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Wednesday, 8 April, 2026
होमफीचरनए कोर्स, अपनी डिग्री, हॉस्टल—NCERT ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ बनने की तैयारी कैसे कर रहा है

नए कोर्स, अपनी डिग्री, हॉस्टल—NCERT ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ बनने की तैयारी कैसे कर रहा है

NCERT अधिकारियों ने कहा कि मौजूदा कोर्स भी बेहतर किए जाएंगे, लेकिन ज्यादातर पहले जैसे ही रहेंगे, जबकि नए मास्टर्स और डॉक्टरेट प्रोग्राम अतिरिक्त तौर पर शुरू किए जाएंगे.

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी में नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) मुख्यालय में निर्माण कार्य चल रहा है और अलग-अलग कैंपस में योजनाएं बनाई जा रही हैं. यह सब शिक्षा मंत्रालय द्वारा इस स्वायत्त संस्था को ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ का दर्जा देने के बाद हो रहा है. संस्था एक ऐसे बदलाव की तैयारी कर रही है, जो भारत की शिक्षा व्यवस्था में उसकी भूमिका को काफी बदल सकता है.

30 मार्च को मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन में कहा गया, “यूजीसी एक्ट, 1956 की धारा 3 के तहत मिली शक्तियों का उपयोग करते हुए, शिक्षा मंत्रालय, यूजीसी की सलाह पर, NCERT को एक अलग श्रेणी में डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी घोषित करता है.”

“अलग श्रेणी” NCERT की खास राष्ट्रीय भूमिका को मान्यता देती है.

इस नए दर्जे के साथ अधिकारी बताते हैं कि संस्था अपने खुद के अकादमिक प्रोग्राम शुरू करने की दिशा में काम कर रही है, जिसमें स्पेशल मास्टर्स कोर्स और आगे चलकर डॉक्टरेट प्रोग्राम शामिल होंगे. साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया जा रहा है और नई प्रशासनिक व्यवस्था बनाई जा रही है. यह बदलाव NCERT की उस पुरानी पहचान से अलग है, जिसमें वह केवल पाठ्यक्रम और किताबें तैयार करने वाली संस्था थी, अब वह डिग्री देने वाली संस्था भी बनेगी.

NCERT के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “पहले हम दूसरी यूनिवर्सिटी से जुड़े कोर्स के जरिए डिग्री देते थे, लेकिन अब हम अपनी खुद की डिग्री दे सकेंगे. हमारे रीजनल सेंटर में पहले से इंटीग्रेटेड टीचर-ट्रेनिंग कोर्स हैं. अब हमें उन यूनिवर्सिटी पर निर्भर नहीं रहना होगा और हम छात्रों को NCERT की अपनी डिग्री दे पाएंगे.”

NCERT ने पहले ‘इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल इम्पॉर्टेंस’ का दर्जा मांगा था, जिससे उसे आईआईटी और आईआईएससी की तरह डिग्री देने का अधिकार मिलता, लेकिन जब यह नहीं मिला, तो उसने ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा मांगा.

नए कोर्स

अकादमिक और प्रशासनिक ढांचा तैयार किए जाने के साथ-साथ NCERT अपने नए दर्जे की व्यावहारिक जरूरतों की तैयारी भी कर रहा है. सिर्फ दिल्ली ही नहीं, रीजनल सेंटर में भी ज्यादा छात्रों के आने की संभावना को देखते हुए इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया जा रहा है.

अधिकारी ने कहा, “अभी हम मुख्य रूप से स्कूल शिक्षा के लिए काम करते हैं, ताकि अच्छा कोर्स, किताबें और शिक्षक प्रशिक्षण दिया जा सके. अब जब हम उच्च शिक्षा में जा रहे हैं, तो हम हर सेंटर में यूजीसी के नियमों के अनुसार अपना इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रहे हैं.” इसमें लड़कों और लड़कियों के हॉस्टल बनाना, क्लासरूम और लैब बढ़ाना, 1000 सीटों वाला ऑडिटोरियम और नए प्रशासनिक भवन बनाना शामिल है.

पढ़ाई के स्तर पर ध्यान NCERT की मुख्य विशेषज्ञता—स्कूल शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षा नीति, पर ही रखा जा रहा है. जिन नए प्रोग्राम पर विचार हो रहा है, उनमें दो साल के मास्टर्स कोर्स शामिल हैं—मास्टर्स इन करिकुलम डेवलपमेंट एंड इवैल्यूएशन, मास्टर्स इन एजुकेशन टेक्नोलॉजी, मास्टर्स इन मल्टीलिंगुअल एजुकेशन, मास्टर्स इन एजुकेशन असेसमेंट एंड साइकोमेट्रिक्स, और मास्टर्स इन स्कूल गवर्नेंस एंड लीडरशिप.

अधिकारी ने कहा, “संभव है कि इनमें से कुछ प्रोग्राम में दाखिला आने वाले अकादमिक सत्र से मुख्यालय में शुरू हो जाए.” आगे चलकर डॉक्टरेट प्रोग्राम शुरू करने की भी योजना है, लेकिन छात्रों की संख्या और फैकल्टी से जुड़ी जानकारी अभी तय नहीं हुई है.

अधिकारियों ने कहा कि मौजूदा कोर्स को भी बेहतर किया जाएगा, लेकिन वे ज्यादातर पहले जैसे ही रहेंगे, जबकि नए मास्टर्स और डॉक्टरेट प्रोग्राम अतिरिक्त रूप में शुरू किए जाएंगे. NCERT के प्रकाशन विभाग के प्रमुख प्रोफेसर एमवी श्रीनिवासन इस बदलाव के लिए नोडल अधिकारी बताए जा रहे हैं.

इस बदलाव के लिए NCERT के अंदर प्रशासनिक व्यवस्था में भी बदलाव करना होगा. अभी ज्यादातर कमेटियां स्कूल स्तर के कोर्स और शिक्षक प्रशिक्षण के लिए काम करती हैं. नए डीम्ड यूनिवर्सिटी ढांचे के तहत यूजीसी के नियमों के अनुसार नई अकादमिक और प्रशासनिक इकाइयां बनानी होंगी.

अधिकारी ने कहा, “अभी जो कमेटियां हैं, वे स्कूल शिक्षा के लिए हैं और नई कमेटियां बनानी होंगी.” केंद्रीय शिक्षा मंत्री कार्यकारी समिति और जनरल काउंसिल के अध्यक्ष होंगे, लेकिन पूरी संरचना अभी तैयार की जा रही है. 8 अप्रैल को कर्तव्य भवन में होने वाली कार्यकारी समिति की बैठक, जिसकी अध्यक्षता शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान करेंगे, में आगे की योजना और जरूरी व्यवस्थाओं पर फैसला होने की उम्मीद है.

शर्तें लागू

तेज़ी से विस्तार की योजना के बीच NCERT के अंदर फंडिंग और आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता भी है. नोटिफिकेशन में साफ कहा गया है कि डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने के बाद भी संस्था कोई व्यावसायिक या मुनाफा कमाने वाली गतिविधि नहीं कर सकती.

अधिकारी ने कहा, “हम शिक्षा मंत्रालय से जुड़े हैं और स्कूल शिक्षा के लिए एक शीर्ष संस्था हैं, हमारी ग्रांट वहीं से आती है. लेकिन डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने के बाद अगले तीन साल में हमें अपने खर्च के लिए खुद आय भी बनानी होगी. यह हमारे सामने बड़ी चुनौती है.”

संस्था को साफ तौर पर कहा गया है कि वह अपनी गतिविधियों को व्यावसायिक न बनाए. पहले NCERT की किताबें और ट्रेनिंग प्रोग्राम बहुत कम या नाममात्र की फीस पर होते थे. अब चिंता यह है कि बढ़ते खर्च के बीच संस्था गुणवत्ता और सस्ती शिक्षा का संतुलन कैसे बनाएगी.

अधिकारियों ने यह भी बताया कि शुरुआत में सरकार के अंदर डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा देने को लेकर थोड़ी झिझक थी. अधिकारी ने कहा, “मंत्रालय हमारे डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने को लेकर बहुत उत्सुक नहीं था, क्योंकि यूनिवर्सिटी सीधे यूजीसी के नियंत्रण में होती हैं, न कि सीधे भारत सरकार के.”

आने वाले समय में यह बात तय कर सकती है कि NCERT अपनी नई स्वायत्तता को कैसे संभालेगा.

नए दर्जे से पहले की प्रक्रिया

NCERT का दर्जा बढ़ाने का यह फैसला कई साल की प्रक्रिया के बाद आया. सितंबर 2022 में NCERT ने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) से अलग श्रेणी में ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ का दर्जा मांगा था. अगस्त 2023 में यूजीसी ने लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया, जिसमें शर्तें बताई गईं, जैसे अकादमिक और रिसर्च क्षमता को मजबूत करना और यूजीसी के नियमों के अनुसार काम करना.

अधिकारी ने कहा, “जब लेटर ऑफ इंटेंट मिला, तब हमें यह बताना था कि हम क्या पढ़ाएंगे, कहां पढ़ाएंगे और कैसे पढ़ाएंगे.” NCERT ने नवंबर 2025 में अपनी रिपोर्ट जमा की, जिसे यूजीसी की एक्सपर्ट कमेटी ने मंजूरी दी और इस साल जनवरी में इसे स्वीकृति मिल गई. 30 मार्च 2026 को शिक्षा मंत्रालय के अंतिम नोटिफिकेशन के बाद NCERT को आधिकारिक रूप से डीम्ड यूनिवर्सिटी घोषित कर दिया गया.

नोटिफिकेशन में कहा गया है कि NCERT “रिसर्च प्रोग्राम, डॉक्टरेट और नए अकादमिक प्रोग्राम शुरू करने के लिए ज़रूरी कदम उठाएगा.”

अब NCERT पूरी तरह यूजीसी के नियमों के दायरे में आएगा. संस्था को एनआईआरएफ की राष्ट्रीय रैंकिंग में भाग लेना होगा, NAAC और एनबीए जैसे संस्थानों से मान्यता लेनी होगी और एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (एबीसी) जैसे डिजिटल सिस्टम अपनाने होंगे.

इस नोटिफिकेशन में NCERT और उसकी छह इकाइयां शामिल हैं: अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूर के रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन, शिलांग का नॉर्थ-ईस्ट रीजनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन और भोपाल का पंडित सुंदरलाल शर्मा सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एजुकेशन.

यह घोषणा 11 शर्तों के साथ की गई है, जिनमें यूजीसी के नियमों का पालन, नए अकादमिक क्षेत्रों में विस्तार और किसी भी व्यावसायिक या मुनाफा कमाने वाली गतिविधि पर रोक शामिल है.

अब तक NCERT अपने RIEs के जरिए स्नातक और स्नातकोत्तर शिक्षक प्रशिक्षण कोर्स कराता था, जो पांच राज्यों की स्थानीय यूनिवर्सिटी से जुड़े थे. इनमें भोपाल की बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी, अजमेर की एमडीएस यूनिवर्सिटी, मैसूर यूनिवर्सिटी, भुवनेश्वर की उत्कल यूनिवर्सिटी और शिलांग की नॉर्थ-ईस्टर्न हिल यूनिवर्सिटी शामिल हैं. नए कोर्स शुरू करने के लिए RIEs को पहले संबंधित यूनिवर्सिटी से मंजूरी लेनी होती थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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