रात भर उनके घर पर रखे रहने के दौरान ही उन्होंने ‘नीले निशान’ देखे.

अच्छी पत्रकारिता मायने रखती है, संकटकाल में तो और भी अधिक

दिप्रिंट आपके लिए ले कर आता है कहानियां जो आपको पढ़नी चाहिए, वो भी वहां से जहां वे हो रही हैं

हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.

अभी सब्सक्राइब करें

पूनम ने कहा कि उसका परिवार दीक्षित को- क्योंकि ‘उसकी वजह से कल्लू घर नहीं आ सका और उसे उचित देखभाल नहीं मिल पाई’— या फिर उसके भाई की मौत के लिए ‘जो कोई भी जिम्मेदार’ है, उन्हें सजा दिलाना चाहता है.


यह भी पढ़ें: विशेषज्ञों की राय में कृषि कानूनों की वापसी आम सहमति बनाने का एक मौका, सुधारों पर ब्रेक बुरा विचार होगा


किन हालात में हुई मौत

पूनम ने बताया कि कल्लू, जो दमन में सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम करता था, त्योहारों के मौके पर घर आया था. उसे 12 नवंबर को दोपहर करीब 1.30 बजे पुलिस थाने ले जाया गया और कई घंटों तक वह वहीं रहा.

उसने बताया, ‘हम रात लगभग 10 बजे उसे लेने पहुंचे. जब हम उससे मिले तो उसने पेट दर्द की शिकायत की और बार-बार एक ही डर जताया कि दीक्षित उसके साथ कुछ गलत कर रहा है.’

पूनम के मुताबिक, कल्लू ने परिवार को बताया कि पुलिस ने उसे अपनी ‘सुरक्षा’ के लिए घर नहीं जाने को कहा है और दीक्षित— जिसके साथ परिवार का पहले भी झगड़ा चलता रहा है— उसके खिलाफ एक और मामला दर्ज करा सकता है.

उसकी बहन ने बताया कि उसके बाद कल्लू को उसके परिवार ने पास के एक होटल में भेज दिया, जहां कथित तौर पर उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी.

कल्लू के परिवार और पुलिस के मुताबिक, 14 नवंबर को उसे एक डॉक्टर विनोद त्रिपाठी के पास ले जाया गया, जिन्होंने उससे किसी स्पेशलिस्ट को दिखाने और अल्ट्रासाउंड कराने को कहा.

दिप्रिंट द्वारा एक्सेस किए गए बयान में डॉक्टर ने कहा था कि कल्लू का पेट ‘सूजा’ हुआ था और उसने उन्हें बताया था कि दिवाली के बाद से उसका शराब पीना काफी बढ़ गया है. पूनम ने बताया, ‘डॉक्टर ने उसे कुछ दवाएं दी और हमें किसी बड़े अस्पताल में जाने को कहा.’

अगले दिन कल्लू ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया. यह पूछे जाने पर कि क्या परिवार को उस समय उसके शरीर पर चोट के निशान दिखे थे, पूनम ने इस बात से इनकार किया.

उसने कहा, ‘हमने उससे पूछा था कि क्या पुलिस ने उसे पीटा है और उसने इससे इनकार किया था. उसके शरीर पर चोट के कोई निशान भी नहीं थे. हमने ये निशान 16 नवंबर को मीडिया के पहुंचने के बाद ही देखे. शव रात भर घर में ही रहा था.’


यह भी पढ़ें: इन दो BJP शासित राज्यों ने लागू किए थे कृषि कानून, अब एक हैरान है, तो दूसरे ने कहा- कोई असर नहीं पड़ेगा


क्या कहती है ऑटोप्सी रिपोर्ट

दिप्रिंट ने कल्लू की पोस्टमार्टम रिपोर्ट हासिल की है, जो 16 नवंबर को हुआ था. रिपोर्ट में मौत का तात्कालिक कारण ‘छिद्र और पेरिटोनाइटिस’ के कारण लगे ‘सदमे’ को बताया गया है.

‘छिद्र’ शरीर के किसी अंग के बाहरी हिस्से में किसी छेद को दर्शाता है. पेरिटोनाइटिस को ‘ऊतक (पेरिटोनियम) में किसी लालिमा और सूजन के तौर पर संदर्भित किया जाता है जो आपके पेट या उदर को रेखांकित करता है.’ शराब के अत्यधिक सेवन के कारण लिवर की बीमारी आखिरी स्टेज में पहुंच जाने को पेरिटोनाइटस के ज्ञात कारणों में से एक माना जाता है.

रिपोर्ट में एंटीमॉर्टम चोटों के संदर्भ में ‘किसी तरह असामान्यता नहीं पाए जाने’ का भी उल्लेख है.

रिपोर्ट कहती है कि सामान्य रूप से ऊपरी तौर पर देखने पर ‘पीठ पर कई गहरे लाल-नीले निशान दिख रहे थे. हालांकि, शव परीक्षण के दौरान किसी तरह रक्त का जमाव नहीं देखा गया. पेट में सूजन थी.’

कानपुर नगर के पुलिस आयुक्त असीम अरुण ने दिप्रिंट को बताया कि इसमें कहीं कोई गड़बड़ी नहीं थी.

उन्होंने कहा, ‘अगर किसी व्यक्ति को लीवर में समस्या है, जो अमूमन शराब पीने के कारण होती है, तो पेरिटोनाइटिस की समस्या हो सकती है. जिसमें आंतों में छेद हो जाता है और पेट में जाने वाली सामग्री आंतों से बाहर निकलने लगती है. सीधे तौर पर कहें तो डॉक्टरों ने पुष्टि की है कि यह एक प्राकृतिक मौत है.’ पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) बीबीजीटीएस मूर्ति ने भी यही बात दोहराई और कहा कि शव परीक्षण वीडियो पर रिकॉर्ड किया गया था.

नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि कल्लू की मौत शराबखोरी के कारण हुई थी.

उन्होंने कहा, ‘पुलिस ने डॉक्टरों की टीम से बात की है. उन्होंने लंबे समय तक इलाज नहीं किया था, जिसके परिणामस्वरूप आंतों में छेद हो गया था.’

फोरेंसिक विशेषज्ञों के मुताबिक, कल्लू की पीठ पर निशान ‘पोस्टमॉर्टम हाइपोस्टेसिस’ के कारण थे, जिसे पोस्टमॉर्टम स्टेनिंग भी कहा जाता है.

एम्स के पूर्व निदेशक और फोरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. टी.डी. डोगरा ने दिप्रिंट को बताया कि यह शवों में होने वाला एक सामान्य बदलाव है.

उन्होंने कहा, ‘रक्त शरीर का सबसे बड़ा आधार होने वाले हिस्से (पीठ की तरह) में जाता है और वहां पहुंचकर जम जाता है. कई बार, इसे ‘चोट’ के तौर पर देखा जाता है.’ एक अन्य वरिष्ठ फोरेंसिक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मौत के चार-छह घंटे बाद पीठ पर ऐसे निशान उस स्थिति में भी दिखाई देने लगते हैं जब शव जमीन पर पड़ा होता है.

कल्लू के शव की ऑटोप्सी रिपोर्ट के नतीजों के आधार पर डॉ. डोगरा ने कहा कि ‘छिद्र’ आंतों में किसी छेद के संदर्भ में हो सकता है. इसके कई कारण हो सकते हैं— जख्म (चाकू आदि से लगी चोटें), स्वत:स्फूर्त, स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां (अल्सर आदि). सदमा रक्त संचरण बाधित होने को संदर्भित करता है.’


यह भी पढ़ें: अमरिंदर, BJP, कांग्रेस, AAP, SAD: कृषि कानूनों के रद्द होने से पंजाब चुनाव पर क्या पड़ सकता है असर


परिवार अब भी उठा रहा सवाल

दिप्रिंट ने पूनम से पूछा कि क्या परिवार का मानना है कि कल्लू को हिरासत में प्रताड़ित किया गया था.

इस पर पूनम का कहना था, ‘उसने यह बात नहीं कही कि पुलिस ने उसे पीटा. बस वह काफी डरा हुआ था. हमने अपना भाई खो दिया है. हम बस इंसाफ चाहते हैं, दीक्षित को सजा मिलनी चाहिए और जो कोई भी इसके जिम्मेदार है उसे भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.’

उसके मुताबिक, दीक्षित की वजह से ही कल्लू ‘घर नहीं आ पा रहा था और उसे उचित देखभाल नहीं मिल पाई.’

उसने बताया कि दीक्षित के साथ परिवार का झगड़ा पिछले साल शुरू हुआ था. पूनम के मुताबिक, ‘हमारे घर में बाथरूम/ट्वायलेट नहीं था. इस वजह से हम जब भी बाहर जाते थे तो दीक्षित वीडियो और फोटो खींच लेता था और हमें परेशान करता था.’

इस मामले से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि परिवार के आरोपों की जांच की जा रही है.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: कोविड ने प्रारंभिक शिक्षा को कैसे प्रभावित किया, अभिभावकों, शिक्षकों और तकनीक की क्या है भूमिका


 

share & View comments