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Tuesday, 3 March, 2026
होमदेशहर उड़ान पर 1 लाख की डील? रक्षा निर्यात क्लीयरेंस के लिए लेफ्टिनेंट कर्नल पर 50 लाख की रिश्वत का आरोप

हर उड़ान पर 1 लाख की डील? रक्षा निर्यात क्लीयरेंस के लिए लेफ्टिनेंट कर्नल पर 50 लाख की रिश्वत का आरोप

आरोपपत्र में कहा गया है कि लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार शर्मा ने DGCA, BCAS और नागरिक उड्डयन मंत्रालय को ईमेल भेजकर निर्यात के लिए सामान्य (ब्लैंकेट) छूट मांगी. ये ईमेल किसी भी प्राधिकरण की मंजूरी के बिना भेजे गए थे.

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नई दिल्ली: रक्षा मंत्रालय में तैनात लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक के एक अधिकारी ने एक विदेशी देश को रक्षा सामान की कार्गो खेप की उड़ानों की मंजूरी दिलाने के लिए 50 लाख रुपये की रिश्वत लेने पर सहमति दी—हर उड़ान के लिए 1 लाख रुपये—यह आरोप केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपने आरोपपत्र में लगाया है.

अधिकारी दीपक कुमार शर्मा जून 2023 से रक्षा उत्पादन विभाग (DDP) के इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड एक्सपोर्ट्स (ICE) डिवीजन में डिप्टी प्लानिंग ऑफिसर (DPO) के पद पर कार्यरत थे. उन्हें दिसंबर 2025 में दिल्ली स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया गया.

उनके नारायणा विहार स्थित घर पर तलाशी उस सूचना के बाद ली गई कि एक दिन पहले कथित तौर पर 3 लाख रुपये की रिश्वत पहुंचाई गई थी. ऑफिस से लौटने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया. सीबीआई ने कहा कि तलाशी के दौरान उन्होंने यह रकम खुद एजेंसी को सौंप दी. आरोप है कि यह रिश्वत विनोद कुमार नाम के एक बिचौलिए के जरिए उन्हें पहुंचाई गई थी.

शर्मा जिन मंजूरियों को दिलाने पर सहमत हुए थे—ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) से नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) से लैंडिंग अनुमति—वे भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) द्वारा बनाए गए सैन्य उपकरण ले जाने वाली कार्गो उड़ानों के लिए जरूरी थीं.

BDL रक्षा मंत्रालय के तहत एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है, जो मिसाइल, टॉरपीडो, हथियार प्रणाली और अन्य गोला-बारूद बनाती है.

आरोपपत्र के अनुसार यह ठेका दुबई स्थित DP World के पास था, जो भारत में अपनी इकाई हिंदुस्तान इन्फ्रालॉग (HIPL) के जरिए काम कर रही थी.

हालांकि, आरोपपत्र में विदेशी देश का नाम नहीं है, लेकिन ThePrint पहले रिपोर्ट कर चुका है कि विशेष CBI अदालत ने कहा था कि ये खेप आर्मेनिया भेजी जा रही थीं.

मामला क्या था

आरोपपत्र के मुताबिक सितंबर 2025 में उस विदेशी देश ने हिंदुस्तान इन्फ्रालॉग को सैन्य उपकरणों के हवाई और समुद्री परिवहन के लिए अपना लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाता नामित किया. बाद में उसकी सरकार ने BDL में ग्रुप कैप्टन स्तर के अधिकारी अजय कुमार बंसल से परिवहन में मदद मांगी.

बंसल ने शर्मा की मुलाकात DP World के भारत स्थित प्रतिनिधियों राजीव यादव और रवजीत सिंह से कराई. सिंह भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी हैं और पिछले साल रिटायर हुए थे.

सीबीआई के अनुसार DDP कार्यालय के विज़िटर रजिस्टर से पता चलता है कि इन दोनों ने 30 सितंबर से 19 दिसंबर के बीच तीन बार कार्यालय का दौरा किया. 30 सितंबर की बैठक में शर्मा ने कथित तौर पर अपनी मांग साफ कर दी.

सीबीआई ने आरोपपत्र में कहा, “जांच में सामने आया है कि 30.09.2025 की बैठक में दीपक शर्मा ने राजीव यादव और रवजीत सिंह से इन मंजूरियों को जल्दी दिलाने के लिए प्रति उड़ान 1,00,000 रुपये ‘फैसिलिटेशन फीस’ मांगी.”

यादव ने बताया था कि HIPL को क्या चाहिए: मुंबई एयरपोर्ट पर समय पर विमान संचालन, BCAS के NOC और DGCA की उड़ान मंजूरी. नियमों के मुताबिक किसी भी विदेशी पंजीकृत विमान को DGCA की पूर्व अनुमति जरूरी होती है, जो फ्लाइट क्लीयरिंग एजेंसी या विदेश मंत्रालय के अनुरोध पर दी जाती है.

सीबीआई के अनुसार 2 अक्टूबर तक सिंह शर्मा से शुरुआती 3 लाख रुपये के भुगतान के तरीके तय करने के लिए संपर्क में आ गए थे.

‘अधिकृत नहीं’ ईमेल

एजेंसी ने कहा कि शर्मा ने “अपने आधिकारिक पद, संपर्क और प्रभाव का दुरुपयोग करते हुए” विदेश मंत्रालय, BCAS, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और DGCA के साथ तालमेल कर HIPL द्वारा किराए पर लिए गए विमानों के लिए मंजूरी और NOC दिलाई.

उन्होंने DGCA, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और BCAS को कई ईमेल भेजे, जिनमें रणनीतिक महत्व के रक्षा सामान ले जाने वाली कार्गो उड़ानों के लिए मंजूरी मांगी गई. एक ईमेल में ‘कार्गो स्क्रीनिंग और फिजिकल जांच से छूट’ देने का अनुरोध भी किया गया था.

सीबीआई के मुताबिक ये अनुरोध उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर थे.

आरोपपत्र में कहा गया, “जांच में सामने आया कि लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक शर्मा द्वारा सभी खेपों के लिए सामान्य (ब्लैंकेट) मंजूरी मांगते हुए जो DO पत्र लिखे गए, वे सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बिना जारी किए गए थे.

हालांकि, DPO (ICE-II) के रूप में उन्हें संबंधित विदेशी देश को आपूर्ति में देरी के मुद्दे पर फॉलो-अप करना था, लेकिन NOC के लिए ब्लैंकेट मंजूरी मांगने का कोई अधिकार उन्हें नहीं दिया गया था.”

एजेंसी ने अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच 35 कॉल की रिकॉर्डिंग और चैट के अंश भी सबूत के तौर पर पेश किए.

आरोपपत्र में कहा गया, “जांच में यह भी सामने आया कि यादव ने अपनी कंपनी की आगामी 50 उड़ानों के लिए लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक शर्मा को 50 लाख रुपये की रिश्वत देने की पेशकश की थी, जिस पर दीपक शर्मा सहमत हो गए थे.”

शर्मा के वकीलों—हर्ष के. शर्मा, लक्ष्य पराशर और वैभवी शर्मा—ने दलील दी कि कॉल इंटरसेप्शन भारतीय टेलीग्राफ एक्ट और नियमों का उल्लंघन है. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि CBI के दावे के अनुसार सह-आरोपी विनोद को शर्मा के घर से कैसे गिरफ्तार किया गया. उनका कहना था कि घर की तलाशी का वीडियो फुटेज अदालत में पेश नहीं किया गया.

दिप्रिंट ने इस मामले पर टिप्पणी के लिए शर्मा के वकीलों से संपर्क किया है. जवाब मिलने पर रिपोर्ट अपडेट की जाएगी.

अब क्या स्थिति है

दिल्ली की एक अदालत ने 20 फरवरी को शर्मा को जमानत दे दी. अदालत ने उनके वकील की इस दलील को माना कि जांच पूरी हो चुकी है और उन्हें हिरासत में रखने का अब कोई मतलब नहीं है.

दिप्रिंट ने शर्मा के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता से भी सवाल भेजे हैं. मंत्रालय की प्रतिक्रिया मिलने पर रिपोर्ट अपडेट की जाएगी.

आरोपपत्र में सह-आरोपियों के रूप में कथित बिचौलिया विनोद कुमार, रवजीत सिंह, राजीव यादव और यूएई स्थित कारोबारी मधु सुदन मुंद्रा का नाम है, जो विमान लीज और चार्टर संचालन का कारोबार चलाते हैं. रक्षा सामान निर्यात के लिए विमान मुंद्रा की कंपनी से लीज पर लिया गया था.

इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) (आपराधिक साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है.

विनोद कुमार और शर्मा ही दो आरोपी थे जिन्हें गिरफ्तार किया गया. विनोद को भी जमानत मिल चुकी है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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