नई दिल्ली: हिसार की यूट्यूब इन्फ्लुएंसर ज्योति रानी, जिन्हें ज्योति मल्होत्रा के नाम से भी जाना जाता है, को ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (OSA), 1923 के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार हुए 10 महीने हो चुके हैं, लेकिन उनका ट्रायल अभी तक शुरू नहीं हुआ है. यहां तक कि कोर्ट ने अभी तक उनके खिलाफ आरोपों की औपचारिक सुनवाई भी शुरू नहीं की है.
मल्होत्रा के खिलाफ मुख्य सबूत हिमाचल प्रदेश के पंडोह डैम का एक वीडियो है, जो उनके फोन में मिला था. पुलिस का कहना है कि यह ‘कैटेगरी B’ की महत्वपूर्ण जगह है, जिसकी वीडियोग्राफी OSA के तहत प्रतिबंधित है. पिछले साल अक्टूबर में 2,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार भी कर लिया, लेकिन मामला अभी तक आरोप तय करने की बहस तक भी नहीं पहुंचा है क्योंकि पुलिस ने कोर्ट को बताया कि वह एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करेगी. हिसार की कोर्ट ने नवंबर से अब तक चार बार इस मामले की सुनवाई की है, लेकिन सप्लीमेंट्री चार्जशीट अभी तक दाखिल नहीं हुई है.
इस बीच पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने मल्होत्रा की जमानत याचिका खारिज कर दी, यह कहते हुए कि मामला “संवेदनशील” है और उन पर भारत की “सार्वभौमिकता और सुरक्षा को खतरे में डालने” जैसे गंभीर आरोप हैं.
मल्होत्रा के वकील रविंदर सिंह ढुल ने पुलिस के आरोपों को “हास्यास्पद” बताया. उनका कहना है कि इस मामले में शुरुआत से ही अधिकार क्षेत्र (जूरिस्डिक्शन) की कमी है.
मल्होत्रा के पिता ने भी सावधानी से सहमति जताई. उन्होंने कहा, “मुझे समझ नहीं आता कि उसे जमानत क्यों नहीं मिली. जिन फोटो और वीडियो का पुलिस दावा कर रही है, वे लगभग हर पर्यटक इन जगहों पर बनाता है.”
उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “कोई भी अधिकारी इस मामले की सच्चाई सुनने को तैयार नहीं है, क्योंकि पाकिस्तान का एंगल होने की वजह से वे उसके प्रति नरम नहीं दिखना चाहते.”

मल्होत्रा को पिछले साल मई में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों (PIOs) से कथित संपर्क के मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिसमें एक संवेदनशील जगह की फोटो और वीडियो शेयर करना शामिल था. उनका मामला उन कई मामलों में से एक था, जो ऑपरेशन सिंदूर के बाद उत्तरी राज्यों में पुलिस द्वारा दर्ज किए गए थे, जिसमें पाकिस्तानी नागरिकों के साथ गोपनीय और संवेदनशील जानकारी साझा करने के आरोप लगे थे. भारत ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी, पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर चलाया था.
हिसार जिला पुलिस ने मल्होत्रा को OSA, 1923 के सख्त प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था, जब उन्होंने कथित तौर पर नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के एक कर्मचारी के साथ अपने संपर्क और संबंध की बात कबूल की थी. उस कर्मचारी, मोहम्मद एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश को बाद में विदेश मंत्रालय ने ‘persona non grata’ घोषित कर देश से निकाल दिया था.
5 सुनवाई, सप्लीमेंट्री चार्जशीट का इंतजार
मल्होत्रा, जो ‘Travel with Jo’ नाम का यूट्यूब चैनल चलाती थीं, उनके खिलाफ कार्रवाई तब शुरू हुई जब पंजाब पुलिस ने हरियाणा पुलिस को उनके पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों से कथित गहरे संबंध की जानकारी दी. इसके बाद हिसार पुलिस की क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (CIA) टीम ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया, जहां उन्होंने कथित तौर पर पाकिस्तानी नागरिकों, जिसमें नई दिल्ली स्थित उच्चायोग का कर्मचारी भी शामिल था, के साथ अपने संबंधों की जानकारी दी.
जांच के दौरान हिसार पुलिस ने मल्होत्रा के डिजिटल डिवाइस, जैसे लैपटॉप और मोबाइल फोन—जब्त किए, ताकि फॉरेंसिक जांच की जा सके और PIOs के साथ शेयर की गई फाइलों की जांच हो सके.
इनमें से कुछ वीडियो हिमाचल प्रदेश के पंडोह डैम के थे. इस मामले में पुलिस ने डैम का प्रबंधन करने वाले भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) से जानकारी मांगी. BBMB ने जवाब में कहा, “पंडोह डैम BSL प्रोजेक्ट का एक रणनीतिक स्थल है और गृह मंत्रालय के निर्देश के अनुसार ‘कैटेगरी B’ की महत्वपूर्ण स्थापना में आता है. इसके प्रतिबंधित क्षेत्रों की वीडियोग्राफी ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 के तहत सख्त रूप से प्रतिबंधित है.”
BBMB ने यह भी कहा कि “ऐसी संवेदनशील जगहों की बिना अनुमति रिकॉर्डिंग सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है.”
वीडियो में दिखाए गए स्थान की “संवेदनशीलता” और OSA के उल्लंघन को लेकर BBMB का यही जवाब मल्होत्रा के खिलाफ केस का एक मुख्य आधार है.

जांच अधिकारी ने हाई कोर्ट को बताया, “23.07.2025 को BBMB चंडीगढ़ के डायरेक्टर सिक्योरिटी का एक गोपनीय पत्र आया, जिसमें बताया गया कि पंडोह डैम एक महत्वपूर्ण स्थापना है और इसके प्रतिबंधित क्षेत्रों की वीडियोग्राफी OSA, 1923 के तहत मना है. इस जवाब से पता चला कि ज्योति रानी ने OSA का उल्लंघन किया.”
दूसरी ओर, ढुल ने हाई कोर्ट में दलील दी कि यह कोई “प्रतिबंधित क्षेत्र” नहीं है और पंडोह डैम की ज्यादातर जानकारी और फोटो पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध हैं, क्योंकि इन्हें संबंधित विभाग की वेबसाइट पर डाला गया है.
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पिछले शनिवार को मल्होत्रा की ज़मानत याचिका खारिज कर दी. कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसे सबूत हैं जो हरियाणा पुलिस के इस दावे का समर्थन करते हैं कि वह देश विरोधी गतिविधियों में शामिल थीं और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों को गोपनीय जानकारी दे रही थीं.
ढुल ने कोर्ट में कहा कि हरियाणा पुलिस के पास OSA लगाने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है और न ही वह इस कानून के तहत शिकायत दर्ज करने की सही प्राधिकृत एजेंसी है. इसलिए उन्होंने कहा कि उनका मुवक्किल अब हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा.
ढुल ने दिप्रिंट से कहा, “OSA की धारा 13 के तहत एफआईआर की वैधता को लेकर हमारी दलील पर हाई कोर्ट ने विचार नहीं किया. मुवक्किल के निर्देश पर हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे.”
उन्होंने आगे कहा, “देश में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई फैसले हैं, जिनमें कहा गया है कि OSA के तहत शिकायत दर्ज करने का अधिकार गृह मंत्रालय या उसके द्वारा अधिकृत अधिकारी को ही है.”
दूसरी तरफ, हिसार की ट्रायल कोर्ट ने अभी तक मल्होत्रा के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर विचार नहीं किया है. उन पर OSA, 1923 की धाराओं के तहत जासूसी और विदेशी एजेंटों से गैरकानूनी संपर्क के आरोप हैं, साथ ही भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 152 के तहत भी मामला दर्ज है, जो भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने से जुड़े अपराधों से संबंधित है.
‘2023 में पहली मुलाकात से लेकर आबादी की जानकारी साझा करने तक’
हिसार पुलिस ने हाई कोर्ट को बताया कि मल्होत्रा ने कबूल किया कि वह 2023 में दानिश से मिली थीं, जब वह पाकिस्तान का वीज़ा लेने के लिए हाई कमीशन गई थीं.
पुलिस ने कोर्ट में आगे आरोप लगाया कि दोनों ने नंबर एक्सचेंज किए और लगातार संपर्क में रहे, इसके बाद मल्होत्रा ने पाकिस्तान की दो यात्राएं कीं. वहां उनकी मुलाकात दानिश के एक जानकार अली अध्यन से हुई.
हरियाणा पुलिस ने हाई कोर्ट में मल्होत्रा की जमानत याचिका पर अपने जवाब में कहा, “अपने वहां रहने के दौरान अली अध्यन ने उनकी मुलाकात पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारियों और इटालियन अधिकारियों से भी करवाई, जहां उनकी मुलाकात शाकिर और राना शहबाज़ से हुई. उन्होंने शाकिर का मोबाइल नंबर लिया और उसे अपने फोन में ‘At Rachawa’ नाम से सेव किया ताकि शक न हो.”
हरियाणा पुलिस के जांच अधिकारी ने आगे आरोप लगाया कि “वह ऊपर बताए गए सभी लोगों के साथ व्हाट्सऐप, स्नैपचैट और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लगातार संपर्क में थीं और देश विरोधी जानकारी का आदान-प्रदान कर रही थीं.”
“ज्योति रानी की पूछताछ में पता चला कि एहसान-उर-रहीम पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के ऑपरेटिव्स के संपर्क में था”
उन्होंने यह भी कहा कि रहीम को पाकिस्तान के लिए जासूसी के आरोप में विदेश मंत्रालय ने देश से बाहर निकाल दिया था.
उनके खुलासे और जासूसी के आरोप में दानिश को विदेश मंत्रालय द्वारा निकाले जाने के बाद हरियाणा पुलिस ने FIR दर्ज की, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया. जांच के दौरान पता चला कि मल्होत्रा कई पाकिस्तानी नंबरों से व्हाट्सऐप कॉल और मैसेज के जरिए संपर्क में थीं, जिनमें से कई चैट बाद में डिलीट कर दी गई थीं.
इसके अलावा हरियाणा पुलिस के अधिकारी ने हाई कोर्ट को बताया कि मल्होत्रा ने पाकिस्तान का वीजा सीधे दानिश के जरिए लिया, न कि उन धार्मिक संगठनों के जरिए जिनके साथ जाने का उन्होंने दावा किया था.
हरियाणा पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया, “उनके खुलासों से पता चलता है कि पाकिस्तान यात्रा के दौरान उन्हें खुफिया एजेंसियों से जुड़े लोगों द्वारा खास रहने की सुविधा और इंटरनेट हॉटस्पॉट दिया गया. उन्होंने माना कि ज्यादा फॉलोअर्स और पैसों के लालच ने उन्हें इन संबंधों को मजबूत करने और गुप्त जानकारी साझा करने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने लाहौर में निजी तौर पर ऐसे लोगों से मुलाकात की और भारत में अपनी गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी साझा की. ऊपर बताए गए सभी तथ्य दिखाते हैं कि आरोपी ज्योति रानी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही थीं और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल थीं.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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