नयी दिल्ली, चार अप्रैल (भाषा) राज्यसभा ने वक्फ संशोधन विधेयक पर बृहस्पतिवार को लंबी चर्चा कर एक रिकॉर्ड बनाया। हालांकि थिंक टैंक ‘‘पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च’’ के अनुसार, संसद में मैराथन चर्चाओं का इतिहास रहा है तथा कुछ चर्चाएं देर रात तक चलीं, जिनमें सबसे लंबी बहस लोकसभा में 20 घंटे से भी अधिक समय तक चली थी।
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने बृहस्पतिवार को 17 घंटे तक चली बैठक का जिक्र किया जो सदन के इतिहास में अब तक की सबसे लंबी बैठक है।
इस सत्र का एक मुख्य आकर्षण वक्फ (संशोधन) विधेयक का पारित होना था, जिस पर दोनों सदनों में लंबी चर्चा हुई। दो अप्रैल को लोकसभा ने विधेयक पर लगभग 14 घंटे तक चर्चा की, जबकि अगले दिन राज्यसभा सुबह 4:02 बजे तक बैठी, जो हाल के इतिहास में सबसे लंबी बैठकों में से एक थी।
इससे पहले 1981 में इसी तरह की एक मैराथन बैठक में, राज्यसभा ने आवश्यक सेवा रखरखाव विधेयक पर सुबह 4:43 बजे तक चर्चा की थी।
लोकसभा में ‘हमारे लोकतंत्र की स्थिति’ मुद्दे पर सबसे लंबी चर्चा हुई, जो 20.08 घंटे तक चली थी। इसके बाद 1993 के रेल बजट पर 18.35 घंटे तक चर्चा हुयी थी। वर्ष 1998 के रेल बजट पर 18.04 घंटे तक चर्चा हुई, जबकि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में प्रशासन की विफलता विषय पर 17.25 घंटे और आवश्यक सेवा रखरखाव विधेयक, 1981 पर 16.58 घंटे तक बैठक हुई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सत्र के दौरान मणिपुर में राष्ट्रपति शासन के अनुमोदन विषय पर संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण चर्चा भी हुई। लोकसभा ने इसे 42 मिनट में और राज्यसभा ने 1.24 घंटे में मंजूरी दी।
इसमें कहा गया है कि 18वीं लोकसभा के पहले वर्ष में 11 विधेयक पारित किए गए जो 1999 के बाद से सबसे कम है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लोकसभा मंत्रालयों के खर्च पर भी चर्चा करती है। इस सत्र के दौरान, सदन ने तीन मंत्रालयों के व्यय पर चर्चा की।
भाषा अविनाश सुरेश
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