नई दिल्ली: सेकेंड ईयर के बीटेक छात्र साहिल वाकोड़े की मौत के बाद सवालों के घेरे में आए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बॉम्बे के प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला को छुट्टी पर भेज दिया गया है. संस्थान ने वाकोड़े की आत्महत्या से हुई मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए 10 सदस्यों की एक कमेटी भी बनाई है.
अधिकारियों के मुताबिक, IIT बॉम्बे के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने सोमवार को दोनों फैसले लिए. कमेटी की अध्यक्षता IIT पलक्कड़ के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरपर्सन रमेश वेंकटेश्वरन करेंगे. कमेटी को एक हफ्ते के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है. इसमें छात्रों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं, जैसा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मांग की थी.
दुल्ला उस परीक्षा में इनविजिलेटर थे, जिसमें वाकोड़े को कथित तौर पर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़ा गया था. एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के सेकेंड ईयर के छात्र वाकोड़े 18 सितंबर को परीक्षा के कुछ घंटे बाद अपने हॉस्टल के कमरे में मृत पाए गए थे.
इससे पहले संस्थान ने दुल्ला को डीन के पद से निलंबित कर दिया था. हालांकि, प्रदर्शन कर रहे छात्र उनकी संस्थान से सस्पेंशन और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे थे.
वाकोड़े के माता-पिता ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे के साथ दुल्ला ने जाति के आधार पर भेदभाव किया था. उन्होंने मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए इस आरोप को दोहराया और कहा कि साहिल ने करीब तीन महीने पहले इस मुद्दे के बारे में उन्हें बताया था.
उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने प्रोफेसर दुल्ला और अन्य लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और SC/ST (प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज) एक्ट से जुड़ी धाराओं के तहत FIR दर्ज की थी. इसके बाद यह मामला मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया, जो इसकी जांच कर रही है.
IIT बॉम्बे के फैकल्टी सदस्यों ने प्रोफेसर दुल्ला के समर्थन में सामने आकर कहा कि वे अपने सहयोगी के साथ “मजबूती से खड़े हैं”. यह बयान संस्थान के फैकल्टी फोरम ने जारी किया, जो करीब 750 फैकल्टी सदस्यों का प्रतिनिधित्व करता है.
IIT मद्रास के फैकल्टी सदस्यों ने भी दुल्ला का समर्थन किया. फैकल्टी एसोसिएशन ने इस घटना की “निष्पक्ष, पारदर्शी और तय समय में” जांच की मांग की.
इस बीच, सोमवार देर रात जारी एक बयान में छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि यह मामला “छात्रों के नेतृत्व में” ही रहना चाहिए और इसे संस्थान के भीतर ही सुलझाया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि IIT बॉम्बे के छात्र समुदाय की चिंताओं को बाहरी “राजनीतिक हितों” या संगठनों को प्रभावित नहीं करना चाहिए.
प्रोफेसर दुल्ला को लेकर छात्र प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका रुख “कभी भी दोष मान लेने या चल रही जांच से पहले ही कोई निष्कर्ष निकालने का नहीं रहा है”. उन्होंने कहा कि वे फैकल्टी समुदाय के सदस्य के तौर पर उनके साथ खड़े हैं और चाहते हैं कि जांच “निष्पक्ष और बिना किसी पक्षपात के” आगे बढ़े.
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