scorecardresearch
Monday, 1 September, 2025
होमदेशउत्तराखंड में जीईपी सूचकांक की शुरूआत

उत्तराखंड में जीईपी सूचकांक की शुरूआत

Text Size:

देहरादून, 19 जुलाई (भाषा) विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने के लिए उत्तराखंड सरकार ने शुक्रवार को सकल पर्यावरण उत्पाद सूचकांक (जीईपी इन्डेक्स) की शुरुआत की जो जल, वायु, जंगल और जमीन की गुणवत्ता जैसे मानकों पर आधारित होगा ।

यहां एक कार्यक्रम में जीईपी सूचकांक की शुरुआत करने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज का दिन उत्तराखंड के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में उत्तराखंड ऐसा पहला राज्य बन गया है कि जहां जीईपी सूचकांक की शुरुआत की गयी है।

उन्होंने कहा, ‘‘आज जल, जंगल, जमीन और वायु जैसे हमारे ऐसे सभी कारकों का सूचकांक जारी हुआ है, जो पर्यावरण को संरक्षित करते हैं। हमारा राज्य देश और दुनिया को पर्यावरण के क्षेत्र में एक दिशा देने का काम करता है और जीईपी सूचकांक की शुरुआत भी हमारे यहां सबसे पहले हुई है।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास की दौड़ के साथ व्यक्ति पर्यावरण संरक्षण किस प्रकार कर रहा है, यह उसका सूचकांक है। उन्होंने कहा, ‘‘यानी हम अगर विकास के लिए बहुत से पेड़ों को काट रहे हैं तो उसके एवज में हम कितने पौधे लगा रहे हैं? हम पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था में किस प्रकार का सामंजस्य स्थापित कर रहे हैं, किस प्रकार के विकास के मॉडल को हम अपना रहे हैं? (यह उसका द्योतक है)।’’

पिछले डेढ़ दशक से जीईपी को लागू करने की वकालत कर रहे गैर सरकारी संगठन ‘हैस्को’ के संस्थापक पद्मभूषण डॉ अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि यह सूचकांक प्रदेश के पर्यावरणीय स्वास्थ्य का संकेतक है जो भविष्य की दिशा तय करेगा।

उन्होंने बताया कि विभिन्न विकासपरक योजनाओं तथा औद्योगिक प्रक्रियाओं का सकल रूप से पर्यावरणीय कारकों जैसे जल, जंगल, जमीन और वायु की गुणवत्ता पर असर पड़ता है।

पर्यावरणविद ने कहा कि अगर ये कारक बेहतर हो रहे हैं तो जीईपी सूचकांक में वृद्धि देखने को मिलेगी और ‘‘हम कह सकते हैं कि हमारा तंत्र पर्यावरण के अनुकूल है और विकास गतिविधियों के बावजूद स्थिर है।’’

उन्होंने कहा कि इसके विपरीत इन कारकों में गिरावट आने पर जीईपी सूचकांक नीचे आ जाएगा जो मानव के लिए चेतावनी होगी।

डॉ जोशी ने कहा कि 2021-22 में जीईपी सूचकांक 0.9 प्रतिशत था। उन्होंने कहा कि जीईपी सूचकांक को तीन से पांच प्रतिशत रखे जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है ।

वर्ष 2010-11 में राज्य सरकार ने प्रदेश की 65 प्रतिशत भूमि पर फैले जंगलों द्वारा देश और दुनिया को दी जा रही पर्यावरणीय सेवाओं के एवज में ‘ग्रीन बोनस’ दिये जाने की परिकल्पना पेश की थी। इसके बाद, डॉ जोशी की याचिका पर उच्च न्यायालय ने जीईपी शुरू करने का निर्देश दिया था।

इसी निर्देश पर राज्य सरकार ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में पर्यावरण सेवाओं के मूल्य और पर्यावरण को हुए नुकसान के अंतर को शामिल कर जीईपी की परिभाषा अधिसूचित की।

भाषा दीप्ति राजकुमार

राजकुमार

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments