गुवाहाटी, 18 जून (भाषा) असम में ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) द्वारा कांग्रेस पर ‘क्रॉस वोटिंग’ के आरोप लगाए जाने के बीच मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा सहित 126 विधायकों में से कुल 123 ने सोमवार को विधानसभा में राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान किया।
कांग्रेस और एआईयूडीएफ ने आधिकारिक तौर पर विपक्षी दलों के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा का समर्थन किया। हालांकि, बदरुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाली पार्टी एआईयूडीएफ ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के 27 में से 20 विधायकों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू को वोट दिया।
एआईयूडीएफ विधायक करीमुद्दीन बरभुइयां ने संवाददाताओं से कहा कि उनके पास इस बात के सबूत हैं कि कांग्रेस के कम से कम 20 विधायकों ने मुर्मू के पक्ष में ‘क्रॉस वोट’ किया। कछार जिले के सोनाई के विधायक बरभुइयां ने दावा किया कि रविवार को विधानसभा में हुई कांग्रेस की बैठक में पार्टी के केवल दो-तीन विधायक शामिल हुए थे और केवल जिलाध्यक्ष ही मौजूद थे।
आरोपों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता देवव्रत सैकिया ने आश्चर्य जताया कि जब गुप्त मतदान के माध्यम से मतदान हुआ तो बरभुइयां ऐसे ‘‘बेतुके’’ दावे कैसे कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘शुरुआत से ही एआईयूडीएफ ने राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर दोहरा मापदंड बनाए रखा है। लेकिन मैं यह अनुमान या अटकलें नहीं लगाना चाहूंगा कि उनके किस विधायक ने किसके लिए मतदान किया।’’
सैकिया ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘अजमल ने नयी दिल्ली में विपक्ष की दो बैठकों में भाग लिया था, लेकिन उन्होंने खुद प्रतिबद्धता नहीं दिखाई। बाद में उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी मुर्मू को वोट देगी, लेकिन चुनाव से एक दिन पहले उन्होंने फिर से अपना विचार बदल दिया। परिणाम से ही सही तस्वीर स्पष्ट होगी।’’
अजमल ने पहले घोषणा की थी कि एआईयूडीएफ मुर्मू के पक्ष में मतदान करेगा, लेकिन चुनाव से एक दिन पहले, निर्णय बदल दिया और कहा कि उसके विधायक सिन्हा को वोट देंगे।
भाषा आशीष दिलीप
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