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Friday, 6 February, 2026
होमफीचररेस्क्यू के बाद ‘दिव्य डॉग’ भैरव बिजनौर लौटा—भक्ति ने उसे लगभग मार ही डाला था

रेस्क्यू के बाद ‘दिव्य डॉग’ भैरव बिजनौर लौटा—भक्ति ने उसे लगभग मार ही डाला था

नंदपुर मंदिर में भैरव की वापसी के साथ फिर गूंजने लगी है ‘भैरव जी आए हैं’ की आवाज़ें, जिसे गांव वाले मूर्तियों के चारों ओर ईश्वरीय परिक्रमा मान रहे थे, नोएडा के पशु डॉक्टरों ने उसे टिक से होने वाला इन्फेक्शन बताया.

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बिजनौर: डॉग भैरव नंदपुर, बिजनौर लौट आया है और गांव एक बार फिर थम सा गया है. दुबला-पतला, हल्के भूरे रंग का यह डॉग, जिसे गांव में कथित तौर पर भगवान शिव का स्वरूप माना जा रहा है, बुधवार को नोएडा के एक पशु आश्रय गृह से 180 किलोमीटर का सफर पूरा कर गांव लौटा. भीड़ से बचने के लिए उसकी वापसी को गुप्त रखा गया था, लेकिन खबर जल्दी फैल गई. जल्द ही गांव के हर कोने से लोग मंदिर में अपने ‘लौट आए देवता’ के दर्शन के लिए पहुंचने लगे.

उत्तर प्रदेश के इस गांव में भैरव को देखने आई महिलाओं में से एक मुन्नी ने कहा, “हमारे भैरव आ गए, अब होगा जश्न”. कई महिलाएं रंग-बिरंगी साड़ियां और अच्छे कपड़े पहने हुईं थीं, क्योंकि वे एक दावत में जा रही थीं, तभी उन्हें भैरव के आने की खबर मिली.

भव्य योजनाएं पहले ही बनने लगी हैं—हज़ारों लोगों के लिए भंडारा, एक यात्रा और उस कबूतर की समाधि पूरी करना जो कभी भैरव के सिर पर बैठता था. कुछ लोगों ने तो यह भी कहा कि अगर भैरव इस दुनिया से चला जाए, तो उसके लिए भी समाधि बनाई जाए.

बुधवार को भैरव, शांत अवस्था में और मुलायम सफेद कंबल में लिपटा हुआ, एक अनौपचारिक सुरक्षा घेरे के साथ पहुंचा. पशु प्रेमी उसके आसपास पहरा दे रहे थे, लड्डू दूर रखे जा रहे थे और भक्तों की भीड़ से दूरी बनाए रखने को कहा जा रहा था, क्योंकि तनाव में वह काट सकता है. वह टिक से होने वाले संक्रमण के इलाज के बाद ही ठीक हुआ है. डॉक्टरों के मुताबिक, यही संक्रमण हनुमान की मूर्ति के चारों ओर घंटों घूमने की वजह बना—जिसके बाद गांव वालों ने उसकी पूजा शुरू कर दी—साथ ही ज्यादा खिलाने से उसकी आंतों में सूजन भी बढ़ गई थी.

बिजनौर लौटने से पहले नोएडा के पशु आश्रय गृह के बाहर भैरव | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट
बिजनौर लौटने से पहले नोएडा के पशु आश्रय गृह के बाहर भैरव | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट

गांव वालों का प्यार और भक्ति ही उसकी नाजुक सेहत की वजह भी बनी. 11 जनवरी को आठ महीने के इस आवारा कुत्ते को मंदिर में हनुमान की मूर्ति के चारों ओर बार-बार घूमते देखा गया और बाद में शिव और दुर्गा की मूर्तियों के चारों ओर भी. कुछ लोगों ने कहा कि यह क्रम 36 घंटे तक चला, तो कुछ ने 72 घंटे बताया. कुत्ते को दिव्य माना गया और भगवान शिव के श्वान वाले स्वरूप के नाम पर उसका नाम भैरव रख दिया गया. न्यूज चैनलों पर उसकी तथाकथित परिक्रमा के वीडियो बार-बार दिखाए गए. भक्तों ने उसे बताशे, लड्डू, पूरी, गाजर का हलवा, सूजी का हलवा खिलाया. जो कुत्ता कई दिनों से ठीक से खा नहीं पाया था, उसे अचानक बहुत ज्यादा खाना डाल दिया गया.

हनुमान मंदिर में भैरव की एक झलक पाने के लिए भक्तों की भीड़ | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट
हनुमान मंदिर में भैरव की एक झलक पाने के लिए भक्तों की भीड़ | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट

जब उसकी हालत बिगड़ने लगी, तो बिजनौर की पशु कल्याण संस्था ‘प्रेम पथ’ ने दखल दिया और उसे दिल्ली ले गई, जिससे गांव वाले नाराज़ हो गए. वहां किए गए खून के टेस्ट में पता चला कि भैरव को टिक से फैलने वाला बैक्टीरियल संक्रमण—एनाप्लाज्मा—है, जिससे न्यूरोलॉजिकल यानी दिमाग से जुड़े लक्षण भी हो सकते हैं.

भैरव का इलाज करने वाले पशु चिकित्सक शुभम कटियार ने पहले दिप्रिंट को बताया था, “यह बैक्टीरिया दिमाग को प्रभावित कर सकता है और यह कुत्तों में काफी आम है. भक्त उसे गलत चीज़ें खिला रहे थे, वह आखिर कुत्ता ही है! डॉक्टर ने उसे 15 दिन की दवा दी है और उसे तला-भुना और मीठा खाना नहीं दिया जा सकता.”

दिल्ली के डॉक्टरों ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है. अब सवाल यह है कि क्या भैरव बिजनौर में भक्ति के एक नए दौर को झेल पाएगा.

नोएडा के हाउस ऑफ स्ट्रे एनिमल्स के संस्थापक संजय महापात्रा ने कहा, बिजनौर जाते हुए भैरव. ‘वह दिल्ली-एनसीआर से ज्यादा सुरक्षित वहां है’ | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट
नोएडा के हाउस ऑफ स्ट्रे एनिमल्स के संस्थापक संजय महापात्रा ने कहा, बिजनौर जाते हुए भैरव. ‘वह दिल्ली-एनसीआर से ज्यादा सुरक्षित वहां है’ | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट
भैरव की वापसी पर श्रद्धा का एक पल. डॉक्टरों ने कहा कि मूर्ति के चारों ओर घूमना संभवतः टिक से होने वाले बैक्टीरियल संक्रमण की वजह से था | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट
भैरव की वापसी पर श्रद्धा का एक पल. डॉक्टरों ने कहा कि मूर्ति के चारों ओर घूमना संभवतः टिक से होने वाले बैक्टीरियल संक्रमण की वजह से था | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट

अंधेरे में रेस्क्यू

नंदपुर पहुंचने के बाद भैरव का पहला ठिकाना ‘प्रेम पथ’ का कैंपस था, जहां उसे गांव के निवासी अश्विनी सैनी द्वारा गोद लेने की कागज़ी प्रक्रिया पूरी की गई. अश्विनी सैनी फर्स्ट ईयर के कॉलेज स्टूडेंट हैं और मंदिर से करीब 100 मीटर दूर एक कच्चे घर में रहते हैं.

भैरव की बिगड़ती हालत की सूचना सबसे पहले पशु कार्यकर्ताओं को देने वाले सैनी ने कहा, “मैं चाहता था कि वह गांव में ही रहे. मंदिर उसके लिए ठीक जगह नहीं थी. मेरे घर पर, भले ही छोटा हो, वह सुरक्षित रहेगा.”

संजय महापात्रा गोद लेने के कागज़ात देखते हुए. पशु कार्यकर्ता गांव में जाने से पहले यह प्रक्रिया पूरी करना चाहते थे ताकि कोई रुकावट न आए | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट
संजय महापात्रा गोद लेने के कागज़ात देखते हुए. पशु कार्यकर्ता गांव में जाने से पहले यह प्रक्रिया पूरी करना चाहते थे ताकि कोई रुकावट न आए | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट
गोद लेने का दस्तावेज़ | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट
गोद लेने का दस्तावेज़ | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट

पिछले महीने जब कुत्ते ने मूर्ति के चारों ओर घूमना शुरू किया, तो गांव में “भैरव जी आए हैं” के नारे गूंजने लगे. तब तक नंदपुर मंदिर में स्थानीय लोगों के अलावा बहुत कम लोग आते थे, लेकिन अब आसपास के गांवों और जिलों से भक्त उमड़ पड़े. एक पुजारी नियुक्त किया गया. भीड़ नंदपुर बाबा के लिए नहीं, भैरव के लिए आई थी. लोग कतारों में खड़े होकर उस कुत्ते को देखने लगे, जो एक अस्थायी बिस्तर पर लाल रजाई ओढ़े सोता था. लोगों ने उस पर खाना, पैसा और आस्था बरसाई, लेकिन पशु कार्यकर्ताओं ने देखा कि भैरव अचानक सुस्त हो गया था और बहुत कमजोर लग रहा था.

प्रेम पथ के संस्थापक अश्विनी चित्रांश ने कहा, कुत्ते का इलाज कराना बहुत मुश्किल और खतरनाक काम था. शुरू में पुजारी और भक्तों ने इजाज़त नहीं दी, लेकिन बाद में तय हुआ कि मंदिर परिसर में ही भैरव को ड्रिप लगाई जाएगी, ताकि लोग दर्शन कर सकें, लेकिन जब कुत्ते की हालत नहीं सुधरी, तो चित्रांश ने दिल्ली-एनसीआर के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर उसे आधी रात को चुपचाप मंदिर से बाहर निकालने की योजना बनाई और उसकी जगह एक नकली इंतज़ाम छोड़ दिया.

L: जनवरी में नंदपुर में हनुमान की मूर्ति की परिक्रमा करता भैरव, R: सोते हुए कुत्ते के पास पैसे और हलवे की भेंट | एक्स स्क्रीनग्रैब्स
L: जनवरी में नंदपुर में हनुमान की मूर्ति की परिक्रमा करता भैरव, R: सोते हुए कुत्ते के पास पैसे और हलवे की भेंट | एक्स स्क्रीनग्रैब्स

उन्होंने कहा, “भगवान की कृपा से हम उसे वहां से निकाल पाए. वहां रहना उसकी जान के लिए खतरा था और इतनी गुस्साई भीड़ के बीच हमारी जान के लिए भी.”

दिल्ली ले जाते समय साथ गए देखभाल करने वालों के अनुसार, चार घंटे की यात्रा के दौरान भैरव लगातार उल्टी करता रहा. कमजोर, डिहाइड्रेटेड और सिर्फ 14 किलो वजन वाला भैरव 17 जनवरी को पहले ईस्ट ऑफ कैलाश के मैक्स वेट्स ले जाया गया, फिर उसे पशु कार्यकर्ता संजय महापात्रा द्वारा चलाए जा रहे ‘हाउस ऑफ स्ट्रे एनिमल्स’ में शिफ्ट किया गया.

मंदिर का वही कमरा जहां भैरव को ड्रिप दी गई थी | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट
मंदिर का वही कमरा जहां भैरव को ड्रिप दी गई थी | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट

महापात्रा ने बताया, भैरव की देखभाल अब विज्ञान के हवाले थी, लेकिन यहां भी ‘पवित्रता’ का असर उसके साथ रहा. शेल्टर पहुंचने के बाद भैरव ने शुरू में खाना नहीं खाया, लेकिन जब एक कर्मचारी ने हनुमान चालीसा का पाठ किया, तो उसने थोड़ा पनीर खाया. इसके बाद उसके लिए रोज़ यह प्रार्थना चलाई जाने लगी.

ठीक होना आसान नहीं था. शेल्टर में पांचवें दिन, जब देखभाल करने वाले इंजेक्शन के लिए उसे संभालने लगे, तो भैरव सिकुड़ गया और कोई हाथ पास आते ही काटने लगा. चार लोग उसे मज़ल पहनाने की कोशिश कर रहे थे, तभी महापात्रा ने बोलना शुरू किया: “जय हनुमान ज्ञान गुरु…” वह शांत होता दिखा और मज़ल पहनाई जा सकी.

महापात्रा ने कहा, “वह भैरव है, हमारा देवता है, हमारे लिए बहुत अहम है.”

उन्होंने भैरव को वापस बिजनौर भेजने का समर्थन किया, भले ही रेस्क्यू न होता तो वह “मर ही जाता.” वे सुप्रीम कोर्ट में चल रहे आवारा कुत्तों के प्रबंधन से जुड़े मामले के बीच दिल्ली के आवारा कुत्तों के भविष्य को लेकर भी चिंतित हैं.

उन्होंने कहा, “भैरव दिल्ली-एनसीआर से ज्यादा सुरक्षित वहां है.”

बिजनौर में श्रद्धालुओं का एक समूह. कार्यकर्ताओं ने भैरव की वापसी को गुप्त रखने की कोशिश की, लेकिन खबर आग की तरह फैल गई | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट
बिजनौर में श्रद्धालुओं का एक समूह. कार्यकर्ताओं ने भैरव की वापसी को गुप्त रखने की कोशिश की, लेकिन खबर आग की तरह फैल गई | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट

घर वापसी

एक झिझकते हुए भैरव को जल्दी से दर्शन के लिए मंदिर के अंदर ले जाया गया तो उसे देखने के लिए भक्त धक्का-मुक्की करने लगे. भूखा होने के कारण वह फर्श पर बिखरे गेंदे के फूल चबाने लगा. तुरंत एक कटोरा लाया गया और इस बार उसे प्रसाद नहीं, बल्कि पैक किया हुआ डॉग फूड खिलाया गया.

बिजनौर के रहने वाले महेश सैनी जो भैरव की वापसी की खबर सुनते ही बाइक से दौड़े चले आए, उन्होंने कहा, “हम उसका ध्यान रखेंगे, वह हमारा भगवान है. डॉक्टर ने जो कहा है, वही खिलाएंगे.”

मंदिर में युवा श्रद्धालु | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट
मंदिर में युवा श्रद्धालु | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट
नंदपुर गांव में बुधवार की रात आम स्कूल वाली रात नहीं थी | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट
नंदपुर गांव में बुधवार की रात आम स्कूल वाली रात नहीं थी | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट

रात होते ही आसपास की गलियों से लोग मोबाइल फोन की रोशनी में मंदिर की ओर आने लगे. स्थानीय निवासी सुधा देवी ने कहा, “कई महिलाएं अभी रात की रोटियां बना रही हैं, वे थोड़ी देर में आ जाएंगी.” बच्चे टकटकी लगाए देख रहे थे, लेकिन सम्मानजनक दूरी बनाए हुए थे.

उसकी वापसी का इंतज़ार बेचैनी भरा रहा. उसकी गैरमौजूदगी में, भैरव के नाम पर मिले 30,000 रुपये के चंदे से गांव वालों ने भंडारा किया, लेकिन लोगों का कहना था कि उसके बिना सब अधूरा सा लगा. हर दिन दो-तीन गाड़ियां मंदिर तक आतीं और निराश होकर लौट जातीं.

भैरव को भगवान हनुमान के चरणों में उसके नए देखभालकर्ता अश्विनी सैनी ने पैडिग्री डॉग फूड खिलाया | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट
भैरव को भगवान हनुमान के चरणों में उसके नए देखभालकर्ता अश्विनी सैनी ने पैडिग्री डॉग फूड खिलाया | फोटो: मनीषा मोंडल/दिप्रिंट

भैरव वहां न होने पर भी, गांव वाले उसकी दी हुई “बरकतों” की बातें करते रहे. एक “चमत्कार”, उनके मुताबिक, मंदिर के लिए नया प्रवेश द्वार बनना था.

स्थानीय निवासी संजीब लाल ने कहा, “पिछले दो साल से हम मंदिर परिसर में गेट बनवाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वहां रहने वाला एक मुस्लिम परिवार इसकी इजाज़त नहीं दे रहा था. भैरव के आने और श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के बाद उस परिवार ने गेट लगाने की अनुमति दे दी.”

लेकिन थोड़ी चिंता भी थी. टिक से होने वाले संक्रमण की दवा ले रहे भैरव को जब हनुमान की मूर्ति के पास ले जाया गया, तो उसने उसके चारों ओर चक्कर नहीं लगाए. गांव के बुज़ुर्गों ने शंकित लोगों से धैर्य रखने को कहा और भरोसा दिलाया कि यह बस समय की बात है.

नरेंद्र कुमार ने कहा, “भैरव अभी थोड़ा उलझन में है. जब भगवान को समझ आ जाएगा कि वह घर आ गया है, तो वह फिर से चक्कर लगाने लगेगा.”

(इस ग्राउंड रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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