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Wednesday, 24 July, 2024
होमचुनाव'युवाओं को नौकरी नहीं, बुजुर्गों को दे रहे पेंशन'- तेलंगाना के युवा वोटरों को क्यों है KCR से शिकायत

‘युवाओं को नौकरी नहीं, बुजुर्गों को दे रहे पेंशन’- तेलंगाना के युवा वोटरों को क्यों है KCR से शिकायत

तेलंगाना में सरकारी नौकरी के इच्छुक उम्मीदवार व्यवस्थागत सुधार चाहते हैं, इसके अलावा तेलंगाना राज्य लोक सेवा आयोग (टीएसपीएससी) से जुड़ी अधिक देरी और पेपर लीक का खात्मा भी चाहते हैं.

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हैदराबाद/वारंगल : 21 वर्षीय शिवा प्रसाद, भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के प्रमुख के.चंद्रशेखर राव के उस वादे से सख्त नाराज़ हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर तेलंगाना के मतदाता उन्हें लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बनाते हैं, तो  मासिक वृद्धावस्था पेंशन को 2,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दिया जाएगा.

वारंगल में काकतीय विश्वविद्यालय में एमबीए प्रथम वर्ष के छात्र शिवा पूछते हैं, “युवाओं को नौकरी देने से इनकार करने वाले ये मुख्यमंत्री हमारे बुजुर्गों के लिए पेंशन बढ़ाना चाहते हैं. जब परिवार में एक शिक्षित युवा को अच्छी तनख्वाह के साथ अच्छी सरकारी नौकरी मिल जाए तो ऐसी खैरात की जरूरत किसे होती है?”

शिवा उन लाखों सरकारी नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों में से एक हैं जो केसीआर के दो कार्यकालों से परेशान हैं, उन्होंने मुख्यमंत्री पर “भर्ती नोटिफिकेंशंस में अत्यधिक देरी” और “परीक्षा पेपर लीक करने समेत लगातार विफलताओं” से निपटने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है.

शिवा के सहपाठी साई ए, केसीआर सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए कहते हैं, इन योजनाओं का मकसद हाशिए पर रहने वाले समुदायों के किसानों को रियायती कीमतों पर भेड़ और भैंसों को बांटना है. “मुख्यमंत्री अपने भाषणों में कभी भी हम शिक्षित युवाओं, हमारी आकांक्षाओं के बारे में बात नहीं करते. वह शायद सोचते हैं कि हम केवल गोरलू, बारलू के लिए ही अच्छे हैं.”

शिवा दक्षिण-पूर्व तेलंगाना के नलगोंडा में पहली बार के मतदाता हैं, जबकि साई, नागार्जुन सागर में दूसरी बार मतदान करेंगे. दोनों का कहना है कि वे मौजूदा सरकार के खिलाफ वोट करने के लिए तैयार हैं क्योंकि “बीआरएस शासन में सरकारी नौकरी पाना असंभव प्रतीत होता है.”

35 वर्ष से कम आयु के मतदाता, जिस आयु वर्ग में सरकारी नौकरी के इच्छुक और उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र शामिल हैं, राज्य के लगभग एक तिहाई, 3.2 करोड़ की बड़ी संख्या वाले मतदाता हैं.

काकतीय विश्वविद्यालय से 140 किमी दूर हैदराबाद की ओसमानिया यूनिवर्सिटी है. एक दशक से भी पहले, ये दोनों विश्वविद्यालय तेलंगाना को राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन के केंद्र में थे.

आंदोलन में हिस्सा लेने वाले शिक्षित युवाओं को अलग राज्य में बेहतर नौकरी के अवसरों की उम्मीद थी. यह भावना इस अनुभव से उपजी है कि बेहतर वेतन वाली नौकरियों को आंध्र पक्ष के उनके समकक्षों द्वारा हथिया लिया जा रहा है (जब दोनों राज्य संयुक्त आंध्र प्रदेश का हिस्सा थे).

34 वर्षीय एन. नारायण, सरकारी टीचिंग की नौकरी हासिल करने की उम्मीद में मास्टर ऑफ एजुकेशन (एम.एड.) करने के लिए उस्मानिया विश्वविद्यालय में वापस आ गए हैं. उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रावास में उनका और बाकी छात्रों का आवास आज भी उसी जर्जर स्थिति में है, जिस हालत में वे तेलंगाना के गठन से पहले थे. अचमपेट में एक मतदाता, जो कि पिछड़े मेदारा समुदाय से आते हैं और 11 साल पहले उस्मानिया विश्वविद्यालय में गणित में मास्टर ऑफ साइंस (एमएससी) की पढ़ाई की थी, तब जब राज्य का आंदोलन अपने चरम पर था.

उनके लिए, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से वह इस बार ‘कार’ (बीआरएस चुनाव चिह्न) के खिलाफ मतदान करेंगे.

1930 के दशक में 7वें निज़ाम द्वारा निर्मित प्रतिष्ठित उस्मानिया यूनिवर्सिटी आर्ट्स कॉलेज भवन के सामने सुबह की सैर करते हुए, पश्चिमी तेलंगाना के पारिगी से आने वाले अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय के एमए के छात्र संजय एस. के पास एक वजह तेलंगाना राज्य लोक सेवा आयोग (टीएसपीएससी) परीक्षा का पेपर लीक की है, जिसके कारण सत्ताधारी सरकार को वोट देकर बाहर करना है.


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टीएसपीएससी परीक्षा का पेपर लीक

अशोक नगर में, जो कि उस्मानिया विश्वविद्यालय से ज्यादा दूर नहीं है, भारी निराशा का माहौल है. कोचिंग सेंटरों और सिविल सेवा अभ्यर्थियों की अंतहीन गलियों वाला यह क्षेत्र दिल्ली के मुखर्जी नगर के बराबर है.

ग्रुप-I की नौकरी के इच्छुक 32 वर्षीय युवराज वी. (अनुरोध पर नाम बदल दिया गया है) कहते हैं, ”इसमें कोई संदेह नहीं है, मैं अपना वोट कांग्रेस को दूंगा.” वह उस्मानिया विश्वविद्यालय से गणित में एमएससी (2012-14 बैच) की पढ़ाई के दौरान अलग राज्य के लिए छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाए थे.

युवराज ने दिप्रिंट को बताया, “हमने राज्य के दर्जे के लिए अपना जीवन और करियर दांव पर लगा दिया. लेकिन तेलंगाना के गठन के बाद, केवल एक परिवार – केसीआर का – समृद्ध हुआ, जबकि शिक्षित युवाओं की एक पूरी पीढ़ी, जिनकी आकांक्षाएं तबाह हो गईं.”

उनकी यह नाराजगी टीएसपीएससी के ग्रुप- I पदों के लिए पिछले वर्ष में दो बार प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने से उपजी है.

पिछले अक्टूबर में आयोजित इसकी पहली परीक्षा को इस साल मार्च में रद्द कर दिया गया था क्योंकि पाया गया था कि टीएसपीएससी के कुछ कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक किए गए थे. जून में आयोजित दूसरी परीक्षा, जो सितंबर में तेलंगाना उच्च न्यायालय के आदेश पर रद्द कर दी गई थी, जिसने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया था, जिन्होंने परीक्षाओं के आयोजन में बायोमेट्रिक अटेंडेंस को नजरंदाज किए जाने और ओएमआर शीट से हॉल टिकट नंबरों की गैरमौजूदगी जैसी अनियमितताओं की ओर इशारा किया था.

2014 में तेलंगाना के गठन के बाद ग्रुप-I पदों के लिए परीक्षाओं का यह सेट पहली बार आयोजित किया गया था.

ग्रुप-I प्रीलिम्स के साथ-साथ, टीएसपीएससी ने पेपर लीक के कारण इस साल मार्च में डिविजनल अकाउंट्स ऑफिसर (डीएओ) और असिस्टेंट एग्जिक्यूटिव इंजीनियर्स (एईई) परीक्षाओं को भी रद्द कर दिया था.

युवराज और उनके दोस्तों का आरोप है कि केसीआर ने “प्रबुद्ध तेलंगाना छात्र समुदाय, जिसने आंदोलन (राज्य के दर्जे के लिए) में हिस्सा लिया था, उन्हें सिस्टम से बाहर बनाए रखने को लेकर, डिप्टी एसपी, राजस्व और वाणिज्यिक कर अधिकारियों समेत सरकार में रिक्त पदों को भरने के लिए ग्रुप-I अधिसूचना रोक दी गई थी.”

जब इस अक्टूबर में अशोक नगर के एक निजी छात्रावास में 24 वर्षीय एम. प्रवल्लिका ने आत्महत्या कर ली, तो सैकड़ों अभ्यर्थी आधी रात को स्वत:स्फूर्त विरोध प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतर आए और आरोप लगाया कि विधानसभा चुनावों के कारण समूह-II की प्रारंभिक परीक्षा रद्द होने से उसे इस तरह का कदम उठाना पड़ा.

यहां तक कि विपक्षी कांग्रेस ने बीआरएस पर हमला करते हुए आत्महत्या पर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया और भाजपा ने गहन जांच की मांग की, राज्य पुलिस ने उसकी मौत को एक असफल रिलेशनशिप का नतीजा बताया था.

तेलंगाना के मंत्री केटी रामाराव (केटीआर) ने इस मुद्दे पर राज्य के लोगों को गुमराह करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी नेता राहुल गांधी की आलोचना करते हुए टीवी पर इस दावे का समर्थन किया था कि प्रवल्लिका कभी भी सरकारी नौकरी की इच्छुक नहीं थीं.

राहुल गांधी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कहा था, “यह आत्महत्या नहीं है, यह हत्या है- युवाओं के सपनों, उनकी आशाओं और आकांक्षाओं की.”

यदि कांग्रेस राज्य में सत्ता में आती है, तो गांधी ने “एक (वार्षिक) नौकरी कैलेंडर जारी करने, पहले महीने में यूपीएससी की तर्ज पर टीएसपीएससी को पुनर्गठित करने और पहले वर्ष के भीतर 2 लाख खाली सरकारी पदों को भरने” का वादा किया है.

प्रवल्लिका की आत्महत्या का मुद्दा उठने और बीआरएस सरकार के खिलाफ गुस्सा बढ़ने के कुछ ही दिनों बाद, केटीआर – जो सीएम केसीआर के बेटे भी हैं – ने उसके परिवार से मुलाकात की और उसके भाई को सरकारी नौकरी व परिवार को वित्तीय सहायता की पेशकश की.

सोमवार को, मतदान के दिन से दो सप्ताह से भी कम समय पहले, केटीआर ने अशोक नगर में विभिन्न जिलों से आए सरकारी नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों के एक समूह से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि यदि फिर से चुने जाते हैं, तो बीआरएस एक “नौकरी कैलेंडर” जारी करेगा. मौजूदा भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के साथ-साथ ग्रुप-II पदों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी.

उन्होंने उम्मीदवारों से अपील की, “तथ्य को जानें और कांग्रेस के झूठे प्रचार को खारिज करें.”

केटीआर ने कहा कि संयुक्त आंध्र प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने “प्रति वर्ष केवल 1,000 नौकरियां भरीं, लेकिन हमने इन 9.5 वर्षों में सालाना 16,000 नौकरी के पदों को भरा”. उन्होंने वोटों की गिनती के अगले दिन यानी 4 दिसंबर की सुबह अशोक नगर में उन्हीं अभ्यर्थियों से मिलने का वादा किया, ताकि “सरकारी नौकरी से जुड़े सभी मुद्दों पर गहन चर्चा की जा सके.”

हालांकि, काकतीय विश्वविद्यालय के छात्र प्रभावित नहीं दिखे.

शिवा ने पूछा, “केटीआर अब कहते हैं कि वह टीएसपीएससी को साफ-सुथरा करेंगे, भर्ती प्रणाली में सुधार करेंगे. पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद से वह इन सभी महीनों में क्या कर रहे थे.”

बेरोजगार चुनावी मैदान में

तेलंगाना में गुणवत्तापूर्ण नौकरियों की कमी को लेकर गुस्सा इतना है कि बेरोजगार युवा विरोध स्वरूप राज्य के कुछ हिस्सों में चुनावी मैदान में कूद पड़े हैं.

जबकि एक 32-वर्षीय स्नातक ने दिप्रिंट को बताया कि उसने केसीआर के खिलाफ गजवेल में अपना नामांकन आखिरी क्षण में “उस पर और उसके परिवार पर दबाव के कारण” वापस ले लिया था, कर्णे सिरिशा जैसे कुछ लोग मजबूती से अभी भी जमे हुए हैं.

दक्षिण तेलंगाना की कोल्लापुर सीट से उम्मीदवार, सिरिशा 2 साल पहले पोस्ट की गई एक रील के वायरल होने के बाद बैरलक्का (भैंस वाली लड़की) के रूप में प्रसिद्ध हो गईं. रील में सिरिशा और चार भैंसों को दिखाया गया है, जिसमें दावा किया गया है कि उनके परिवार ने उन्हें आय के स्रोत के रूप में खेती के लिए खरीदा था क्योंकि ‘केसीआर ने सरकारी नौकरियों के लिए कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया था.’

विजिल चुनाव चिन्ह आवंटित होने के बाद, ये स्वतंत्र उम्मीदवार, कुछ युवाओं और पुडुचेरी के पूर्व मंत्री मल्लाडी कृष्ण राव से कथित तौर पर मिली एक लाख रुपये की मदद से प्रचार कर रहे हैं.

(अनुवाद और संपादन : इन्द्रजीत)

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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