मुंबई/पुणे: भारतीय जनता युवा मोर्चा, यानी बीजेपी की युवा इकाई के सदस्यों पर आरोप है कि उन्होंने पुणे के एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी में वर्ल्ड कल्चरल फेस्टिवल के दौरान बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व कर रहे एक फूड स्टॉल में तोड़फोड़ की.
यह घटना मंगलवार शाम वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान हुई. अगले दिन उन्होंने कैंपस के बाहर बांग्लादेश का झंडा पेंट किया और उस पर पैर रखा.
यह वार्षिक कार्यक्रम ‘वन वर्ल्ड. मेनी कल्चर्स. वन सेलिब्रेशन’ थीम के तहत विविधता का जश्न मनाता है. इसे भारतीय और विदेशी छात्र मिलकर आयोजित करते हैं. इसमें फूड स्टॉल, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और प्रदर्शनियां लगाई जाती हैं. कई देशों के स्टॉल इस फेस्टिवल का हिस्सा थे.
कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि बीजेवाईएम कार्यकर्ता बिना किसी एंट्री या पहचान पत्र के पुणे शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर कोथरुड स्थित एमआईटी-डब्ल्यूपीयू कैंपस में घुस आए.
फेस्टिवल में मौजूद एक अंतरराष्ट्रीय छात्र ने दिप्रिंट से कहा, “उन लोगों के पास आईडी कार्ड नहीं थे. वे विश्वविद्यालय के छात्र नहीं थे, फिर भी कैंपस में दाखिल हो गए. और जब वे बांग्लादेशी छात्रों पर हमला कर रहे थे और स्टॉल में तोड़फोड़ कर रहे थे, तब चौकीदार कुछ नहीं कर रहे थे.”
आधिकारिक बयान में एमआईटी-डब्ल्यूपीयू के रजिस्ट्रार गणेश पोकले ने कहा कि विश्वविद्यालय इस मामले को गंभीरता से ले रहा है.
उन्होंने कहा, “वर्ल्ड कल्चरल फेस्टिवल के दौरान एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई. शुरुआती जानकारी से पता चलता है कि कुछ अनधिकृत लोग परिसर में घुस आए. विश्वविद्यालय पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया में है.”
उन्होंने कहा कि वर्ल्ड कल्चरल फेस्टिवल विश्वविद्यालय का वार्षिक कार्यक्रम है, जो सांस्कृतिक विविधता का जश्न मनाने और अंतरराष्ट्रीय छात्रों को मंच देने के लिए आयोजित किया जाता है.
“विश्वविद्यालय सभी के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और समावेशी माहौल सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.”
दिप्रिंट से बातचीत में बीजेवाईएम के शहर अध्यक्ष दुष्यंत मोहोल ने कहा कि उन्हें छात्रों से एक पत्र मिला था, जिसमें कहा गया था कि फूड स्टॉल पर बांग्लादेश का झंडा लगाया गया है. यही पत्र आयोजन समिति को भी दिया गया था, लेकिन “विश्वविद्यालय ने इस पर कुछ नहीं किया.”
उन्होंने कहा, “हमें स्टॉल से दिक्कत नहीं थी, सिर्फ लगाए गए झंडों से थी. एक झंडा हटाने के बजाय उन्होंने दूसरा झंडा लगा दिया और हमें उकसाया. इसलिए हमने कार्रवाई की.”
उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “अगर भारत माता की रक्षा करने पर हमें गुंडा कहा जाता है, तो भी हमें मंजूर है.”
मोहोल ने कहा, “अगर भविष्य में ऐसा कुछ होता है, तो हम कार्रवाई करते रहेंगे और जो भी नतीजे होंगे, उनके लिए तैयार हैं. कॉलेज कानूनी कार्रवाई करने की बात कह रहा है. अगर वे ऐसा करते हैं, तो हम भी कानूनी नोटिस देंगे. जो भी होगा, हम जवाब देंगे. यह पुणे है, हम इसे जेएनयू नहीं बनने देंगे.”
कोथरुड पुलिस स्टेशन के एक इंस्पेक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर दिप्रिंट को बताया कि उन्हें घटना की जानकारी है.
“लेकिन अभी तक थाने में कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है, इसलिए मामले की जांच शुरू नहीं हुई है.”
तोड़फोड़
घटना का एक कथित वीडियो दिखाता है कि हमलावरों ने स्टॉल में तोड़फोड़ की और वहां मौजूद छात्रों पर भी हमला किया. मोहोले ने भी एक वीडियो साझा किया जिसमें वह और अन्य लोग त्योहार में मिले एक छोटे बांग्लादेशी झंडे को आग लगाते हुए दिख रहे हैं.
ऊपर बताए गए अंतरराष्ट्रीय छात्र ने कहा, “करीब शाम 6.30 बजे 30 युवकों का एक समूह आया और वे सीधे बांग्लादेश वाले स्टॉल की ओर गए और ‘भारत माता की जय’ जैसे नारे लगाते हुए सब कुछ तोड़ दिया. जब हमने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो उन्होंने कहा कि अगर हमने कोशिश की तो वे हम पर हमला करेंगे. वे बांग्लादेश के झंडे भी जला रहे थे.”
उसने आगे दावा किया कि तोड़फोड़ करने वाले सभी बांग्लादेशी छात्रों को ढूंढ रहे थे, और एक लड़की की तरफ भी दौड़े “जिसे दूसरे अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने वहां से ले जाकर सुरक्षित रखा.”
“वे उसकी तरफ आ रहे थे. लेकिन हम लड़कों ने उसे कॉलेज के इंटरनेशनल सेंटर में पहुंचा दिया. वह बहुत डरी हुई थी. अगली सुबह उन्होंने कॉलेज के गेट बंद कर दिए, बाहर खड़े हो गए और कहा कि कोई भी बांग्लादेशी अंदर नहीं आएगा,” अंतरराष्ट्रीय छात्र ने दिप्रिंट को बताया.
घटना के बाद से उस लड़की ने किसी से भी बात करने से मना कर दिया है.
बुधवार सुबह, बीजेवाईएम के कार्यकर्ता कथित तौर पर भारतीय झंडे लेकर विश्वविद्यालय की ओर मार्च करते हुए गए और गेट बंद कर दिए.
उन्होंने कथित तौर पर गेट के बाहर सड़क पर बांग्लादेश का झंडा बनाकर उस पर पैर रखे. सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें वे भारतीय झंडे पकड़े हुए सड़क पर बने बांग्लादेश के झंडे के ऊपर खड़े दिखाई दे रहे हैं.
“हमारी मंशा साफ थी. हमने उनसे (आयोजकों से) निवेदन किया और कहा कि आप बाकी सभी देशों और उनकी संस्कृतियों को दिखा सकते हैं, लेकिन बांग्लादेश को नहीं,” मोहोले ने दिप्रिंट से कहा, 18 दिसंबर 2025 को ढाका में बांग्लादेशी हिंदू दीपु चंद्र दास की लक्षित हमले में हत्या का जिक्र करते हुए.
मोहोळ ने कहा कि उनकी किसी छात्र से व्यक्तिगत समस्या नहीं है.
“वे सभी यहां आकर पढ़ाई करें, लेकिन जिस देश ने हमारे साथ अत्याचार किए हैं, जैसे हमारे भाई दीपु चंद्र दास के साथ, जिन्हें सार्वजनिक रूप से पीटा गया और जिंदा जला दिया गया, उस देश का झंडा नहीं लगाया जाना चाहिए था,” मोहोल ने कहा.
कुछ अंतरराष्ट्रीय छात्रों द्वारा तलवारों के साथ सांस्कृतिक नृत्य करने को लेकर भी विवाद हुआ, जिनका दावा है कि उन्होंने इसके लिए विश्वविद्यालय से अनुमति ली थी.
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में तलवारों के इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए, 21 वर्षीय प्रथम वर्ष के एमबीए छात्र रुद्र बिरहाड़े ने कहा, “हम इसे एक खतरे के रूप में देखते हैं. हमने प्रबंधन से पूछा कि उन्हें किसने अनुमति दी, लेकिन हमें कोई जवाब नहीं मिला… हमारा मुद्दा यह है कि वे मंच पर तलवारों के साथ कैसे नाच सकते हैं. आप अपना साहित्य और खाना दिखा सकते हैं, लेकिन एमआईटी पीस यूनिवर्सिटी में तलवारों के साथ नाचना बिल्कुल गलत है.”
गुमनाम रहना चाहने वाले एक छात्र ने दिप्रिंट को बताया, “प्रदर्शन के दौरान हमने नृत्य किया, और हमारे देश में हम तलवारों के साथ नाचते हैं, इसलिए हम अपनी संस्कृति दिखाने के लिए नकली तलवारें लाए थे, और हमने कॉलेज से इसकी अनुमति भी ली थी.”
रुद्र बिरहाड़े ने बांग्लादेशी झंडे के मुद्दे पर विश्वविद्यालय प्रशासन को भी पत्र लिखा था.
“हमें बांग्लादेशियों या किसी भी अंतरराष्ट्रीय छात्र से व्यक्तिगत तौर पर कोई समस्या नहीं है. हमने उनसे शांति से उनका झंडा हटाने को कहा था, उसके बाद ही स्टॉल में तोड़फोड़ हुई.
“हमने उन्हें (स्टॉल पर मौजूद छात्रों को) हाथ नहीं लगाया. उन्होंने दावा किया कि हमने एक लड़की पर हमला किया. ढाका की एक लड़की थी, हां, लेकिन हम उसकी तरफ गए भी नहीं. क्या हमारा झंडा कभी उनके देश में लगाने दिया जाएगा? नहीं, कभी नहीं,” रुद्र ने दिप्रिंट से कहा.
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