Thursday, 26 May, 2022
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अगर सरकार सभी को मुफ्त N95 मास्क दे तो 67% भारतीय समर्थन करेंगे: सर्वे

LocalCircles के सर्वेक्षण से यह भी पता चला है कि मास्क इस्तेमाल करने वाले हर 3 में से 2 भारतीय Omicron वैरिएंट के खिलाफ अधिक प्रभावी माने जाने वाले N-95 के बजाये कपड़े का मास्क पहनते हैं.

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नई दिल्ली:अगर सरकार कोविड-19 का प्रसार रोकने के लिए सभी को एन-95 मास्क मुफ्त में मुहैया कराने का अभियान चलाए तो हर तीन में से दो भारतीय इसका समर्थन करेंगे. यह बात एक ताजा सर्वेक्षण में सामने आई है.

सामुदायिक मंच लोकलसर्किल द्वारा किए गए सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि जो भारतीय सुरक्षा के लिहाज से मास्क पहनते हैं, उनमें से हर तीन में से दो, यानी लगभग 67 प्रतिशत एन-95 के बजाये केवल कपड़े के मास्क का इस्तेमाल करते हैं.

भारत में यह सर्वेक्षण अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन की तरफ से हाल ही में मुफ्त मास्क कार्यक्रम चलाए जाने की घोषणा के बाद में आयोजित किया गया था. अमेरिकी कार्यक्रम के तहत अमेरिकियों को 400 मिलियन एन-95 मास्क फार्मेसियों और स्वास्थ्य सुविधाओं के जरिये उपलब्ध कराए जाने हैं.

लोकलसर्किल ने भारत में कोविड प्रतिबंधों को कड़ा करने, इनके उल्लंघन पर सजा और वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट के खिलाफ कोविशील्ड की दो खुराक की प्रभावकारिता पर सवालों के संदर्भ में बिडेन की घोषणा और वर्तमान महामारी से संबंधित घटनाओं के बीच समानताओं कीं तुलना की.

कंपनी ने एक प्रेस बयान में कहा, ‘केवल सबसे कमजोर लोगों के लिए और बूस्टर प्रोग्राम के खिलाफ कोई सुरक्षा सीमित नहीं है, इसलिए मास्क पहनना संक्रमण के खिलाफ एकमात्र पूर्ण बचाव है.’

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किसी व्यक्ति को ओमीक्रॉन वैरिएंट से बचाने में कपड़े के मास्क, सर्जिकल मास्क और एन-95 मास्क की क्षमताओं की तुलना को लेकर एक फैक्टशीट जारी करते हुए लोकलसर्किल ने एन-95 मास्क को अन्य सभी प्रकार के मास्क से बेहतर होने का जिक्र किया.


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लागत बाधा है

लोकलसर्किल के प्लेटफॉर्म पर किए गए इस सर्वेक्षण को 307 जिलों में रहने वाले भारतीयों से कुल 18,500 प्रतिक्रियाएं मिलीं. इन उत्तरदाताओं में से 65 प्रतिशत पुरुष थे; 44 फीसदी टियर-1 शहरों से थे.

निष्कर्षों के अनुसार, तीन में से एक भारतीय अपने घर से बाहर निकलते समय मास्क नहीं रखता है, और तीन में से दो भारतीय केवल कपड़े का मास्क पहनते हैं.

लोकलसर्किल ने कहा, हालांकि, कई भारतीयों के लिए लागत बाधा को नजरअंदाज करना मुश्किल है, सर्जिकल और क्लॉथ मास्क की कीमत औसतन 10 रुपये से कम है, जबकि एन 95 मास्क की कीमत 200 रुपये तक हो सकती है.

‘अगर इस तरह के मास्क कुछ जागरूकता साहित्य के साथ मुफ्त में उपलब्ध कराए गए, तो इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि कई लोग कम से कम एक कोविड लहर के समय में उनका उपयोग करना शुरू कर देंगे. यह प्रसार को कम करने में एक महत्वपूर्ण सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है.’ इसने अधिक से अधिक मास्क अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए राज्य के नेतृत्व वाले प्रयास की आवश्यकता पर जोर दिया.

हर घर में मुफ्त N95 मास्क देने के लिए भारत सरकार के नेतृत्व वाले मिशन पर एक सवाल के 9,902 सर्वेक्षण प्रतिक्रियाओं में से 67 प्रतिशत ने समर्थन व्यक्त किया, 28 प्रतिशत ने विरोध व्यक्त किया, और 5 प्रतिशत अनिश्चित थे.

सर्वेक्षण में मिशन के कार्यान्वयन के बारे में एक अनुवर्ती प्रश्न भी शामिल था, और इस तरह के मिशन को किस हद तक सरकार द्वारा वित्त पोषित किया जाना चाहिए.

इस सवाल के 8,740 जवाबों में से 73 फीसदी ने कहा कि सरकार को इसे जितना संभव हो सके वित्तपोषित करना चाहिए और करों में वृद्धि नहीं करते हुए निजी क्षेत्र से कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के माध्यम से शेष धन जुटाना चाहिए.

इस बीच, 19 प्रतिशत ने कहा कि सरकार को मिशन के लिए ‘कॉर्पोरेटों को सीएसआर फंड दान करने में सक्षम बनाना चाहिए’, जबकि 4 प्रतिशत ने उत्तर दिया कि सरकार को इसे पूरी तरह से निधि देना चाहिए और एक विशेष उपकर के माध्यम से कर बढ़ाना चाहिए.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें )

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