प्रयागराज, तीन अप्रैल (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने पत्नी को गुजारा भत्ता देने में विफल रहने पर झांसी की परिवार अदालत के आदेश के मुताबिक 22 महीने की जेल की सजा काट रहे पति को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया है।
गिरफ्तारी वारंट की तामील होने के बाद पति ताहिर उर्फ बबलू तीन दिसंबर, 2025 से जेल में बंद है। न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने दो अप्रैल, 2026 को पारित आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता को कोई जमानत बांड जमा करने या मुचलका देने की जरुरत नहीं है क्योंकि वह नागरिक जेल में निरुद्ध है।
अदालत ने निबंधक (अनुपालन) को तत्काल इस आदेश की जानकारी जेल अधिकारियों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया ताकि याचिकाकर्ता की रिहाई सुनिश्चित हो सके।
इस मामले के तथ्यों के मुताबिक, ताहिर की पत्नी ने नवंबर, 2023 से सितंबर, 2025 तक 22 महीने से बकाया 2,64,000 रुपये गुजारा भत्ता की वसूली के लिए एक आवेदन दाखिल किया था। इसके बाद, पति को जालौन पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया और अदालत के समक्ष पेश किया गया जहां उसने उक्त राशि जमा करने में असमर्थता जताई।
उसने दलील दी कि वह एक गरीब व्यक्ति है और उक्त राशि का भुगतान करने में असमर्थ है। इसलिए उसने न्यूनतम संभव सजा देने की प्रार्थना की।
हालांकि, परिवार अदालत ने उसे 22 महीने की जेल की सजा सुनाई और कहा कि प्रति माह चूक के लिए अलग-अलग आवेदन दाखिल करना आवश्यक नहीं है और एक समेकित आवेदन पर भी अदालत हर माह की चूक के लिए एक महीने की सजा दे सकती है। इसके परिणामस्वरूप, ताहिर को 22 महीने की जेल की सजा सुनाई गई।
इस आदेश के खिलाफ ताहिर ने उच्च न्यायालय का रुख किया। सुनवाई के दौरान, उसके वकील ने दलील दी कि दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरसीपी) की धारा 125(3) के तहत यदि एक व्यक्ति बिना पर्याप्त कारण के भुगतान करने में विफल रहता है तो अदालत उसे केवल एक महीने के लिए नागरिक जेल भेज सकती है।
वकील ने यह दलील भी दी कि वारंट की तामील के बाद बकाया किसी राशि की वसूली के लिए संपत्ति कुर्क की जा सकती है और एक महीने से अधिक की जेल की अवधि नहीं बढ़ाई जा सकती।
इन दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने ताहिर की पत्नी को नोटिस जारी किया और पति को तत्काल रिहा करने का आदेश पारित किया। अदालत इस मामले की अगली सुनवाई 18 मई को करेगी।
भाषा
सं, राजेंद्र रवि कांत
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