Monday, 27 June, 2022
होमएजुकेशनभारत में केवल 39% स्कूलों में कंप्यूटर, 22% के पास 2019-20 में इंटरनेट की सुविधा थी: सरकारी डाटा

भारत में केवल 39% स्कूलों में कंप्यूटर, 22% के पास 2019-20 में इंटरनेट की सुविधा थी: सरकारी डाटा

यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 84 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में लाइब्रेरी और रीडिंग रूम हैं, लेकिन उनमें से केवल 69.4 प्रतिशत में पुस्तकों के साथ लाइब्रेरी हैं.

Text Size:

नई दिल्ली: भारत में लगभग 78 प्रतिशत स्कूलों में अभी भी इंटरनेट की सुविधा नहीं है और 61 प्रतिशत से अधिक के पास कंप्यूटर नहीं है. केंद्र सरकार द्वारा 2019-20 के लिए जारी नया UDISE+ (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन) डाटा यह दिखता दिखाता है. UDISE डेटा में सरकारी और निजी दोनों स्कूल शामिल हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही 84 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में लाइब्रेरी और रीडिंग रूम हैं, लेकिन उनमें से केवल 69.4 प्रतिशत में पुस्तकों के साथ लाइब्रेरी हैं.

UDISE, पहली बार शैक्षणिक वर्ष 2012-13 के लिए शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किया गया, यह स्कूली शिक्षा पर सबसे बड़ी प्रबंधन सूचना प्रणाली में से एक है. इसमें 15 लाख से अधिक स्कूल, 85 लाख शिक्षक और 25 करोड़ स्कूली बच्चे शामिल हैं. UDISE+, UDISE का एक अपडेटेड वर्जन है.

UDISE डेटा का उपयोग स्कूली शिक्षा के स्तर को मापने के लिए विभिन्न अन्य मापदंडों की गणना के लिए भी किया जाता है, जैसे कि प्रदर्शन ग्रेडिंग इंडेक्स जो इस महीने की शुरुआत में जारी किया गया था.

पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के लिए अधिक लड़कियों का नामांकन

छात्र नामांकन के संदर्भ में डेटा से पता चलता है कि 2019-20 में प्री-प्राइमरी से उच्च माध्यमिक स्तर तक कुल 26.45 करोड़ छात्रों ने नामांकन किया था, जो कि 2018-19 सत्र की तुलना में 42.3 लाख अधिक है. सभी स्तरों पर लड़कियों के नामांकन में वृद्धि हुई, जो पूर्व-प्राथमिक स्तर पर सबसे अधिक 14.2 प्रतिशत लड़कियों को शैक्षणिक वर्ष 2018-19 की तुलना में 2019-20 में प्री-प्राइमरी स्तर पर नामांकित किया गया था.

अच्छी पत्रकारिता मायने रखती है, संकटकाल में तो और भी अधिक

दिप्रिंट आपके लिए ले कर आता है कहानियां जो आपको पढ़नी चाहिए, वो भी वहां से जहां वे हो रही हैं

हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.

अभी सब्सक्राइब करें

रिपोर्ट में कहा गया है कि स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) में 2018-19 की तुलना में 2019-20 में सुधार हुआ है. उच्च प्राथमिक स्तर पर में जीईआर 89.7 फीसदी (87.7 फीसदी से), प्राथमिक स्तर पर 97.8 फीसदी (96.1 फीसदी से), माध्यमिक स्तर पर 77.9 फीसदी (76.9 फीसदी से) और उच्चतर माध्यमिक स्तर पर 51.4 फीसदी (50.1 फीसदी से) हो गया.


यह भी पढ़ें : भारत बायोटेक के Covid-19 टीके Covaxin की खरीद में भ्रष्टाचार के आरोप, ब्राजील ने करार टाली


2012-13 और 2019-20 के बीच, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर लड़कियों के लिए जीईआर लड़कों की तुलना में अधिक बढ़ गया है. माध्यमिक स्तर पर लड़कियों के लिए जीईआर 2019-20 में 9.6 प्रतिशत बढ़कर 77.8 प्रतिशत हो गया है, 2012-13 में यह 68.2 प्रतिशत था.

स्कूली शिक्षा में शिक्षकों की संख्या में 2018-19 की तुलना में 2019-20 में 2.72 प्रतिशत की वृद्धि हुई. 2019-20 में 96.87 लाख शिक्षक स्कूली शिक्षा में लगे थे, जो 2018-19 की तुलना में लगभग 2.57 लाख अधिक है.

बुनियादी सुविधाओं की ओर इशारा करते हुए, रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 90 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में हाथ धोने की सुविधा थी. 2012-13 में केवल 36.3 प्रतिशत से उल्लेखनीय सुधार हुआ. 2019-20 में 83.4 फीसदी स्कूलों में बिजली थी, 2018-19 की तुलना में 7 फीसदी का सुधार हुआ है.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

share & View comments