बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और तेलंगाना के सीएम केसीआर | कॉमन्स
Text Size:

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके तेलंगाना समकक्षी के चंद्रशेखर राव, जिन्हें केसीआर भी कहा जाता है- देश में सिर्फ दो ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने कोविड-19 वैक्सीन का अभी तक पहला डोज़ भी नहीं लिया है.

दिप्रिंट ने देश के सभी 30 मुख्यमंत्रियों की वैक्सीन स्टेटस का विश्लेषण किया और पाया कि इन दो के अलावा हर सीएम- दो कोविड-19 वैक्सीन्स- भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और एस्ट्राज़ेनेका की कोविशील्ड का कम से कम एक डोज़ ले चुका है.

सबसे आखिर में पहली खुराक लेने वाले थे त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब.

त्रिपुरा के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के डायरेक्टर, सिद्धार्थ जायसवाल ने दिप्रिंट से कहा, ‘माननीय सीएम ने कोविशील्ड का पहला डोज़ दो दिन पहले लिया है. उन्हें कोविड-19 हो गया था और प्रोटोकोल के मुताबिक टीका लगवाने से पहले उन्होंने इंतज़ार किया’.

उनसे पहले टीका लगवाने वाले आखिरी सीएम थे, उत्तराखंड के तीरथ सिंह रावत जिन्होंने इसे 6 मई को लगवाया.

अच्छी पत्रकारिता मायने रखती है, संकटकाल में तो और भी अधिक

दिप्रिंट आपके लिए ले कर आता है कहानियां जो आपको पढ़नी चाहिए, वो भी वहां से जहां वे हो रही हैं

हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.

अभी सब्सक्राइब करें


यह भी पढ़ें: कोविड-19 की उत्पत्ति का 90 दिनों में पता लगाएं खुफिया एजेंसियां: जो बाइडन


पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री

पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी पहली मुख्यमंत्री थीं, जिन्होंने सभी के लिए मुफ्त कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम घोषित किया था और अभी 20 मई को ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर 20 लाख खुराकों की मांग की थी ताकि प्राथमिकता क्षेत्रों में सभी राज्य कर्मचारी कवर हो जाएं.

लेकिन मुख्यमंत्री ने खुद टीका नहीं लगवाया है.

पहले उन्होंने वैक्सीन्स की सुरक्षा और असर को लेकर आशंका व्यक्त की थी.

11 जनवरी को प्रधानमंत्री के साथ एक मीटिंग में मुख्यमंत्री ने कहा था कि ‘दोनों टीकों की सुरक्षा और असर की पुष्टि करने से पहले पर्याप्त वैज्ञानिक राय लेनी चाहिए’. उन्होंने ये स्पष्टीकरण भी मांगा था कि ‘क्या टीका लगने के बाद इसके कुछ साइड-इफेक्ट्स हो सकते हैं’.

देश में टीकाकरण कार्यक्रम शुरू हुए पांच महीने हो गए हैं और बनर्जी ने अभी तक संकेत नहीं दिया है कि वो टीका लगवाएंगी या नहीं. पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग में एक सूत्र ने कहा कि उनके टीका लगवाने की योजना की ‘पुष्टि नहीं की जा सकती’.

इस बीच, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, राज्य की 10.6 प्रतिशत आबादी को टीके की पहली खुराक दी जा चुकी है, जबकि 4.2 प्रतिशत का टीकाकरण पूरा हो चुका है.

स्वास्थ्य सेवा निदेशक अजय चक्रबर्ती ने दिप्रिंट से कहा, ‘वैक्सीन को लेकर राज्य में कोई हिचकिचाहट नहीं है, हमारे पास इसकी भारी किल्लत है’. उन्होंने आगे कहा, ‘दोनों ही आयु वर्गों के लिए वैक्सीन्स अपर्याप्त हैं. हमने वैक्सीन के 15 लाख डोज़ के लिए भुगतान कर दिया है लेकिन हमें केवल 10 लाख मिली हैं, जो हमारे लिए काफी नहीं है.’

चक्रबर्ती ने आगे कहा, ‘अगर हमारे पास पर्याप्त वैक्सीन्स उपलब्ध हों, तो हम हर रोज़ 4.75 लाख टीके लगाने में सक्षम हैं.’


यह भी पढ़ें: बिहार में ब्लैक फंगस की दवा की कोई कमी नहीं लेकिन इसका कारण एक पुरानी विफलता से जुड़ा है


विपक्षी भाजपा ने की तेलंगाना सीएम की आलोचना

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव 19 अप्रैल को टेस्ट में कोविड-19 पॉज़िटिव पाए गए थे और उसके बाद वो ठीक हो गए हैं. लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय में सूत्रों ने बताया कि उससे पहले उन्होंने टीका नहीं लगवाया था.

उन्होंने टीका क्यों नहीं लगवाया था और क्या भविष्य में उनकी लगवाने की योजना है, इन सवालों का कोई जवाब नहीं मिल पाया.

लेकिन विपक्षी बीजेपी ने कई मौकों पर वैक्सीन लगवाने के प्रति उत्साह न दिखाने के लिए केसीआर की आलोचना की है.

केसीआर ने टीकाकरण कार्यक्रम शुरू नहीं किया, जब इसे जनवरी में देशभर में लॉन्च किया गया, जिसके चलते विपक्ष ने उन्हें आड़े हाथों लिया.

बीजेपी प्रवक्ता के कृष्णा सागर राव ने उस समय कहा, ‘सूबे के चुने हुए मुखिया होने के नाते सीएम केसीआर ने न तो निजी तौर पर राज्य में टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया और न ही राज्य के लोगों को सार्वजनिक रूप से कोई संदेश दिया कि इस ऐतिहासिक टीकाकरण कार्यक्रम में हिस्सा लें’.

अप्रैल में बीजेपी प्रदेश प्रमुख बंदी संजय कुमार ने जानना चाहा कि केसीआर ने अभी तक टीका क्यों नहीं लगवाया था लेकिन उन्हें जवाब में सिर्फ खामोशी मिली. उस समय उन्होंने कहा था, ‘कोविड-19 के प्रकोप को नियंत्रित करने में टीकाकरण की एक अहम भूमिका होती है और केसीआर शासन इसे लेकर गंभीर नहीं है. पहले तो सीएम और अन्य नेताओं को बताना चाहिए कि उन्होंने वैक्सीन के डोज़ लिए हैं या नहीं’.

लेकिन केसीआर ने वैक्सीन सप्लाई के बारे में केंद्र सरकार को लिखा और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को सुझाव दिए हैं कि प्राथमिकता के आधार पर किन लोगों को वैक्सीन दी जानी चाहिए.

राज्य स्वास्थ विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि तेलंगाना की 12 प्रतिशत आबादी को पहली खुराक मिल गई है जबकि केवल 3 प्रतिशत ने दूसरी खुराक ली है.

आंकड़ों से ये भी पता चलता है कि केंद्र सरकार ने राज्य को वैक्सीन के 5,40,190 डोज़ उपलब्ध कराए हैं, जिनमें 4,70,240 कोविशील्ड के हैं और बाकी 78,332 कोवैक्सीन के हैं.

राज्य ने भी 4,90,590 डोज़ ख़रीदे हैं जिनमें 3,90,010 डोज़ कोविशील्ड के हैं और 1,00,580 कोवैक्सीन के हैं.

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: 80 km की यात्रा, वैक्सीन पर हिचक और जर्जर ढांचे से जूझना- बिहार के गांव में कैसे बीतता है डॉक्टर का दिन 


 

अच्छी पत्रकारिता मायने रखती है, संकटकाल में तो और भी अधिक

क्यों न्यूज़ मीडिया संकट में है और कैसे आप इसे संभाल सकते हैं

आप ये इसलिए पढ़ रहे हैं क्योंकि आप अच्छी, समझदार और निष्पक्ष पत्रकारिता की कद्र करते हैं. इस विश्वास के लिए हमारा शुक्रिया.

आप ये भी जानते हैं कि न्यूज़ मीडिया के सामने एक अभूतपूर्व संकट आ खड़ा हुआ है. आप मीडिया में भारी सैलेरी कट और छटनी की खबरों से भी वाकिफ होंगे. मीडिया के चरमराने के पीछे कई कारण हैं. पर एक बड़ा कारण ये है कि अच्छे पाठक बढ़िया पत्रकारिता की ठीक कीमत नहीं समझ रहे हैं.

हमारे न्यूज़ रूम में योग्य रिपोर्टरों की कमी नहीं है. देश की एक सबसे अच्छी एडिटिंग और फैक्ट चैकिंग टीम हमारे पास है, साथ ही नामचीन न्यूज़ फोटोग्राफर और वीडियो पत्रकारों की टीम है. हमारी कोशिश है कि हम भारत के सबसे उम्दा न्यूज़ प्लेटफॉर्म बनाएं. हम इस कोशिश में पुरज़ोर लगे हैं.

दिप्रिंट अच्छे पत्रकारों में विश्वास करता है. उनकी मेहनत का सही वेतन देता है. और आपने देखा होगा कि हम अपने पत्रकारों को कहानी तक पहुंचाने में जितना बन पड़े खर्च करने से नहीं हिचकते. इस सब पर बड़ा खर्च आता है. हमारे लिए इस अच्छी क्वॉलिटी की पत्रकारिता को जारी रखने का एक ही ज़रिया है– आप जैसे प्रबुद्ध पाठक इसे पढ़ने के लिए थोड़ा सा दिल खोलें और मामूली सा बटुआ भी.

अगर आपको लगता है कि एक निष्पक्ष, स्वतंत्र, साहसी और सवाल पूछती पत्रकारिता के लिए हम आपके सहयोग के हकदार हैं तो नीचे दिए गए लिंक को क्लिक करें. आपका प्यार दिप्रिंट के भविष्य को तय करेगा.

शेखर गुप्ता

संस्थापक और एडिटर-इन-चीफ

अभी सब्सक्राइब करें

VIEW COMMENTS