Sunday, 7 August, 2022
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यूजीसी ने एंट्रेंस एग्जाम में देरी का असर घटाने के लिए पूरी फीस वापस करने का निर्देश दिया

एक दूसरी अधिसूचना में उच्च शिक्षा नियामक यूजीसी ने शैक्षणिक संस्थानों से यह भी कहा है कोविड-19 के दौरान छात्रों से ली गई हॉस्टल/मेस फीस को एडजस्ट करें.

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नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इस हफ्ते सभी शैक्षणिक संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे 31 अक्टूबर से पूर्व स्नातक में प्रवेश संबंधी अपना आवेदन वापस लेने वाले छात्रों की पूरी ट्यूशन फीस वापस करें.

उसी दिन यानी सोमवार को जारी एक दूसरी अधिसूचना में उच्च शिक्षा नियामक ने सभी शैक्षणिक संस्थानों को कोविड-19 महामारी के दौरान छात्रों से ली गई हॉस्टल/मेस फीस को एडजस्ट करने को भी कहा है.

दूसरी अधिसूचना के पीछे उद्देश्य जहां ‘अभिभावकों को उनके समक्ष पेश आ रही वित्तीय कठिनाइयों’ से उबारना है, वहीं पहली अधिसूचना मुख्य तौर पर स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश में देरी को लेकर जताई जा रही चिंताओं को दूर करने के लिए जारी की गई है.

12 जुलाई को यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों से अपनी स्नातक प्रवेश प्रक्रिया की अंतिम तिथियां तय करने को कहा था. आयोग का कहना है, अंतिम तिथि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से 12वीं कक्षा के नतीजे घोषित करने को ध्यान में रखकर तय की जानी चाहिए.

यूजीसी के मुताबिक, इससे छात्रों को आवेदन करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा.

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सीयूईटी (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट), जेईई मेन, जेईई एडवांस आदि समेत कई परीक्षाओं में देरी के कारण स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश अक्टूबर 2022 तक जारी रहने की उम्मीद है.

यूजीसी के ताजा निर्देश का मतलब है कि जो छात्र किसी संस्थान में स्नातक कोर्स में प्रवेश ले चुके हैं. वे संस्थान बदलने या किसी अन्य कारण से इसे अक्टूबर 2022 तक बिना किसी शुल्क के रद्द करवा सकते हैं.


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यूजीसी की अधिसूचना

यूजीसी की तरफ से सोमवार को जारी अधिसूचनाओं में से एक में कहा गया है, ‘अभिभावकों को पेश आ रही वित्तीय कठिनाइयों को दूर करने के उद्देश्य से’ निर्णय लिया गया है कि ‘उच्च शिक्षण संस्थानों को शैक्षणिक सत्र 2022-2023 के लिए 31 अक्टूबर तक किसी भी छात्र के एडमिशन कैंसिलेशन/माइग्रेशन को स्पेशल केस मानते हुए पूरी फीस वापस की जानी चाहिए.

अधिसूचना में कहा गया है, ‘यह स्पष्ट किया जाता है कि 31 अक्टूबर 2022 तक कैंसिलेशन/माइग्रेशन के सभी मामलों में सभी शुल्कों सहित पूरी फीस वापस की जानी चाहिए (यानी, कैंसिलेशन फीस जीरो होनी चाहिए). इसके बाद, 31 दिसंबर 2022 तक एडमिशन कैंसिल/वापस लेने के मामलों में किसी छात्र से ली गई पूरी फीस को प्रोसेसिंग फीस काटकर वापस किया जाए. और यह प्रोसेसिंग फीस 1000 रुपये से अधिक नहीं हो सकती है.’

आयोग ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों से ‘कोविड-19-महामारी से संबंधित फैक्टर के मद्देनजर शुल्क वापसी के संबंध में यूजीसी के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने’ को भी कहा है.

इस बीच, यूजीसी की तरफ से जारी दूसरी अधिसूचना में संस्थानों को कोविड-19 महामारी के दौरान छात्रों की तरफ से भरी गई मेस और हॉस्टल फीस को आगे एडजस्ट करने या फिर लौटाने को कहा गया है.

अधिसूचना के मुताबिक, ‘छात्रों की तरफ से दी जानकारी के मुताबिक ऐसे कई मामले सामने आए हैं कि उन्होंने कोविड-19 महामारी की अवधि के दौरान हॉस्टल और मेस की सेवाओं का इस्तेमाल नहीं किया, फिर भी संस्थान मेस और हॉस्टल फीस का समायोजन/वापसी नहीं कर रहे हैं.’

आयोग ने सभी उच्च शिक्षा संस्थानों से कहा है कि ‘कोविड-19 महामारी अवधि के दौरान छात्रों से वसूली गई मेस और हॉस्टल फीस को आगे एडजस्ट करें.’

(इस ख़बर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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