नई दिल्ली: बांग्लादेश के ढाका के शरियतपुर जिले में हमलावरों द्वारा ज़िंदा जलाए गए 50-वर्षीय बांग्लादेशी हिंदू कारोबारी की शनिवार को अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई. यह हाल के हफ्तों में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हुआ तीसरा हमला है.
दमुदिया उपजिला में केमिस्ट और स्थानीय बैंकिंग एजेंट खोकन चंद्र दास 31 दिसंबर की रात अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, तभी कुछ हमलावरों ने उनकी रिक्शा पर हमला कर दिया. हमलावरों ने पहले उनकी पिटाई की, फिर उन पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी.
अपनी जान बचाने के लिए दास पास के एक तालाब में कूद गए. मौके पर जुटे स्थानीय लोगों ने बाद में उन्हें ढाका के एक अस्पताल पहुंचाया, जहां शनिवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया.
दैनिक प्रोथोम आलो के मुताबिक, मौत से पहले दास ने अपने हमलावरों की पहचान सोहाग खान (27), रब्बी मोल्या (21) और स्थानीय शाहिद सरदार के बेटे पलाश सरदार (25) के रूप में की थी.
हिंदुओं पर पहले हुए हमले
हाल के हफ्तों में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों की एक श्रृंखला देखने को मिली है.
24 दिसंबर को राजबाड़ी जिले में कथित तौर पर वसूली के आरोप में अमित मंडल को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला, स्थानीय रिपोर्टों में यह दावा किया गया. हालांकि, बांग्लादेश प्रशासन ने इसे सांप्रदायिक हमला मानने से इनकार किया.
इससे करीब एक हफ्ता पहले, मयमनसिंह के भालुका उपजिला में कथित ईशनिंदा के आरोप में दीपु चंद्र दास को भीड़ ने पीटकर मार डाला और जिंदा जला दिया. यह घटना उस समय हुई, जब छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद देश में हिंसा भड़क उठी थी.
पिछले साल व्यापक प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता से हटने के बाद से भारत और बांग्लादेश के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं. नोबेल पुरस्कार विजेता यूनुस मोहम्मद के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने बार-बार नई दिल्ली को पत्र लिखकर शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की है, जिन्होंने सरकार गिरने के बाद भारत में शरण ली थी.
बांग्लादेश में राष्ट्रीय चुनावों की घोषणा से पहले छात्र नेता हादी की मौत ने दोनों देशों के रिश्तों में और तनाव पैदा कर दिया. पड़ोसी देश के कुछ लोगों ने यह भी संकेत दिया कि हत्या के पीछे नई दिल्ली का हाथ था. भारत ने इन आरोपों को सख्ती से खारिज किया है और बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है.
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