Friday, 27 May, 2022
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भारत समेत 40 देशों में ओमीक्रॉन के नए वैरिएंट BA.2 की दस्तक, इंदौर में मिले इसके 21 मामले

सब-वैरिएंट बीए.2 दुनिया के भारत समेत 40 देशों में फैल चुका है और कहा जा रहा है कि ये वैरिएंट बहुत तेजी से दुनिया के बाकी देशों में भी फैल सकता है.

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नई दिल्ली: दुनियाभर में कोरोना मामलों में एक बार फिर से बढ़ोतरी होती दिखाई दे रही है और इसको कोरोना की तीसरी लहर बताया जा रहा है. वही ओमीक्रॉन भी आपने पैर धीरे-धीरे पसार रहा है. ऐसे में ओमीक्रॉन का ‘सब-वैरिएंट’ ‘बीए.2’ सामने आया है. इस सब-वैरिएंट के अभी तक 530 सैंपल्स मिल चुके हैं.

ये नया सब-वैरिएंट बीए.2 दुनिया के भारत समेत 40 देशों में फैल चुका है और कहा जा रहा है कि ये वैरिएंट बहुत तेजी से दुनिया के बाकी देशों में भी फैल सकता है. भारत में इंदौर में इसके 21 मामले सामने आ चुके है.

यूके स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी ने इसके बढ़ते मामलों को देखते हुए जांच के बाद इसका नाम बीए.2 रखा है.

आईएनएसएसीओजी का दावा

कोविड-19 के जीनोम अनुक्रमण का विश्लेषण करने के लिए सरकार द्वारा गठित समूह इंडियन सरस-कोव-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम (आईएनएसएसीओजी) ने यह भी कहा कि ओमीक्रॉन के संक्रामक सब-वैरिएंट बीए.2 की देश के कुछ हिस्सों में मौजूदगी मिली है. इसी बीच इंदौर में इसके 21 मामले मिले सामने आ चुके है.

समूह ने 10 जनवरी के अपने बुलेटिन में कहा था कि अब तक सामने आए ओमीक्रॉन के अधिकतर मामलों में या तो रोगी में संक्रमण के लक्षण दिखाई नहीं दिये या फिर हल्के लक्षण नजर आए हैं.

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रविवार को ही जारी समूह के तीन जनवरी के बुलेटिन में कहा गया है कि ओमीक्रॉन अब भारत में सामुदायिक प्रसार के स्तर पर है और यह दिल्ली एवं मुंबई में हावी हो गया है, जहां नए मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.

बुलेटिन में कहा गया है, ‘भारत में ओमीक्रॉन का प्रसार अब विदेशी यात्रियों के माध्यम से नहीं बल्कि देश के भीतर ही होने की आशंका है. संक्रमण के प्रसार के बदलते परिदृश्य के मद्देनजर आईएनएसएसीओजी में नमूना एकत्र करने और अनुक्रमण रणनीति में संशोधन पर काम किया जा रहा है.’

बच्चे भी ‘बीए.2’ के चपेट में 

इंदौर में पिछले 18 दिन के दौरान कोरोनावायरस के ओमीक्रॉन स्वरूप के ‘बीए.2’ के 21 मामले मिले हैं. इस सब-वैरिएंट से संक्रमित मरीजों में छह बच्चे शामिल हैं.

शहर के ‘श्री अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज’ (सैम्स) के संस्थापक अध्यक्ष विनोद भंडारी का कहना है की ओमीक्रॉन स्वरूप के ‘बीए.2’ सब-वैरिएंट के 21 मामलों में से छह मरीजों के फेफड़ों पर एक प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक असर देखने को मिला है.

उन्होंने बताया कि इन 21 मरीजों में से तीन अस्पताल में भर्ती हैं जबकि 18 अन्य को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दी जा चुकी है. उन्होंने यह भी बताया कि इन 21 मरीजों में शामिल 15 वयस्क कोविड-19 रोधी टीके की दोनों खुराकें पहले ही ले चुके थे.

‘ओमीक्रॉन और बीए.2 एक हैं ‘

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ओमीक्रॉन को ‘वैरिएंट ऑफ कंसर्न’ बताया है. बताया जा रहा है कि इसका सब-वैरिएंट बीए.2 भी इसी तरह का है. मतलब इन दोनों के बीच खास अंतर नहीं है. हालांकि, वैज्ञानिक ये निर्धारित करने के लिए इस पर कड़ी नजर रख रहे हैं ताकि ये भविष्य में एक महामारी का रूप न ले.


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