जम्मू: महज़ दो महीने पहले तक श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस के कॉरिडोर्स एक नए मेडिकल कॉलेज की रफ्तार पकड़ती ज़िंदगी से भरे हुए थे—स्टूडेंट्स केस स्टडी पर चर्चा कर रहे थे, लैब के दरवाजे खुल-बंद हो रहे थे और पहली बार डायग्नोस्टिक टूल्स के साथ काम करते उत्साहित हाथ दिख रहे थे. अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे वाले इस कैंपस ने देशभर से फैकल्टी को आकर्षित किया था.
आज, यह लगभग पूरी तरह वीरान है.
नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने सितंबर 2025 में जम्मू के इस संस्थान को दी गई लेटर ऑफ परमिशन (एलओपी) अब रद्द कर दी है. क्लास स्थगित कर दी गई हैं और स्टूडेंट्स बिखरने लगे हैं—कई पहले ही घर लौट चुके हैं, जबकि कुछ सामान समेट रहे हैं.
अपने बैचमेट्स के साथ कश्मीर लौटने का प्लान बना रहे कुलगाम के स्टूडेंट साकिब फारूक ने कहा, “हमें बताया गया है कि हमें किसी सरकारी मेडिकल कॉलेज में एडजस्ट किया जाएगा, यह राहत की बात है, लेकिन यहां की सुविधाएं शानदार थीं. यह सिर्फ 50 सीटों वाला नया कॉलेज था—भीड़ नहीं थी, सब कुछ नया था और हम पहले बैच के स्टूडेंट थे. अब नहीं पता कब और कहां अलॉटमेंट होगा और जहां भी जाएंगे, सब कुछ फिर से शुरू करना पड़ेगा.”
यह इंस्टीट्यूट प्राइवेट है, जिसे वैष्णो देवी बोर्ड चलाता है और जो मंदिर में आने वाले चढ़ावे से मिलने वाले दान से चलता है. दाखिले नीट रैंकिंग के बेस पर दिए गए थे, लेकिन अब इस पर आपत्ति है क्योंकि स्टूडेंट्स में ज़्यादातर मुस्लिम हैं.
बारामुल्ला के स्टूडेंट नदीफ ने श्री माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी के धूप से भरे लॉन में खड़े होकर कहा, “फिलहाल सिर्फ क्लास स्थगित की गई हैं और स्टूडेंट्स को जाने के लिए कहा गया है. फैकल्टी या निर्माण कार्य को लेकर अभी कोई आदेश नहीं आया है.”
मई में हुए निरीक्षण के बाद कॉलेज को सितंबर 2025 में एलओपी दी गई थी. इसके वापस लिए जाने के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि सभी 50 एमबीबीएस स्टूडेंट्स को सरकारी मेडिकल कॉलेजों में, संभव हो तो उनके घरों के पास, एडजस्ट किया जाएगा.
सीएम ने कहा, “इन स्टूडेंट्स ने नीट पास किया है और मेरिट के आधार पर दाखिला लिया है. यह हमारी जिम्मेदारी है कि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो. उन्हें उनके घरों के पास सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एडजस्ट किया जाएगा.”
कैंपस की खामोशी चौंकाने वाली है. कभी व्यस्त रहने वाले कॉरिडोर में अब सिर्फ कुछ फैकल्टी सदस्यों और लैब असिस्टेंट्स के कदमों की आवाज़ गूंजती है. दूसरी मंजिल पर निर्माण कार्य जारी है, जहां अगले साल नए बैच के लिए क्लास शुरू होनी थीं. फैसले की घोषणा वाले दिन कई स्टूडेंट्स ने कैंपस छोड़ दिया था, लेकिन कुछ इस उम्मीद में रुके रहे कि फैसला वापस लिया जाएगा.
साकिब ने कहा, “पहले तो हम समझ ही नहीं पाए, हमें लगा फैसला पलट सकता है, लेकिन अब हमारे टीचर्स भी कह रहे हैं कि ऐसा नहीं होगा, इसलिए हम भी जा रहे हैं.”

एनएमसी की अचानक की गई जांच, हिंदू संगठनों के महीनों से चल रहे विरोध के बाद हुई. ये संगठन छात्र प्रवेश में जनसांख्यिकीय संरचना का विरोध कर रहे थे. 50 सीटों में से 44 मुस्लिम छात्रों को मिली थीं. तीन छात्रों के निजी कॉलेजों में चले जाने के बाद मेरिट सूची के अगले तीन उम्मीदवार—जो मुस्लिम ही थे, उनको दाखिला दिया गया, जिससे कुल संख्या 47 हो गई.
संस्थान के एक अधिकारी ने, नाम न छापने की शर्त पर, प्रक्रिया में जल्दबाजी के आरोपों को खारिज किया. उन्होंने कहा, “कॉलेज ने दिसंबर 2024 में एलओपी के लिए आवेदन किया था. मई 2025 में निरीक्षण हुआ और सितंबर में अनुमति मिली. इसमें कुछ भी जल्दबाजी नहीं थी.”
एलओपी वापस लेने के पत्र में एनएमसी ने कई कमियां गिनाईं, जिसमें शिक्षण फैकल्टी में 39 प्रतिशत की कमी और ट्यूटर, डिमॉन्स्ट्रेटर व सीनियर रेजिडेंट्स की 65 प्रतिशत कमी शामिल है. यह भी कहा गया कि संबद्ध अस्पताल में सिर्फ दो ऑपरेशन थिएटर हैं.
हालांकि, दौरे के दौरान दिप्रिंट ने कैंपस में आठ चालू ऑपरेशन थिएटर पाए. अधिकारियों ने निरीक्षण के समय को लेकर भी आपत्ति जताई. एक अन्य अधिकारी ने कहा, “टीम के आने पर लगभग आधी फैकल्टी शीतकालीन अवकाश पर थी. हमें निरीक्षण से सिर्फ 15 मिनट पहले सूचना दी गई थी.”
एनएमसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि लाइब्रेरी में सिर्फ 75 किताबें और हार्ड कॉपी में केवल दो जर्नल हैं और अस्पताल में पुरुष व महिला मरीजों के लिए अलग-अलग वार्ड नहीं हैं. कॉलेज प्रशासन ने इन सभी बिंदुओं को चुनौती दी.
अधिकारी ने कहा, “लाइब्रेरी में सैकड़ों किताबें हैं, 480 फिजिकल जर्नल, 392 राष्ट्रीय ई-जर्नल और करीब 9,900 विदेशी ई-जर्नल हैं. सभी इनडोर मरीजों के लिए अलग-अलग कमरे हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “जिन मुद्दों को चिन्हित किया गया है, वे असंभव नहीं हैं. इन्हें ठीक किया जा सकता था.”
कॉलेज के विरोध की अगुवाई श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति ने की थी, जिसमें आरएसएस समर्थक समूहों, विश्व हिंदू परिषद और बीजेपी समर्थक संगठनों के 60 से अधिक सदस्य शामिल हैं. एलओपी वापस लिए जाने के बाद ऑनलाइन वीडियो में वीएचपी सदस्यों को पटाखे फोड़ते, ढोल बजाते और मिठाइयां बांटते हुए देखा गया.
जम्मू के वीएचपी नेता और प्रमुख आंदोलन आयोजक कार्तिक सूदन ने कहा, “हमने पहले दिन से इस कॉलेज का विरोध किया. यह सनातन भूमि है. कॉलेज वैष्णो देवी मंदिर में हिंदुओं द्वारा चढ़ाए गए दान से बना है. हम कॉलेज में सिर्फ हिंदू चाहते हैं. हमारी आवाज़ दिल्ली तक पहुंची और इसी वजह से एनएमसी ने कार्रवाई की.”
जब स्टूडेंट्स दोबारा से अलॉटमेंट का इंतज़ार कर रहे हैं और फैकल्टी असमंजस में है, तब इस इंस्टीट्यूट और इसके अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे का भविष्य अब भी साफ नहीं है.
एक अधिकारी ने कहा, “श्राइन बोर्ड आगे की कार्रवाई तय करेगा.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
