नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) सितार वादक ऋषभ रिखीराम शर्मा के पंडित रवि शंकर के सबसे युवा और अंतिम शिष्य होने के दावे को रवि शंकर संगीत एवं प्रदर्शन कला संस्थान ने शुक्रवार को “गलत” करार दिया। इससे पहले सितार वादक-संगीतकार और पंडित रविशंकर की बेटी अनुष्का शंकर भी इन दावों पर सवाल उठा चुकी हैं।
रवि शंकर केंद्र के निदेशक अमिताव घोष द्वारा हस्ताक्षरित आधिकारिक बयान में कहा गया कि केंद्र “किसी भी तरह से” गुरुजी द्वारा दी गई शिक्षा और साथ ही ‘शिष्य’ शब्द को लेकर उत्पन्न भ्रम और गलत धारणाओं को दूर करने का प्रयास कर रहा है।
हाल ही में ‘ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे’ को दिए एक साक्षात्कार में अनुष्का शंकर ने कहा था कि शर्मा का उनके परिवार से जुड़ाव “कुछ इस तरह से बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया, जैसे वह उनके आखिरी शिष्य या सबसे युवा शिष्य थे”।
उन्होंने कहा, “हम उन्हें बचपन से जानते थे क्योंकि वह हमारे वाद्य यंत्र निर्माता संजय रिखीराम शर्मा के बेटे हैं… लेकिन वह बेहद प्रतिभाशाली हैं और उस कहानी के साथ या उसके बिना भी सभी सफलताओं के हकदार हैं।”
बाद में शर्मा की टीम ने एक बयान जारी किया जिसमें उसने दावा किया कि रवि शंकर ने व्यक्तिगत रूप से संजय शर्मा को फोन करके 3 जनवरी, 2012 को “गंडा बंधन समारोह” के लिए अपने 13 वर्षीय बेटे को लाने के लिए कहा था।
हालांकि, केंद्र ने दावा किया कि 3 जनवरी, 2012 को अनौपचारिक रूप से ‘धागा बांधने’ की रस्म हुई थी, लेकिन यह केवल “ऋषभ के पिता के आग्रह और उस छोटे बच्चे के प्रति स्नेह के कारण” हुई थी।
उसने कहा, “यह समारोह न तो औपचारिक ‘गंडा-बंधन समारोह’ के रूप में आयोजित किया गया था और न ही पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार आयोजित किया गया था। उल्लेखित अनौपचारिक समारोह में, जैसा कि अन्यथा पारंपरिक और आवश्यक है, कोई पुजारी उपस्थित नहीं था, कोई तैयार किया गया औपचारिक धागा नहीं था, कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई थी, और किसी अन्य छात्र या विस्तारित परिवार और मित्रों को आमंत्रित नहीं किया गया था।”
केंद्र ने कहा, “जानकारी के लिए बता दें कि गुरुजी और उनकी पत्नी के अलावा, केंद्र से केवल गुरुजी के एक वरिष्ठ शिष्य, परिमल सदाफल ही उपस्थित थे। गुरुजी ने औपचारिक दीक्षा प्रवचन नहीं दिया और न ही उन्होंने उस दिन कई घंटों का शिक्षण कार्य किया। उल्लिखित समारोह पूरी तरह से अचानक आयोजित किया गया था। घटना को बाद में यथास्थिति से कहीं अधिक बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है।”
घोष ने कहा कि 3 जनवरी 2012 और 9 मार्च 2012 के बीच, जब रवि शंकर अमेरिका लौट आए, तो उन्होंने सदाफल के साथ मिलकर ऋषभ को कुछ कक्षाएं दीं। यह कई घंटों के सत्र नहीं थे।
रवि शंकर का निधन 12 दिसंबर, 2012 को अमेरिका में हुआ था।
उन्होंने कहा, “गुरुजी द्वारा ऋषभ को 9 मार्च 2012 के बाद लंबे समय तक, निरंतर या दूरस्थ रूप से पर्यवेक्षित निर्देश दिए जाने का कोई भी दावा इसलिए गलत है।”
केंद्र ने शर्मा के रवि शंकर के सबसे युवा और अंतिम शिष्य होने के दावे का भी खंडन किया और कहा कि सबसे युवा शिष्य शुभेंद्र राव और अनुष्का शंकर थे, जबकि अंतिम शिष्य निषाद गाडगिल और डॉ. स्कॉट आइज़मैन थे।
भाषा प्रशांत रंजन
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