नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने वक्फ़ कानून के तहत वक्फ़ संपत्तियों को विशेष दर्जा देने संबंधी कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर बुधवार को केंद्र सरकार से जवाब मांगा।
मुख्य कार्यवाहक न्यायाधीश विपिन सांघी एवं न्यायमूर्ति विपिन चावला ने वरिष्ठ वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से दायर जनहित याचिका पर यह नोटिस जारी किया। अदालत ने साथ ही इस मामले में उपाध्याय से कहा कि वह इस मामले में वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाएं।
उपाध्याय ने अपनी याचिका में अदालत से कहा था कि वक्फ कानून धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है क्योंकि देश में ऐसा और कोई कानून नहीं हैं जो अन्य धर्मों की संपत्तियों पर लागू होता है।
केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल चेतन शर्मा ने कहा कि याचिका में कुछ प्रश्न उठाये गये हैं।
अपनी याचिका में याचिकाकर्ता ने केंद्र को ‘‘न्यास एवं न्यासियों, परमार्थ संगठनों तथा धार्मिक प्रदाय एवं संस्थानों के लिए एक समान कानून’’ बनाने का निर्देश देने का अनुरोध किया है।
उपाध्याय ने दावा किया कि वक्फ की संपत्तियों को ‘ऐसा कोई विशेषाधिकार’ नहीं मिल सकता जो गैर-इस्लामिक धार्मिक संगठनों द्वारा संचालित न्यासों एवं परमार्थ संगठनों को नहीं दिया गया है।
इस मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।
भाषा राजकुमार ब्रजेन्द्र मनीषा
मनीषा
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
