गुरुग्राम: एक स्विगी इंस्टामार्ट की जैकेट. तेज़ चीखें और एक काली स्कॉर्पियो, जो रुकी नहीं. यही सब रविवार रात के बारे में राजीव तावड़ को याद है, जब उनके साथी टिंकू पवार को गुरुग्राम के हयातपुर, सेक्टर 93 में इंस्टामार्ट डार्क स्टोर के बाहर बार-बार कुचला गया.
रात के 10:30 बजे थे. दोनों बेंच पर बैठे थे और मोबाइल स्क्रीन पर अगला ऑर्डर आने का इंतज़ार कर रहे थे.
24 साल के तावड़ ने कहा, “उसी पल मुझे लगा कि हमारी ज़िंदगी की कोई कीमत नहीं है. हम सिर्फ डिलीवरी बॉय हैं—ऐसे लोग जिन्हें कोई भी मार सकता है, कुचल सकता है और चला जा सकता है.”
टिंकू जब घायल हालत में सड़क पर पड़े थे, तब राजीव ने इलाके के दूसरे डिलीवरी वर्कर्स को फोन किया. पुलिस को बुलाया गया और टिंकू को अस्पताल ले जाया गया. उनके पैरों और पीठ में कई फ्रैक्चर हैं और फिलहाल उनका इलाज रेवाड़ी के एक अस्पताल में चल रहा है.
घटना का सीसीटीवी वीडियो जल्द ही सोशल मीडिया पर फैल गया, जिससे लोगों में गुस्सा फैल गया. वीडियो में एक काली स्कॉर्पियो खड़ी मोटरसाइकिलों को टक्कर मारती दिखती है. कुछ ही पल बाद, जब एक आदमी आगे आता है, तो एसयूवी पीछे जाती है और उसे कई बार कुचलती है. घटना के गवाह डिलीवरी वर्कर्स ने बताया कि गुस्से में भरा ड्राइवर कार पार्क कर अपने घर में चला गया, जो उस जगह से करीब 50 मीटर दूर था जहां टिंकू पड़े थे. जब पुलिस रात में पहुंची तो आरोपी ने गेट खोलने से मना कर दिया. अगली सुबह उसे जांच के लिए हिरासत में लिया गया.
पुलिस ने कहा कि आरोपी यादव कथित तौर पर संकरी गली में डिलीवरी बाइक्स की पार्किंग को लेकर गुस्सा था. वहीं डिलीवरी वर्कर्स ने कहा कि उनके पास यही एकमात्र जगह थी.

लेकिन यह विवाद सिर्फ बाइकों की पार्किंग को लेकर नहीं था. यह इस सवाल से जुड़ा था कि इस मोहल्ले में कौन रहने का हकदार है? यह रुतबे और ताकत की लड़ाई थी—ज़मीन के मालिक अंदरूनी लोग और हाशिये पर खड़े बाहरी लोग. चारों ओर ऊंची इमारतों और द्वारका एक्सप्रेसवे से घिरे हयातपुर के ये तथाकथित ग्रामीण इलाके नाम के ही गांव हैं. यहां के लोग डीएलएफ जैसे इलाकों की तरह शहर की ज़िंदगी जीना चाहते हैं, जहां रहने वालों और काम करने वालों के बीच साफ फर्क होता है.
हयातपुर की यह घटना विकास से जुड़ने और समुदाय के हितों को बचाने के बीच के पुराने टकराव को दिखाती है, जहां एक डार्क स्टोर आर्थिक तरक्की का संकेत है, वहीं यह पुराने जीवन-तरीकों के लिए खतरा भी बनता है.
इस सोच में डिलीवरी वर्कर्स को बाहरी दखल के तौर पर देखा जाता है, जो उस बंद माहौल को बिगाड़ते हैं जिसे लोग बनाए रखना चाहते हैं. रविवार रात जो हुआ, वह भारत की नई वर्ग लड़ाई की एक और मिसाल है.
यह हमला एक बार फिर डार्क स्टोर्स, जिन्हें मिनी-वेयरहाउस भी कहा जाता है, में काम करने वाले डिलीवरी वर्कर्स की खराब कामकाज़ी हालत को सामने लाता है. ये सेंटर सिर्फ 10 मिनट में ऑनलाइन डिलीवरी के लिए बनाए गए हैं.
सोमवार को डिलीवरी वर्कर्स ने काम बंद कर दिया और सेक्टर-93 थाने के बाहर जमा होकर कार्रवाई की मांग की.
तावड़ ने कहा, “हमने तब तक प्रदर्शन किया जब तक पुलिस ने कार्रवाई का भरोसा नहीं दिया.” आरोपी की पहचान आयुर्वेदिक डॉक्टर नवीन यादव के रूप में हुई और उसे उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया.
एक बार फिर यह हमला डार्क स्टोर्स में काम करने वाले डिलीवरी वर्कर्स की खराब हालत को उजागर करता है. ये सेंटर सिर्फ 10 मिनट की डिलीवरी के लिए बनाए जाते हैं.
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 109(1) (हत्या के प्रयास) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “हयातपुर में जो हुआ, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. किसी को मारने की कोशिश का कोई बहाना नहीं हो सकता. अगर कोई समस्या थी, तो किसी को गाड़ी से कुचलना उसका समाधान नहीं था. यह जान लेने की जानबूझकर की गई कोशिश थी.”
10 मिनट की डिलीवरी और दूसरे दबाव
छह महीने पहले दर्शन चौहान और टिंकू पवार को उनके पुराने इंस्टामार्ट डार्क स्टोर से हटाकर हयातपुर गांव में खुले नए आउटलेट में भेजा गया था. मैनेजमेंट ने दोनों सीनियर कर्मचारियों पर भरोसा किया कि वे काम शुरू कराएं, नए लोगों को ट्रेनिंग दें और टीम की रफ्तार तय करें.
चौहान ने कहा, “टिंकू और मुझे जगह को चालू करने के लिए चुना गया था. हमें नए कर्मचारियों को ऐप चलाना सिखाना था, डिलीवरी की रफ्तार बनाए रखनी थी और रोज़मर्रा का काम संभालना था. इसके लिए हमें एक्स्ट्रा पैसा नहीं मिला, लेकिन जिम्मेदारी बड़ी थी.”
लेकिन एक हफ्ते के भीतर ही दिक्कतें शुरू हो गईं. डिलीवरी वर्कर्स ने बताया कि भगत सिंह कॉलोनी का एक निवासी रोज उनसे बाइक हटाने को कहता था. डार्क स्टोर उसी कॉलोनी में था और जल्द ही लोग उस छोटे टिन-शेड वाले टॉयलेट को इस्तेमाल करने पर भी सवाल उठाने लगे, जो कॉलोनी के अंदर ही कर्मचारियों के लिए तय था. इसके बाद धमकियां मिलने लगीं.
वर्कर्स ने कहा कि कॉलोनी के लोग स्टोर पर आकर उन्हें यहां से चले जाने को कहते थे. चौहान ने दो घटनाएं याद कीं, जब लोगों ने उन पर बीयर की बोतलें भी फेंकी थीं.
उन्होंने कहा, “वे हमें प्रदूषक कहते थे.”
चौहान ने कहा कि यह उनके हाथ में नहीं था. उन्होंने जगह नहीं चुनी थी और वे सिर्फ अपना काम कर रहे थे.
उन्होंने कहा, “हम बाइक्स स्टोर के आसपास ही खड़ी करते थे. यहां 30 से ज्यादा 10 मिनट डिलीवरी वर्कर्स हैं. वे कुछ मिनट के लिए आते हैं, पैकेट उठाते हैं और चले जाते हैं. उस थोड़े समय के लिए वे स्टोर के बाहर या दीवार के साथ बाइक खड़ी करते हैं, अगर जगह न हो.”
यहां तक कि टॉयलेट भी, जो बहुत छोटा, गंदा और खराब हालत में है, कॉलोनी के अंदर वेयरहाउस से जुड़ा हुआ है.

दर्शन ने बेंच पर बैठते हुए कहा, “हमें पता है कि टॉयलेट की हालत खराब है, लेकिन वह हमारे इस्तेमाल के लिए तय है. क्या हम उसे भी इस्तेमाल नहीं कर सकते? इससे कॉलोनी को क्या दिक्कत है?”
वेयरहाउस के बाहर तीन-चार बेंच रखी हैं, जहां कर्मचारी अगला ऑर्डर आने तक बैठते हैं. उन्होंने कहा कि वे हमेशा दबाव में रहते हैं और परिवार का फोन उठाने तक का वक्त नहीं मिलता.
दर्शन ने कहा, “अगर ऑर्डर लेट हो जाए तो ग्राहक डांटते हैं. मैनेजमेंट ऑर्डर को लेकर डांटता है और अब यह सब. हम बहुत परेशान हैं.”
डिलीवरी कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने दो महीने पहले ही सीनियर्स को इस समस्या के बारे में बताया था. उन्हें भरोसा दिया गया कि समाधान निकलेगा और हालात सुधरेंगे.
तावड़ ने कहा, “इस वजह से हमारी डिलीवरी लेट हो रही थी. एक डिलीवरी लेट होने पर 350 रुपये का नुकसान होता है.” वह दो महीने पहले ही इस काम में जुड़े थे.
लेकिन सीनियर्स सिर्फ आश्वासन देते रहे, जब तक कि एसयूवी मालिक ने पवार पर हमला नहीं कर दिया.
दर्शन ने गुस्से में कहा, “हमें बताया गया कि इस पर बात चल रही है. एक बार उन्होंने कहा कि बाइक्स सामने की दुकानों के बाहर खड़ी कर दें, लेकिन हमने कहा कि इससे ऑर्डर और लेट होंगे.”
अंदरूनी व्यक्ति का बचाव
हयातपुर की भगत सिंह कॉलोनी बस चार-पांच घरों का छोटा-सा ग्रुप है, लेकिन यहां रहने वाले लोगों के लिए यह उनकी अपनी छोटी-सी दुनिया है. दो-तीन मंज़िला, कांच की दीवारों वाले घरों के बाहर एसयूवी गाड़ियां खड़ी रहती हैं. अब यही मोहल्ला आरोपी नवीन यादव के बचाव में एकजुट है.
मोहल्ले की रहने वाली सोनल ने कहा कि यादव अपने एक दोस्त के यहां से लौट रहा था, जहां उसने बीयर पी थी. घर लौटने पर जब उसने देखा कि डिलीवरी की बाइक्स इधर-उधर खड़ी हैं और उसकी एसयूवी का रास्ता रोक रही हैं, तो उसका गुस्सा भड़क गया.
40 साल की ज्योति ने कहा, “पीकर आने के बाद उसने फिर बाइक्स देखीं.” ज्योति के ससुर सर्दी की धूप में बाहर बैठे थे, पास में हुक्का रखा था. उन्होंने कहा, “इन डिलीवरी वालों की वजह से उसे गुस्सा आ गया, क्योंकि ये हमारी सड़कें रोक देते हैं. घर से बाहर आना-जाना मुश्किल हो गया है.”
यहां के लोगों के लिए डिलीवरी बॉय एक शांत मोहल्ले में बाहरी लोग हैं. यह एक छोटी सी गली है, जहां मांएं घर के अंदर से ही अपने बच्चों पर नज़र रख सकती थीं, जब वे सड़क पर खेलते थे.
एक आदमी सर्दी की धूप में घर के बाहर कुर्सियां लगाकर बैठा था; वहीं पास खड़े दोस्त हुक्के का कश ले रहे थे.
मोहल्ले वालों का कहना है कि डिलीवरी वर्कर्स उनके बच्चों पर बुरा असर डाल रहे हैं. चार साल के बच्चे की मां ज्योति ने कहा कि उनका बेटा फोन पर बात करते डिलीवरी वालों को देखकर गाली-गलौज के शब्द सीखने लगा है.
उन्होंने कहा, “वे लगातार चिल्लाते रहते हैं और गालियां देते हैं और मेरा बच्चा वही सीख रहा है. वे हमेशा यहीं सड़कों पर रहते हैं. डार्क स्टोर से जुड़े टॉयलेट के पास से गुज़रना भी मुश्किल है. वह बहुत गंदा है और उसकी बदबू हमारे घरों तक आ रही है.”
इन दिनों मोहल्ले के पुरुषों का एक ही मकसद है—नवीन को ज़मानत पर बाहर निकालना. वे रोज़ पुलिस थाने और वकीलों के पास जाकर रास्ता निकालने की बात कर रहे हैं. उनके लिए यादव ने जो किया, वह गलत नहीं था, बल्कि महीनों से जमा गुस्से और झुंझलाहट का नतीजा था.
ज्योति ने कहा, “सब लोग सिर्फ नतीजा देख रहे हैं. यह क्यों हुआ, कोई नहीं देख रहा.”
घटना के बाद डिलीवरी कर्मचारियों ने टॉयलेट का इस्तेमाल बंद कर दिया है. अब उनकी बाइक्स गली में नहीं, बल्कि डार्क स्टोर के बाहर एक साथ खड़ी की जा रही हैं. अवनीश ने कहा कि अगर यह अपमान बंद नहीं हुआ, तो वे सब नौकरी छोड़ देंगे.
वह बेंच पर बैठकर आसमान की ओर देखते हुए बोले, “मैं उत्तर प्रदेश से यह अपमान झेलने नहीं आया था. मैं काम करने और अपने परिवार के लिए पैसे कमाने आया था, लेकिन इन बड़े शहरों में हमारा काम और हमारी मौजूदगी किसी को दिखती ही नहीं.”
तभी उनके फोन पर तेज़ बीप की आवाज़ आई और बातचीत रुक गई. वे फुर्ती से उठे, दोपहिया वाहनों के झुंड में से अपनी बाइक निकाली और तेज़ी से निकल गए.
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