Monday, 27 June, 2022
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पाकिस्तानी पुलिस ने ‘खूनी भीड़’ के सामने आरोपी को जाने दिया, अब इमरान खान ने कहा लिंचिंग के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’

सत्तारूढ़ पार्टी पीटीआई की सूचना सचिव रिजवाना गजानफर ने ट्वीट किया कि अगर सियालकोट मामले की ठीक से जांच की जाती तो ऐसी घटना दोबारा नहीं होती.

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नई दिल्ली: शनिवार को पाकिस्तान में खानेवाल इलाके में भीड़ ने एक शख्स की पत्थरों से पीट-पीट कर हत्या कर दी. उस पर आरोप था कि उसने कुरान के कुछ पन्नों को जला दिया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक पीड़ित शख्स मानसिक रूप से बीमार और विकलांग था.

रिपोर्ट्स में कहा गया है कि स्थानीय पुलिस ने आरोपी को खुद को बचाने के लिए मियां चुन्नू थाने से बाहर जाने दिया जहां भीड़ उसका इंतजार कर रही थी. वहां से भीड़ पीड़ित को घसीट कर दूसरी जगह ले गई फिर उसे एक पेड़ से बांधकर उस पर ईंट-पत्थरों से हमला किया. इससे उसकी मौत हो गई.

प्रधानमंत्री इमरान खान ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि पाकिस्तान में मॉब लिंचिंग के लिए ‘जीरो सहिष्णुता’ है. उन्होंने पुलिस के खिलाफ कार्रवाई के भी आदेश दिए हैं.

पुलिस ने इस मामले में अभी तक 102 लोगों को हिरासत में ले लिया है जिनमें से 21 मुख्य संदिग्ध माने जा रहे हैं.

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पाकिस्तान में इस घटना को लेकर चौतरफा आलोचना हो रही है और वहां की मीडिया ने इसे कानून व्यवस्था की विफलता बताया है.

सोमवार को, पाकिस्तानी समाचार वेबसाइट द न्यूज इंटरनेशनल ने कहा: ‘सियालकोट घटना के 10 हफ्ते बाद: खानेवाल में 85 लोग एक शख्स की हत्या के लिए गिरफ्तार’

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अपनी 12 फरवरी की रिपोर्ट में आरोप लगाया कि जब भीड़ पीड़ित को प्रताड़ित कर रही थी तो पुलिस ‘मूक दर्शक’ के रूप में खड़ी थी. रिपोर्ट में कहा गया, ‘शख्स को पास की जगह पर घसीटा गया, प्रताड़ित किया गया और मार डाला गया, जबकि पुलिस कथित तौर पर मूक दर्शक बनकर खड़ी रही.’

रिपोर्ट में आगे लिखा गया है कि ‘नागरिकों के जज, जूरी और जल्लाद बनने की यह पहली घटना नहीं है.’

13 फरवरी को पाकिस्तान टुडे ने अपने संपादकीय में लिंचिंग को कानून-व्यवस्था और न्याय व्यवस्था की विफलता बताया. संपादकीय में पुलिस और सरकार पर सवाल किया गया. इसने सरकार के बारे में आगे लिखा कि ‘जिस तरह से यह तहरीक लब्बैक पाकिस्तान और तहरीक तालिबान पाकिस्तान जैसी चरमपंथी ताकतों को सहला रही है, उससे स्टेट बहुत मददगार नहीं रहा है. इसने सिर्फ यह संकेत दिया है कि चीजों को करने का तरीका उन्हें खुद करना है.’

बोल न्यूज ने घटना को अफसोसजनक बताया. इस मुद्दे पर बात करते हुए इसके एडिटर-इन-चीफ नज़ीर लेगारी ने कहा कि खानेवाल और सियालकोट मामले में स्पेशल कोर्ट बैठनी चाहिए और आरोपियों को जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए.

इसे लेकर लोगों का गुस्सा सोशल मीडिया पर भी निकला. साथ ही विपक्षी पार्टी ने इस मामले को लेकर इमरान सरकार को घेरा.

विपक्ष के नेता शहबाज शरीफ ने घटना की निंदा की और कहा कि समाज में उग्रवाद राष्ट्रीय मुद्दा होना चाहिए.

सत्तारूढ़ पार्टी पीटीआई की सूचना सचिव रिजवाना गजानफर ने ट्वीट किया कि अगर सियालकोट मामले की ठीक से जांच की जाती तो ऐसी घटना दोबारा नहीं होती.

एक यूजर ने लिखा कि धार्मिक कट्टरता ने आज एक शख्स की हत्या की है, कल हमें भी मारा जाएगा.

सरकारी प्रतिनिधियों ने भी इस घटना की निंदा की है. वहां की मानवाधिकार मंत्री शिरीन मजारी ने लिखा कि दोषियों को सजा मिलनी चाहिए.

सूचना मंत्री, फवाद चौधरी ने ट्वीट किया कि ‘मैंने हमारी शिक्षा प्रणाली में विनाशकारी उग्रवाद के बारे में कई बार बात की है. सियालकोट और मियां चन्नू जैसी घटनाएं दशकों से शिक्षा प्रणाली को लागू करने का परिणाम हैं. यह मसला कानून को लागू करने का भी है और समाज में पदावनति का भी है. अगर इन तीनों की मरम्मत नहीं की गई तो तबाही के लिए तैयार रहना चाहिए.’

बता दें कि शनिवार को फैसलाबाद में भी कुछ ऐसा ही मामला सामने आया था लेकिन पुलिस उस शख्स को भीड़ से बचाने में कामयाब रही थी.

इससे पहले भी 3 दिसंबर 2021 को सियालकोट में एक श्रीलंकाई नागरिक प्रियंता कुमारा को ईशनिंदा का आरोप लगाते हुए भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला था और उसके शव को जला दिया था. कुमारा ने कथित तौर पर कट्टरपंथी तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान के कथित क़ुरान की आयतें लिखा हुआ एक पोस्टर फाड़कर उसे कूड़ेदान में फेंक दिया था.

इसी तरह पिछले साल नवंबर में खैबर पख्तूनख्वा के चारसद्दा जिले में जब पुलिस ने भीड़ को कुरान का अपमान करने के आरोपी को उसे सौंपने से इनकार कर दिया तो हमलावरों ने थाने को जला दिया था.

साल 2010 में भी इसी तरह की घटना सियालकोट में हुई थी जब दो भाइयों को डकैत समझकर पुलिस की मौजूदगी में भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला था.

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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