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नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी इलाके में निर्माण कार्य के लिए खोदे गए दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के 15 फुट गहरे गड्ढे में गिरने से एक मोटरसाइकिल सवार की मौत हो गई। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने शुक्रवार को बताया कि घटना के सिलसिले में दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के तीन इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया है।
वर्मा ने बताया कि परियोजना पर काम करने वाली कंपनी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जल बोर्ड पीड़ित परिवार को मुआवजा देगा।
घटना की सूचना शुक्रवार को मिलने के बाद जल मंत्री ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दिया।
सिंह ने पत्रकारों को बताया, ‘‘हम तीन अधिकारियों – कार्यकारी अभियंता, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता को निलंबित कर रहे हैं। इन तीनों अधिकारियों का कर्तव्य था कि वे यहां जारी काम की प्रगति की निगरानी करते।’’
उन्होंने बताया कि पिछले तीन महीनों से निर्माण स्थल पर काम जारी है लेकिन गड्ढा बृहस्पतिवार को खोदा गया था।
पुलिस ने बताया कि मृतक की पहचान कैलाशपुरी निवासी कमल भयानी (25) के रूप में हुई है, जो एक निजी बैंक के कॉल सेंटर में काम करता था।
दिल्ली सरकार ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) शरद भास्कर दराडे ने बताया, ‘‘सुबह करीब आठ बजे एक महिला ने पुलिस नियंत्रण कक्ष को फोन करके सूचना दी कि लगभग 15 फुट गहरे गड्ढे में एक व्यक्ति पड़ा है और हिल-डुल नहीं रहा है। पुलिस की एक टीम तुरंत मौके पर पहुंची।’’
डीसीपी ने बताया, ‘‘दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खोदे गए गड्ढे में कमल भयानी गिर गए और दुर्भाग्यवश उनकी मृत्यु हो गई।’’
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, प्रारंभिक जांच से पता चला है कि दिल्ली जल बोर्ड के निर्माणस्थल पर यह गड्ढा खोदा गया था और वहां अवरोधक लगाए गए थे।
डीसीपी ने कहा, ‘‘हम घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। यह सड़क पिछले कुछ दिनों से बंद है और गड्ढा बृहस्पतिवार को खोदा गया था। संभव है कि वह व्यक्ति प्रतिदिन इस मार्ग से आता-जाता था और उसे गड्ढे की जानकारी नहीं थी।’’
कमल के परिवार के अनुसार, वह बृहस्पतिवार देर रात को रोहिणी स्थित अपने कार्यालय से घर लौट रहा था और लगातार उनके संपर्क में था।
हालांकि, जब वह देर रात तक घर नहीं पहुंचा तो उसके रिश्तेदारों ने उसकी तलाश शुरू की और जनकपुरी, सागरपुर, विकास पुरी एवं रोहिणी सहित कई थानों का दौरा किया।
परिवार ने बताया कि उन्होंने पूरी रात कमल की तलाश की लेकिन उन्हें सुबह करीब आठ बजे गड्ढे में उसका शव मिलने की सूचना मिली।
कमल के जुड़वां भाई करण ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘मैंने अपने भाई के फोन पर जब कॉल किया तो पुलिस ने फोन का जवाब दिया। उन्होंने हमें बताया कि उन्हें उसका (कमल का) शव मिला है। जब हम वहां पहुंचे तो हमने उसका शव और मोटरसाइकिल गड्ढे में पड़े देखे। वहां सुरक्षा के इंतजाम थे, इसलिए मेरी समझ से परे है कि वह गड्ढे में कैसे गिरा।’’
करण ने बताया, ‘‘हम तीन भाई हैं, जिसमें कमल और मैं जुड़वां हैं। हम कल रात से ही उसकी तलाश कर रहे थे, अलग-अलग इलाकों में घूम रहे थे। पुलिस ने हमारी मदद नहीं की।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम कम से कम सात-आठ थानों में गए, लेकिन किसी ने हमारी मदद नहीं की। सुबह जब मैंने फिर उसके फोन पर कॉल किया तो पुलिस ने हमें बताया कि वह मृत पाया गया है।’’
कमल के बचपन के दोस्त मयंक ने अधिकारियों पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि इस घटना से परिवार पूरी तरह टूट गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘वे जुड़वां भाई थे। अब जब उनकी मां जीवित बचे बेटे का चेहरा देखेंगी, तो उन्हें कैसा महसूस होगा? हमने उनसे झूठ बोला है कि हम उससे अब तक नहीं मिले हैं और उसका इलाज हो रहा है।’’
मयंक ने कहा, ‘‘यह सरासर लापरवाही है। भले ही यह एक हादसा था, अगर वे उसे समय पर ढूंढ लेते, तो हम उसे अस्पताल ले जा सकते थे और उसकी जान बचा सकते थे। उसके पिता का क्या होगा, जो सात घंटे से अधिक समय से उसे तलाश रहे थे?’’
मयंक ने बताया कि कमल से आखिरी बार रात करीब साढ़े 11 बजे बात हुई थी।
मयंक ने बताया, ‘‘उसने हमें बताया कि वह ‘डिस्ट्रिक्ट सेंटर’ के पास है और 15 मिनट में घर पहुंच जाएगा। जब आधे घंटे बाद भी वह नहीं लौटा, तो हमने उसकी तलाश शुरू कर दी। सबसे पहले हम जनकपुरी थाने गए और उनसे फोन ‘ट्रेस’ करने का अनुरोध किया, जो अब भी बज रहा था।’’
मयंक ने आरोप लगाया, ‘‘उन्होंने हमें एक जगह के बारे में बताया लेकिन वह कमल के बतायी जगह से मेल नहीं खाता था। हमने उनसे शिकायत दर्ज करने को कहा, लेकिन उन्होंने बताया कि यह केवल सुबह ही किया जा सकता है और रात में तलाशी संभव नहीं है। हमने जिन सात थानों का दौरा किया, उनमें से किसी ने भी शिकायत दर्ज नहीं की।’’
मयंक ने बताया कि कमल की किसी से दुश्मनी नहीं थी। वह रोहिणी सेक्टर 10 स्थित अपने कार्यालय से लौट रहा था। उन्होंने कहा, ‘‘वह बहुत अच्छा इंसान था और काम से सीधे घर आता था। मेरा मानना है कि किसी ने उनकी हत्या कर उनके शव को गड्ढे में फेंक दिया है। लोगों को इस रास्ते से आने से रोकने के लिए उचित अवरोधक लगाए जाने चाहिए थे।’’
हालांकि, पुलिस ने किसी भी प्रकार की साजिश की आशंका से इनकार किया है और इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण घटना’ बताया है, लेकिन वे सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं।
डीसीपी ने बताया, ‘‘कमल के भाई नरेश भयानी रात करीब दो बजकर 45 मिनट पर जनकपुरी थाने आए थे और हमें बताया कि कमल रात से लापता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमने उसका पता लगाने की कोशिश की और हमें उसकी आखिरी लोकेशन ‘डिस्ट्रिक्ट पार्क’ के पास मिली। तलाश अभियान चलाने के बावजूद उसका पता नहीं चल सका।’’
पुलिस ने बताया कि उन्होंने मोबाइल फोन टावर के स्थान का पता लगाने की कोशिश की और रात भर तलाश अभियान चलाया, लेकिन उसे ढूंढ नहीं पाए। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिसकर्मियों को परिवार के साथ तलाश अभियान में भेजा गया था।
इस बीच, दिल्ली जल बोर्ड ने घटना की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है।
दिल्ली जल बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘घटनास्थल से इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना की सूचना मिली है। मामले की जांच जल बोर्ड और पुलिस द्वारा की जा रही है।’’
यह घटना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) नोएडा के 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के कुछ हफ्तों बाद हुई है। नोएडा सेक्टर 150 में एक निर्माण स्थल के पास 16 और 17 जनवरी की दरम्यानी रात को मेहता की कार के पानी से भरे गड्ढे में गिरने के बाद उनकी डूबने से मौत हो गई थी।
भाषा सुरभि नरेश
नरेश
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