नयी दिल्ली, 29 जनवरी (भाषा) तमिलनाडु सरकार ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह वाले दिन राज्य के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के लिए मिले 288 आवेदनों में से 252 को स्वीकृति दी गयी।
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर में 22 जनवरी को रामलला के नवीन विग्रह की ‘प्राण प्रतिष्ठा’ की गयी। देशभर में इस अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा और धार्मिक गतिविधियों का आयोजन किया गया।
तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित आनंद तिवारी ने न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ को बताया कि कानून-व्यवस्था की स्थिति को नुकसान पहुंचने की आशंका के कारण 36 आवेदनों को स्वीकृति नहीं दी गयी थी।
तिवारी ने कहा, ‘‘अनुमति न देने का मुद्दा उच्च न्यायालय की मदुरै और मद्रास पीठ के समक्ष भी लंबित है, अत: इस मामले का निस्तारण किया जाना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें 288 आवेदन मिले थे जिनमें से 252 को स्वीकृति दी गयी थी।’’
उच्चतम न्यायालय ने तिवारी से 15 दिन के भीतर यह बताते हुए एक हलफनामा दाखिल करने को कहा कि कितने आवेदनों को स्वीकृति दी गयी और कितने आवेदन खारिज किए गए। साथ ही यह बताने के लिए भी कहा था कि मद्रास उच्च न्यायालय की दोनों पीठ के समक्ष कौन-से मुद्दे लंबित हैं।
याचिकाकर्ता और तमिलनाडु निवासी विनोज की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दामा शेषाद्री नायडू ने कहा कि वह एक प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करना चाहते हैं।
इस पर न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा, ‘‘श्रीमान नायडू इसकी आवश्यकता नहीं है। मामले को आगे मत बढ़ाइए। यह एक दिवसीय कार्यक्रम था। जो आदेश दिया गया, उसने अपनी भूमिका निभायी है।’’
उच्चतम न्यायालय ने 22 जनवरी को तमिलनाडु के प्राधिकारियों से राज्य के सभी मंदिरों में अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के सीधे प्रसारण पर ‘‘रोक’’ लगाने के किसी भी मौखिक दिशा निर्देश के आधार पर नहीं बल्कि कानून के अनुसार काम करने को कहा था।
उच्चतम न्यायालय विनोज की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह के तमिलनाडु के मंदिरों में सीधे प्रसारण पर रोक लगाने के 20 जनवरी को दिए एक ‘‘मौखिक आदेश’’ को रद्द करने का अनुरोध किया गया है।
पीठ ने तमिलनाडु की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अमित आनंद तिवारी का यह बयान दर्ज किया कि मंदिरों में ‘पूजा-अर्चना’ या अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर कोई पाबंदी नहीं है।
पीठ ने प्राधिकारियों से उन वजहों को रिकॉर्ड में रखने और उन आवेदनों का डेटा बनाए रखने को कहा है जिन्हें मंदिरों में ‘पूजा अर्चना’ और प्राण प्रतिष्ठा समारोह के सीधे प्रसारण के लिए स्वीकृति दी गयी है। साथ ही जिन्हें अनुमति नहीं दी गयी है, उन्हें भी रिकॉर्ड में रखने को कहा है।
भाषा गोला प्रशांत
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