Friday, 27 May, 2022
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लैंसेट स्टडी- 55% गंभीर कोविड रोगियों में दो साल बाद भी कम से कम एक लक्षण मौजूद

चीनी संस्थानों के शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में 1,192 प्रतिभागियों पर कोविड से उबरने के 6 महीने, 12 महीने और 2 साल के बाद के हाल का अध्ययन किया गया. यह कोविड पर अब तक की सबसे लंबी फॉलोअप स्टडी है.

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नई दिल्ली: गंभीर संक्रमण के बाद अस्पताल में भर्ती कराए गए कोविड मरीजों पर अब तक की सबसे लंबी फॉलोअप स्टडी में पता चला है कि उनमें से करीब 55 फीसदी में अभी भी कम से कम एक लक्षण बरकरार है. द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन में गुरुवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन मरीजों में थकान, सांस की तकलीफ या नींद आने में समस्या जैसे कोई न कोई लक्षण बने हुए हैं.

इसके तहत चीन में 1,192 प्रतिभागियों पर ठीक होने के छह महीने, 12 महीने और दो साल बाद नजर आने वाले लक्षणों पर अध्ययन किया गया, जो महामारी के पहले चरण (7 जनवरी से 29 मई, 2020) के दौरान सार्स-कोव-2 से संक्रमित हुए थे. बीजिंग में यह अध्ययन चीन-जापान मैत्री अस्पताल, सिंघुआ यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन और चाइनीज एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया.

अध्ययन के दौरान अस्पताल में भर्ती रहे कोविड-19 मरीजों के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक असर और लंबे समय तक कोविड से पीड़ित रहने का असर, दोनों का विश्लेषण किया गया.

विश्लेषण से पता चला कि यद्यपि ठीक हो चुके कोविड-19 मरीजों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में तो आम तौर पर समय के साथ सुधार हो गया लेकिन सामान्य आबादी की तुलना में उनका स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता खराब है.

कोविड-19 के दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों पर अभी तक कोई खास जानकारी उपलब्ध नहीं रही है, क्योंकि अब तक सबसे लंबी फॉलोअप स्टडी  की अवधि एक साल ही रही थी.

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शोध के मुख्य लेखक और चीन-जापान मैत्री अस्पताल के बिन काओ ने गुरुवार को एक बयान में कहा, ‘हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद कोविड-19 से उबरे मरीजों के एक बड़े हिस्से के लिए शुरुआती संक्रमण खत्म होने के बाद भी पूरी तरह ठीक होने में दो साल से ज्यादा का समय लग सकता है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘कोविड-19 से उबरे लोगों, खासकर दीर्घकालिक कोविड लक्षणों वाले, पर फॉलोअप स्टडी इस बीमारी के दीर्घकालिक असर को समझने के लिए आवश्यक है, क्योंकि इससे बीमारी से उबारने के लिए रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम बनाने की दिशा में और खोज की जा सकेगी.’

काओ ने कहा, ‘कोविड-19 पीड़ितों के एक बड़े हिस्से को स्पष्ट तौर पर निरंतर सहायता की आवश्यकता होती है, और यह समझना भी जरूरी है कि टीके, उपचार और वायरस के वैरिएंट दीर्घकालिक स्वास्थ्य नतीजों को कैसे प्रभावित करते हैं.’


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जीवन पहले जैसा सामान्य नहीं रहा

शोधकर्ताओं ने 1,192 प्रतिभागियों के स्वास्थ्य का विश्लेषण किया, जिनका चीन के वुहान स्थित जिन यिन-टैन अस्पताल में गंभीर कोविड-19 के लिए इलाज किया गया था.

आकलन में छह मिनट का वाकिंग टेस्ट, लैब टेस्ट और लक्षणों संबंधी प्रश्नावली, मानसिक स्वास्थ्य, जीवन की स्वास्थ्य संबंधी गुणवत्ता, क्या उन्होंने फिर से काम पर जाना शुरू कर दिया है और अस्पताल से निकलने के बाद उपयोग की जाने वाली स्वास्थ्य सेवाएं शामिल थीं.

जीवन गुणवत्ता, व्यायाम क्षमता, मानसिक स्वास्थ्य और चिकित्सकीय देखभाल की जरूरत आदि के संदर्भ में दीर्घकालिक कोविड के नकारात्मक प्रभावों को लंबे समय तक कोविड लक्षणों या इसके बिना वाले प्रतिभागियों की तुलना के आधार पर निर्धारित किया गया. दो साल में स्वास्थ्य पर असर का निर्धारण सामान्य आबादी—जिसे कोविड-19 संक्रमण नहीं हुआ था—के लोगों के समूहों के साथ उम्र, लिंग और कोमोर्बिडिटी के स्तर पर तुलना के आधार किया गया.

शुरू में बीमारी के छह महीने बाद 68 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कम से कम एक दीर्घकालिक कोविड लक्षण की सूचना दी. संक्रमण के दो वर्ष बाद लक्षणों की रिपोर्ट गिरकर 55 फीसदी पर आ गई. थकान या मांसपेशियों में कमजोरी सबसे अधिक बार रिपोर्ट किए जाने वाले लक्षण थे और छह महीने में यह आंकड़ा 52 प्रतिशत से गिरकर दो साल में 30 प्रतिशत पर आ गया.

अपनी बीमारी के दौरान शुरुआत में स्थिति गंभीर रही हो या नहीं, लेकिन 89 प्रतिशत प्रतिभागी दो वर्षों में अपने कामकाज के ढर्रे पर लौट आए थे.

अध्ययन में पाया गया कि शुरुआती बीमारी के दो साल बाद कोविड-19 के मरीजों में आम तौर पर सामान्य आबादी की तुलना में स्वास्थ्य कुछ खराब पाया गया, जिसमें 31 प्रतिशत ने थकान या मांसपेशियों में कमजोरी और 31 प्रतिशत ने नींद आने में दिक्कत होने की बात कही.

कोविड-19 पीड़ित न होने वाले प्रतिभागियों में इन लक्षणों की रिपोर्ट करने वालों का अनुपात क्रमशः पांच प्रतिशत और 14 प्रतिशत था.

कोविड-19 मरीजों द्वारा जोड़ों के दर्द, धड़कन, चक्कर आना और सिरदर्द सहित जैसे लक्षणों की रिपोर्ट किए जाने की संभावना थी. कोविड-19 मरीजों ने गैर-कोविड-19 प्रतिभागियों की तुलना में अधिक बार दर्द या बेचैनी और चिंता या अवसाद की शिकायत की. 35 प्रतिशत ने दर्द या बेचैनी होने की बात कही और 19 प्रतिशत ने चिंता या अवसाद के बारे में बताया.

लगभग आधे प्रतिभागियों में दो साल बाद भी दीर्घकालिक कोविड के लक्षण पाए गए, और उन्होंने बिना कोविड वाले लोगों की तुलना में जीवन पहले जैसा न रहने की बात कही.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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