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राजघाट पर वापसी की लगाते कश्मीरी पंडित | फोटो अमित रैना
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नई दिल्ली: आज 19 जनवरी है. हो सकता है यह तारीख बहुत सारे लोगों के लिए आम हो, लेकिन यह तारीख हमारे देश के लाखों लोगों के लिए एक काली तारीख है. जब भी यह दर्द भरी तारीख आती है कश्मीरी राजघाट पर एकत्रित होकर उस आतंकी हमलों को याद करते हैं जब उन्होंने अपनों को खोया था. उन्हें अपने घरों से बेघर कर दिया गया था, पुश्तैनी मकान से निकाल दिया गया.

पंडितो को वादियों से चुन-चुन कर प्रताड़ित किया गया यही नहीं महिलाओं के साथ दुष्कर्म किया गया. जिन सत्ता में बैठे नुमाइंदों से मदद की आस थी, उन्होंने अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए इन लोगों की तरफ से अपना मुंह मोड़ लिया. ऐसे में अपने ही देश में शरणार्थी बने ये लोग आज एकबार फिर से राजधानी दिल्ली में एकत्रित हुए और सरकार से पूछा ‘जाएं तो जाएं कहां.’

आज ही के दिन 29 साल पहले कश्मीर के पंडितों को अपना घर छोड़ने का फरमान जारी हुआ था. लगभग तीन दशक बीत जाने के बाद भी कश्मीरी पंडितों को न्याय नहीं मिल सका है. ऐसे में इस दिन को याद करते हुए कश्मीरी पंडितों का एक समूह राजघाट पर एकत्रित हुआ और ‘ओथ टू रिटर्न’ कार्यक्रम के बैनर तले उस काली रात को याद किया और खो चुके अपनों की याद में पुष्पांजली अर्पित की.

सैकड़ों की संख्या में पहुंचे कश्मीरी पंडितों ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने श्रद्धांजली अर्पित करते हुए इस दिन को कश्मीरी पंडित विस्थापना दिवस के रूप में याद किया और 1990 में कश्मीर घाटी में आतंकवादियों ने आज ही के दिन करीब पांच लाख कश्मीरियों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर कर दिया था, इसदिन को अधिकार और गौरव वापस प्रार्त करने का प्रण भी लिया.
राजघाट पर शांति मार्च में बैठे कश्मीरी पंडितों के हाथ में पोस्टर है. जिसपर लिखा है.

’29 साल हो गए, लेकिन अभी और कब तक ?’

तीन दशक पहले कश्मीर से विस्थापित हुई मोना राजदान उस काली रात को याद करती हैं, ‘वह रात हमारे जीवन की सबसे लंबी रात थी. चारों तरफ भीड़ कश्मीर की हर सड़क को घेरे हुए, हम कश्मीरी पंडितों को या तो उनका साथ देने या फिर घाटी छोड़ कर जाने के लिए नारे लगा रहे थे.’
पुष्पांजली सभा में मौजूद छात्र विवेक रैना कहते हैं, ’50 हजार से अधिक लोग खस्ताहाल शिविरों में गुजर बस करने को मजबूर हैं. जहां सांप और बिच्छू के काटने का भी डर बना रहता है. पिछले कुछ सालों में हमारा जन्म और मृत्यु दर 14:1 हो गया है. और हम विलुप्त होने के कगार पर हैं.’

वहीं अमित रैनाा कहते हैं, ‘हमारा कश्मीर में घर वापसी का सत्याग्रह पिछले 29 साल से चला आ रहा है, अगर जरूरत पड़ी तो 290 साल तक जारी रहेगा.’

न्याय की गुहार

राजघाट पर आए इस समुदाय ने सरकार से कश्मीरी पंडितों के पुनर्सथापन की मांग करते हुए उनके लिए कश्मीर की कुछ जगह कश्मीरी समुदाय के एकत्रित हुए लोगों ने सरकार से एकबार फिर से अपील की है कि वह कश्मीरी पंडितों की घाटी में वापसी के वादे तो पूरा करें. विस्थापित कश्मीरी पंडितों के लिए कश्मीर में ही एक स्थान बनाया जाए. लंबे समय से आंदोलन न करने वाला पूरा समुदाय न्याय की बाट जोह रहा है. वो लोग भी न्याय चाहते हैं जिन्होंने आतंकी हमलों में अपनों को खोया है. समुदाय ने सरकार को याद दिलाया,

न्याय में देरी, अन्याय है.’


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