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समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव व बसपा नेता मायावती | पीटीआई
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लखनऊ. बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव आज शनिवार को पहली बार एक साथ मीडिया को संबोधित करेंगे. इस दौरान बीजेपी के खिलाफ यूपी में तैयार हो रहे महागठबंधन का औपचारिक ऐलान हो सकता है. गठबंधन से पहले सीटों के बंटवारे की जानकारी सामने आ रही है. बीएसपी के 38 और सपा के 37 सीटों पर चुनाव लड़ने का फार्मूला तय हुआ है. कुछ ही देर में साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का साझा निमंत्रण शुक्रवार को मीडिया को भेजा गया था, जिसमें लिखा था कि शनिवार को होटल ताज में दोनों नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे. दोनों की ये पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस है. ऐसे में देशभर के सियासी दलों की निगाह इस पर टिकी हुई है.

सपा व बसपा से जुड़े नेताओं का कहना है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में सपा-बसपा व आरएलडी के बीच होने वाले महागठबंधन का औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा.

कांग्रेस नहीं होगी हिस्सा, आरएलडी पर सस्पेंस

ये अब लगभग तय हो गया है कि कांग्रेस इस महागठबंधन का हिस्सा नहीं होगी. वहीं शनिवार को होने वाली साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिये अभी तक गठबंधन के एक अन्य दल राष्ट्रीय लोकदल को इसमें शामिल होने का न्यौता नहीं मिला है. हालांकि, पार्टी के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी आज राजधानी लखनऊ में रहेंगे और संभवत: दोनों नेताओं से बाद में मुलाकात भी कर सकते हैं. आरएलडी ने छह सीटों की मांग की है, जबकि सूत्रों के अनुसार सपा-बसपा तीन सीटें देना चाह रहे हैं. ऐसे में शनिवार को बीच का रास्ता निकलने की संभावना है.

प्रेस कॉन्फ्रेंस जल्दी करने का कारण

पहले माना जा रहा था कि मायावती के जन्मदिन (15 जनवरी) या इस महीने के अंत में दोनों नेता साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे, लेकिन पिछले दिनों अवैध खनन मामले को लेकर सीबीआई के छापे के बाद जिस तरह से माया ने अखिलेश का बचाव किया उसके बाद से ही दोनों दल के नेता जल्द से जल्द गठबंधन के औपचारिक ऐलान के प्रयास में जुट गए. सपा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दोनों नेता सीबीआई छापे को लेकर बीजेपी सरकार पर एक साथ निशाना साधेंगे. इससे दोनों दलों के समर्थकों के बीच एकजुटता का संदेश भी जाएगा.

हर दल की टिकी निगाह

बता दें कि अखिलेश यादव और मायावती पिछले साल कर्नाटक में एचडी कुमारस्वामी के मुख्यमंत्री पद के शपथग्रहण समारोह में दिखे थे. उसके बाद ये दूसरा मौका होगा जब दोनों एक ही फ्रेम में नजर आएंगे. ऐसे में विपक्षी एकता के प्रयास में जुटे दूसरे दलों की निगाह भी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर होगी. वहीं बीजेपी भी इस महागठबंधन की काट ढूंढ़ने में तेजी से जुट जाएगी.

कांग्रेस अकेले लड़ेगी चुनाव

अब ये लगभग तय हो गया है कि कांग्रेस यूपी में अकेले चुनाव लड़ेगी. हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि यूपी में कांग्रेस को हल्के में नहीं लेना चाहिए. उनकी पार्टी बेहतर प्रदर्शन करेगी.

मुलायम-कांशीराम वाला करिशमा दोहरा पाएंगे?

यूपी के सियासी गलियारों में चर्चा है कि साल 1993 में मुलायम सिंह और कांशीराम ने मिलकर राम लहर को रोकने में तो सफलता हासिल कर ली थी, लेकिन क्या अब मायावती-अखिलेश मिलकर मोदी लहर को रोकने में कामयाब होंगे? सपा-बसपा गठबंधन 2 जून 1995 में टूटा था. इसके बाद दोनों दल एक साथ नहीं आए. यूपी में अब दोनों दल एक होते हुए दिखाई दे रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक मायावती के जन्मदिन समारोह में सहयोगी दलों के शीर्ष नेताओं को शामिल करने पर भी विचार हो रहा है. अब दोनों को इंतजार शनिवार की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस का है.


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