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बेंगलुरु, 21 मार्च (भाषा) प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) को न्यायिक प्रणाली में इस तरह शामिल किया जाना चाहिए कि इससे संस्था मजबूत हो, लेकिन इसके मूल कार्यों पर कोई असर न पड़े।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कर्नाटक न्यायिक अकादमी में ‘‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता – विवादों की रोकथाम और समाधान’’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का उद्घाटन करने के बाद यह बात कही।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता की व्यापक रूप में डाटा और रिकॉर्ड को संभालने और प्रक्रियात्मक देरी को कम करने में सहायता लेनी चाहिए। हालांकि निर्णय देने के न्यायिक कार्य में इसका हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।’’
प्रधान न्यायाधीश ने चेतावनी दी कि एआई उपकरणों को निर्णय लेने में हावी होने देने से न्याय वितरण प्रणाली के भीतर पारदर्शिता और जवाबदेही से समझौता हो सकता है।
उन्होंने प्रौद्योगिकी की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि एआई का इस्तेमाल केवल एक उपकरण के रूप में किया जाना चाहिए।
भाषा देवेंद्र सुरभि
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