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Saturday, 13 July, 2024
होमएजुकेशन‘पहले नियम देखने की ज़रूरत’— विदेशी कैंपस बनाने के लिए UK की यूनिवर्सिटी को UGC के मानदंडों का इंतज़ार

‘पहले नियम देखने की ज़रूरत’— विदेशी कैंपस बनाने के लिए UK की यूनिवर्सिटी को UGC के मानदंडों का इंतज़ार

यूजीसी के अध्यक्ष प्रोफेसर एम. जगदेश कुमार का कहना है कि भारत में कैंपस स्थापित करने के इच्छुक विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए नियम ‘अंतिम चरण में हैं और जल्द ही घोषित किए जाएंगे’.

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नई दिल्ली: ब्रिटेन की सरकार के अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा चैंपियन प्रोफेसर सर स्टीव स्मिथ ने मंगलवार को दिप्रिंट को बताया कि ब्रिटिश यूनिवर्सिटी भारत में कैंपस बनाने के मसले पर विचार करने से पहले यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (यूजीसी) के प्रस्तावित मानदंडों की बारीकियों को देखने का इंतज़ार कर रहे हैं.

यूजीसी द्वारा भारत में कैंपस बनाने और शुरू करने के इच्छुक विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए मसौदा नियमों को जारी किए हुए नौ महीने बीत चुके हैं, लेकिन उच्च शिक्षा नियामक ने अभी तक मानदंडों का अंतिम मसौदा जारी नहीं किया है.

यूजीसी के अध्यक्ष प्रोफेसर एम. जगदेश कुमार ने मंगलवार को एक बयान में दिप्रिंट को बताया कि “नियम अंतिम चरण में हैं और जल्द ही यूजीसी इसे घोषित कर देगा”.

यह पूछे जाने पर कि क्या ब्रिटिश विश्वविद्यालयों ने भारत में कैंपस बनाने में रुचि दिखाई है, कुमार ने कहा, “ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी को भारत में कैंपस बनाने को लेकर रुचि है. एक बार नियमों की घोषणा हो जाने के बाद, कई विश्वविद्यालयों से इन ‘हल्के लेकिन कड़े’ नियमों का लाभ उठाने और अपने कैंपस स्थापित करने की उम्मीद की जाती है.”

यह पूछे जाने पर कि ब्रिटिश काउंसिल के नेतृत्व में चल रहे भारत-यूके उच्च शिक्षा सम्मेलन की पृष्ठभूमि में ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी भारत में कैंपस बनाने के मौके को कैसे देख रही है, प्रोफेसर सर स्टीव स्मिथ ने हालांकि, कहा, “असली बात जानकारी में छिपी है”.

स्मिथ, जिन्हें जून 2020 में यूके का पहला अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा चैंपियन नियुक्त किया गया था, ने क्या ब्रिटिश विश्वविद्यालय भारत में कैंपस खोलने पर विचार करेंगे के बारे में पूछे जाने पर कहा, “यह सटीक विनियमन पर निर्भर करता है कि आप इसे कैसे वित्त पोषित करते हैं, ज़मीन का मालिक कौन है, बौद्धिक संपदा किसके पास है, क्या होता है, पूंजी निवेश, शुल्क, गुणवत्ता आश्वासन आदि क्या और कैसे हैं.”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे नहीं लगता कि हमें तुरंत कोई उम्मीद करनी चाहिए और इसका कारण यह है कि हमें सबसे पहले सटीक नियमों को देखने की ज़रूरत है.”

एक्सेटर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति, स्मिथ ने कहा कि “लगभग 27 ब्रिटिश विश्वविद्यालयों की किसी न किसी रूप में अंतरराष्ट्रीय शाखाएं हैं,” लेकिन वो भारत आने पर विचार करेंगे, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि यह (नियम) “उनके लिए सही” है या नहीं.

उन्होंने कहा, “उन्हें सभी प्रमुख पहलुओं पर स्पष्टता की ज़रूरत है जैसे कि क्या शिक्षा की प्रक्रिया भारतीय होगी या ब्रिटिश? या फिर डिग्री को मान्यता मिलेगी? विश्वविद्यालयों के शासी निकाय केवल नियमों को देखने के बाद ही निवेश करने का फैसले ले सकते हैं.”

31 ब्रिटिश विश्वविद्यालयों और कॉलेजों का एक प्रतिनिधिमंडल, जिसका प्रतिनिधित्व उनके कुलपतियों या प्रति-कुलपतियों द्वारा किया जाता है, वर्तमान में दोनों देशों के बीच ट्रांसनेशनल एजुकेशन (टीएनई) के साथ-साथ ब्रिटिश काउंसिल के गोइंग ग्लोबल पार्टनरशिप्स (जीजीपी) कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए भारत में हैं. प्रतिनिधिमंडल में यूके सरकार के शिक्षा और व्यावसायिक विभागों के अधिकारी भी शामिल हैं.


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यूजीसी मसौदा मानदंड और सुझाव

इस साल 5 जनवरी को यूजीसी ने अपने ड्राफ्ट (भारत में विदेशी उच्च शैक्षणिक संस्थानों के कैंपस की स्थापना और संचालन) विनियम, 2023 को जारी किया और मसौदे आमंत्रित किए.

मसौदा नियमों में कहा गया है कि “समग्र/विषय-वार वैश्विक रैंकिंग” के शीर्ष 500 में शामिल विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस बनाने की अनुमति दी जाएगी. इसने विदेशी विश्वविद्यालयों को बंदोबस्ती और स्कोलरशिप के अलावा एक “पारदर्शी और उचित” प्रवेश प्रक्रिया और फी स्ट्रक्चर स्थापित करने की स्वतंत्रता देने का भी प्रस्ताव रखा है. इसके अलावा, मसौदा मानदंडों में विश्वविद्यालयों को यह तय करने के लिए स्वायत्तता की सिफारिश की गई है कि वो किसे प्रवेश देना चाहते हैं, वो कितनी फीस लेना चाहते हैं और संभावित स्टूडेंट्स को कितनी वित्तीय सहायता प्रदान कर सकते हैं.

अप्रैल में यूजीसी के अध्यक्ष ने दिप्रिंट को बताया था कि विदेशी विश्वविद्यालयों द्वारा पेश किए जाने वाले पाठ्यक्रमों में साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग, जैव प्रौद्योगिकी, वित्तीय प्रबंधन और बिजनेस एनालिटिक्स शामिल होने की संभावना है, जिसकी स्टूडेंट्स द्वारा “मांग” की जाती है और ये रोज़गार की अच्छी संभावनाएं पेश करते हैं.

जुलाई तक यूजीसी को भारत, यूके, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा, इटली, फ्रांस और रूस के विश्वविद्यालयों सहित 200 से अधिक हितधारकों से सुझाव प्राप्त हुए. इनमें मेलबर्न विश्वविद्यालय, नॉर्थईस्टर्न विश्वविद्यालय, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय, क्वींसलैंड विश्वविद्यालय, सेंट पीटर्सबर्ग विश्वविद्यालय और इस्टिटुटो मारंगोनी शामिल हैं.

कुछ लोगों ने विदेशी यूनिवर्सिटी ग्रुप्स को भारत में कैंपस बनाने की अनुमति देने का सुझाव दिया था, जिसमें स्पष्ट रूप से संकाय पात्रता मानदंड बताए गए थे और विदेशी संकाय के मामले में, देश में उनके रहने की आवश्यक अवधि बताई गई थी.

अब तक, दो ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालयों, डीकिन और वोलोंगोंग ने भारत में कैंपस बनाने की अपनी योजना की घोषणा की है. डीकिन यूनिवर्सिटी ने कहा कि वो “जितनी जल्दी हो सके और 2024 के मध्य से पहले” इसे शुरू करने की योजना बना रही है, जबकि वोलोंगोंग यूनिवर्सिटी ने इस साल जुलाई में संकेत दिया था कि वो 2023 के अंत तक भारत में अपना कैंपस बना सकती है.”

(संपादन: फाल्गुनी शर्मा)

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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